जनरल स्वर्गीय बीसी जोशी के पुत्र अक्षय जोशी ने श्रद्धांजलि सभा में आये सभी लोगों का धन्यवाद दिया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी माता के बारे में बताया कि मेरी माता जी ने हमेशा पिताजी का साथ दिया और वह हर कदम पर उनके साथ थी। पिताजी के स्वर्गवास के बाद माताजी ने पूरे परिवार का ख्याल रखा और आखिरी समय तक उनका आशीर्वाद हमारे ऊपर बना रहा।

मंजुला जोशी अपने सुपुत्र के साथ दिल्ली में रहती थी। उनके दो पुत्र हैं अभय जोशी और अक्षय जोशी। मंजुला जोशी का जन्म 1945 को हुआ और उनकी मृत्यु 16 नवंबर 2022 को हुई। मंजुला जोशी का भी जनरल बीसी जोशी की तरह उत्तराखंड और पहाड़ के सरोकारों से लेकर लगाव रहता था।
जनरल बीसी जोशी को उत्तराखंड की आन, बान और शान कहा जाता था। नब्बे के दशक में पहाड़ से निकले युवाओं ने देशभक्ति का जज्बा लिए जब भी सेना में कदम बढ़ाया तो उनके दिल में बीसी जोशी का नाम प्रेरणा बना। वह पहाड़ के पहले शख्स थे, जो सेना प्रमुख के पद पर पहुंचे।

देवभूमि उत्तराखंड के बारे में कहा जाता है कि शायद ही कोई गांव ऐसा हो जहां से लोग सेना में जाकर देशसेवा न कर रहे हों। ऐसे में जब उनका लाल सेना में सर्वाच्च पद पर पहुंचा हो तो उनकी खुशी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। 1 जुलाई 1993 को उन्होंने आर्मी चीफ का पदभार संभाला।
उत्तराखंड के सपूत जनरल बिपिन चंद्र जोशी का भारतीय सेना के प्रमुख रहते 19 नवंबर 1994 को निधन हो गया। जब निधन हुआ उस समय उनकी उम्र 58 साल थी, नई दिल्ली स्थित सैन्य अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। वह 1995 में सेवानिवृत्त होने वाले थे पर होनी को कुछ और ही मंजूर था। हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई। वह भारतीय सेना के एकमात्र चीफ हैं जिनकी मृत्यु कार्यकाल के दौरान हुई।

आज भले ही यह दोनों लोग हमारे बीच नहीं हैं पर जनरल बिपिन चंद्र जोशी और उनकी पत्नी मंजुला जोशी को पूरे देश लोग उनको सदैव याद करेंगे। वह युवा पीढ़ी को सदैव देशसेवा और प्रेरणा पुंज के रूप में राह दिखाते रहेंगे। कहा जाता है कि एक सफल आदमी के पीछे उनकी पत्नी का भी अहम योगदान होता है और यह बात मंजुला जोशी ने करके दिखाई।


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