Friday , 4 September 2026
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पशु एवं दुग्ध उत्पादकता की चुनौतियों पर बोले डॉ मनमोहन सिंह चौहान, आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके बढ़ेगा दूध उत्पादन

डॉ. डी. सुंदरेसन सभागार में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने दीप प्रज्जवलित किया। इस अवसर पर डॉ. चौहान का प्रशस्ति-पत्र पढ़ा गया और उन्हें डॉ. कृष्णास्वामी किलारा अय्या स्मृति व्याख्यान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. धीर सिंह ने बताया कि पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन चौहान विश्व प्रसिद्ध जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक है। उन्होंने वर्षों के शोध में पशुधन दक्षता के लिए संभावित प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी विकसित की तथा गाय, भैंस, बकरी और याक में टेस्ट ट्यूब बेबी (इनविट्रो भू्रण) की तकनीक की महत्वपूर्ण और आसान विधि विकसित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कृत्रिम गर्माधान, ईस्ट्रस सिंक्रोनाइजेषन, मल्टीपल ओव्यूलेशन इंडक्षन और भ्रूण स्थानांतरण, शुक्राणु और भ्रूण सेंक्सिंग और इन विट्रो भ्रूण उत्पादन और परमाणु हस्तांतरण के माध्यम से क्लोनिंग से शुरू होने वाली विभिन्न प्रजनन तकनीक पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पशु नस्ल सुधारीकरण के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण, ओवम पिकअप, आईवीएफ, स्टेम सैल और क्लोनिंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रहे हैं। इन तकनीकों का प्रयोग करने का लक्ष्य है कि अच्छे नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाकर दुग्ध उत्पादन में बढ़ोत्तरी करना है।

डॉ. चौहान ने बताया कि आमदनी दोगुना तब होगी जब कम इनपुट में ज्यादा आउटपुट मिलेगा। वर्तमान में 60 प्रतिशत खर्च पशुओं के दाने एवं चारे पर हो जाता है इसलिए ऐसा अनुसंधान किया जा रहा है जिससे पशुओं के दाने एवं चारे पर कम खर्च कर अधिक दुग्ध उत्पादन प्राप्त किया जा सके। कार्यक्रम में संस्थान के लगभग 700 वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्रों ने भाग लिया।

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Hill Mail

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