मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नकल अध्यादेश को लेकर हमने कहा था कि इसे हम जरूर लेकर आएंगे। लेकिन किन्हीं कारणों से कैबिनेट होने में देरी हो गयी। कैबिनेट न होने के बावजूद हमने नकल विरोधी अध्यादेश को विचलन से महामहिम राज्यपाल को अग्रसारित कर दिया है। यह भी तय कर दिया है कि अब जितनी भी परीक्षाएं होंगी वो सभी इस अध्यादेश से आच्छादित होंगी। सबसे सख्त कानून जो हो सकता है, वो हमने बनाने का काम किया है। इस कानून के तहत आजीवन कारावास तक की सजा के अलावा दस करोड़ रूपए तक के जुर्माने के सख्त प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि हम अपने छात्रों, बेटों-बेटियों से कहना चाहते हैं कि सभी परीक्षा पारदर्शी होंगी, किसी भी अफवाहों पर न जाएं, परीक्षा की तैयारी पर ध्यान दें, सभी परीक्षाएं निष्पक्ष और शुचिता के साथ होंगी।
इससे पहले आज अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से सचिवालय में उत्तराखंड बेरोजगार संघ के सदस्यों ने भेंट की। बेरोजगार संघ के सदस्यों ने अपर मुख्य सचिव को अपने मुद्दों से अवगत कराया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बेराजगार संघ द्वारा रखे गये मुद्दों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवा अपनी बात शांतिपूर्वक तरीके से रखें। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बिल्कुल निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाए।
इसी उद्देश्य से उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाया गया है। गत दिवस उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश -2023 के प्रख्यापन हेतु मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। इतना सख्त कानून बनाने का उद्देश्य है कि राज्य के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल रहे। युवाओं को अपनी मेरिट के आधार पर नौकरी मिलें। देश में इतना सख्त कानून किसी भी अन्य राज्य में नही है।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि गत एक वर्ष से परीक्षाओं में धांधली से सम्बन्धित शिकायतों पर पूरी निष्पक्षता से जांच हुई है। जांच के परिणामस्वरूप कई दोषी जेल की सलाखों के पीछे हैं। सरकार ने अत्यन्त त्वरित कार्यवाही की है। बहुत सख्ती से जांच हुई है। भर्ती परीक्षाओं में अनुचित कार्य करने की मंशा रखने वाले लोगों के लिए एक कड़ा संदेश गया है।


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