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जनरल ने निभाया ‘परमवीर’ की पत्नी से किया वादा

ये संभवत: पहला मौका रहा होगा जब कोई सेना प्रमुख एक शहीद के गांव जाकर उसकी याद में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल हुआ। 10 सितंबर 2017 का दिन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के लिए खास था। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत खुद परमवीर चक्र विजेता और 1965 के भारत-पाक युद्ध के नायक वीर अब्दुल हमीद के गांव धामूपुर पहुंचे और उनकी शहादत को सलाम किया।
जनरल रावत ने यहां शहीद की प्रतिमा का अनावरण करने के साथ ही उनकी पत्नी रसूलन बीबी का खुले मंच पर स्वागत किया। यही नहीं उन्हें पूरा सम्मान देते हुए उनसे आशीर्वाद भी लिया। भारतीय सैन्य परंपरा का यह लम्हा अब इतिहास के यादगार लम्हों में दर्ज हो गया है। दरअसल, जनरल रावत ने गाजीपुर पहुंचकर एक शहीद की पत्नी से किया अपना वादा निभाया। यह भारतीय सेना की उस परंपरा का भी सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है, जो यह बताती है कि सेना अपने शहीदों के परिवारों का पूरा ख्याल रखती है। जनवरी 2017 में सेना प्रमुख बनने के बाद शहीद वीर अब्दुल हमीद की धर्मपत्नी रसूलन बीबी जनरल रावत से मिली थीं। उन्होंने सेना प्रमुख से ये आग्रह किया था कि उनके जीवनकाल में एक बार सेना का बड़ा अधिकारी शहीद हमीद को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके मेमोरियल पर आएं। हर साल 10 सितम्बर को शहीद अब्दुल हमीद का परिवार उनके लिए एक सभा का आयोजन करता है। परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद की पत्नी की वृद्धावस्था को देखते हुए जनरल रावत ने खुद गाजीपुर जाने का फैसला किया। उन्होंने अपना वादा निभाया और सपत्नी शहीद अब्दुल हमीद के गांव धामूपुर पहुंचे।
इस मौके पर उन्होंने कहा, मुझे शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत समारोह में निमंत्रण देकर बुलाया गया। इसके लिए मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मैं यहां आकर धन्य हो गया। बस हमें यह सुनिश्चित करना है कि उनकी शहादत हमेशा आने वाली पीढ़ियों को सेना में शामिल होने और देश के लिए जान की बाजी लगाने के लिए प्रेरित करती रहे। गाजीपुर की धरती से लोग हमेशा देश की सेवा के लिए आगे आते हैं।
सेनाप्रमुख ने अपने वादे को निभाने के लिए तब भी समय निकाला जब चीन के साथ दोकलम विवाद के चलते भारत-चीन की सेनाओं में तनातनी चल रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना अपने शहीद जवानों के परिवारों का पूरा ख्याल रखती है, उन्हें कभी नहीं भुलाती।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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