इस अनुबंध के अनुरूप प्रौद्योगिक महाविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के संकाय सदस्यों के एक्सपर्ट अनुभव एवं उनकी विषय विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण निर्माण विभाग में कार्यरत कनिष्ठ अभियंताओं के 25-25 के बैच को निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच संबंधी 10 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराएगा।
ग्रामीण निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता विभु विश्वमित्र रावत ने बताया कि सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विभाग के अभियंताओं की जहां निर्माण के दौरान और निर्माण के उपरांत होने वाले गुणवत्ता परीक्षण संबंधी ज्ञान में वृद्धि होगी वहीं गुणवत्ता परीक्षण के आधुनिक तरीकों के बारे में जानकारी भी मिलेगी, जिससे विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा। विभु रावत ने भविष्य में सिविल इंजीनियरिंग विभाग, पंतनगर को अपने विभाग के तकनीकी सहायोग के रूप में भी सहयोग करने की आशा व्यक्त की।
इस अवसर पर कुलपति, डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि ऐसे अनुबंध विश्वविद्यालय के शिक्षा प्रसार के माध्यम से उत्तराखंड के सम्यक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
डा. अलकनंदा अशोक ने कहा कि ऐसे अनुबंधों को नई शिक्षा नीति के अंतर्गत संस्थान और इंडस्ट्री के सहयोग के रूप में देखा जा सकता है। भविष्य में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों को भी ग्रामीण निर्माण विभाग के माध्यम से प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिविल इंजीनियरिंग विभाग का इस वर्ष का यह तीसरा अनुबंध है।
इस कार्यक्रम में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष, डा. पी.एस. महर सहित डा. संजीव सुमन, डा. संदीप गुप्ता, डा. सुनील कुमार, डा. वनीता देवी एवं डा. सुबीर शर्मा भी उपस्थित थे।


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