Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल द्वारा खास और आम के साथ भेदभाव
उत्तराखंड न्यूज़उत्तरकाशीताज़ा ख़बरसरोकार

जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल द्वारा खास और आम के साथ भेदभाव

यह बात वर्ष 2017 की है, जब जिलाधिकारी टिहरी ने अपने आदेश के तहत, मसूरी – चम्बा फल पट्टा योजना के पट्टेदार दया सिंघा, करन सिंघा और संजीव सिंघा को पट्टे के नवीनीकरण हेतु ( 27/12/2012 से 27/11/2042 तक), 30 वर्ष की अवधि के लिए पट्टे को नवीनीकृत किया। यह उन्होंने गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत शासनादेश संख्या 150/1/85(24)-रा-6, 27 जुलाई 1987 के पैरा 10-XIII (क) में दी गयी व्यवस्था के अनुकूल किया गया था।

लेकिन, जब अपने फल पट्टे (प्लाट नं० 4- सै० 3 उपला तिखोन) कानाताल, टिहरी गढ़वाल के नवीनीकरण के लिए ब्रिगेडियर सर्वेश दत्त डंगवाल, (विशिष्ट सेवा पदक से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित) ने प्रार्थना की तो उनको कार्यालय जिला उद्यान अधिकारी के पत्रांक 1193/च० म० फ० प० यो०/2019-2020 /दिनांक 27/08/2019 में यह कहा कि, आप अपने पट्टे की लीज डीड मय नक्शे एवं वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अन्तर्गत भारत सरकार पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की स्वीकृति प्राप्त करने हेतु, प्रस्तुत प्रपत्र 6 प्रतियों में प्रमाण पत्रावली तैयार कर वनाधिकारी टिहरी को प्रेषित करें और नवीनीकरण का प्रस्ताव फिर इस कार्यालय में प्रस्तुत करें। जिसके उपरान्त ही अग्रनेत्तर कार्यवाई की जायेगी। इनसे यह भेदभाव क्यों ?

इससे यह स्पष्ट विदित है कि उत्तराखंड में ब्रिटिश साम्राज्य की परम्परा, जिसमें विशिष्ट (खास) और साधारण (आम) के साथ भेदभाव और पक्षपात होता था आज भी उपयुक्त है। भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है जिसमें आम और खास में कोई फर्क नहीं है, लेकिन हमारे प्रदेश का यह दुर्भाग्य है कि आज (09 नवम्बर को) जब हम उत्तराखंड का स्थापना दिवस मना रहे हैं, उसकी नौकरशाही और सरकार इस घिनौनी प्रवृति से ग्रसित होकर भाई भत्तीजेवाद की कार्यशैली में संग्लिप्त है।

फल पट्टे के पट्टेदारों के साथ शासन और सरकार का सौतेला व्यवहार हो रहा है और हमारे नौकरशाह और जनता के प्रतिनिधि अपनी आंखे ना ही केवल बंद कर बैठे हैं अपितु अनैतिक और अन्यायसंगत कार्यवाई करने में मशगूल हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...