उत्तराखंड के सपूतों को अहम पदों पर जिम्मेदारी देने का सिलसिला लगातार जारी है। उत्तराखंड के लैंसडाउन में 10 अगस्त 1960 को जन्मे जस्टिस सुधांशु धूलिया उत्तराखंड हाईकोर्ट से हैं और सुप्रीम कोर्ट आने वाले वह उत्तराखंड के दूसरे जज बन गए हैं। जस्टिस धूलिया से पहले जस्टिस पीसी पंत सुप्रीम कोर्ट में जज रह चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए कॉलेजियम ने दो जजों के नाम की सिफारिश सरकार को भेजी है। जिनमें एक जस्टिस सुधांशु धूलिया इस समय गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं, और दूसरे जस्टिस जमशेद बुरजोर पारदीवाला हैं, जो अभी गुजरात हाईकोर्ट में जज हैं।
जस्टिस धूलिया ने 1986 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी और 2000 में नया राज्य बनने के बाद उत्तराखंड आ गए। वह 2004 में वह वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किए गए और 2008 में उन्हें हाईकोर्ट में जज बनाया गया। इसके बाद जनवरी 2021 में वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। सुधांशु धूलिया पूर्व में नैनीताल हाईकोर्ट के जज भी रह चुके हैं।
जस्टिस सुधांशु धूलिया जिला पौड़ी के दूरस्थ मदनपुर गांव से हैं। उनके दादा बीडी धूलिया स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। उन्होंने कोटद्वार से एक साप्ताहिक अखबार कर्मभूमि निकाला था, जिसने स्वतंत्रता के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपनी शिक्षा देहरादून और इलाहाबाद से पूरी की। वह सैनिक स्कूल लखनऊ के छात्र भी रहे हैं।
जस्टिस धूलिया के पिता केसी धूलिया इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज रहे चुके हैं। जस्टिस धूलिया की माता रिटायर शिक्षिका है और देहरादून में निवास करती हैं। उनके बड़े भाई पूर्व नेवी अधिकारी हिमांशु धूलिया दून के एक विवि में रजिस्ट्रार पद पर हैं जबकि छोटे भाई तिग्मांशु धूलिया जाने माने फिल्म निर्देशक हैं। जस्टिस धूलिया के एक पुत्र श्रेयांस धूलिया बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल में डॉक्टर हैं, जबकि एक पुत्र उत्तराखंड हाई कोर्ट में अधिवक्ता व एक अपने पिता के साथ ही हैं।


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