इस अवसर पर सभी अतिथियों को अंगवस्त्र, पौधा और स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद एनसीवेब की निदेशक प्रो. गीता भट्ट द्वारा स्वागत वक्तव्य दिया गया जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सागर सिंह कलसी (आईपीएस), के. रमेश, रश्मि शर्मा (आईपीएस), साइबर एक्सपेर्ट विनोद वालिया, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ अरुंधति चौधरी, जॉइन्ट प्रॉक्टर प्रो. अवधेश कुमार, हंसराज महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रमा शर्मा, एनसीवेब के उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र कुमार का स्वागत किया।

अपने वक्तव्य में उन्होंने दिल्ली पुलिस, एनसीवेब और हंसराज महाविद्यालय का विशेष धन्यवाद देते हुए इस पहल का स्वागत किया और आज के तकनीकी युग में इसकी आवश्यकता को रेखांकित किया और पूर्व आयोजनों से लाभान्वित छात्राओं का आभार भी दिल्ली पुलिस को अर्पित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में साइबर एक्सपेर्ट विनोद वालिया के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने फ़हीम जोगापुरी की पंक्ति “वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से/ वो और थे जो हार गए आसमान से।“ पंक्ति का उल्लेख करते हुए तकनीकी रूप से सशक्त हो रही महिला की भूमिका को दर्शाया।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सागर सिंह कलसी (आईपीएस) ने अपने वक्तव्य में सबसे पहले ‘अलर्टनेस’ पर बल दिया। उसके बाद इंटरनेट की निजी जानकारी किसी से भी साझा न करने पर बल दिया। साथ ही साथ उन्होंने छात्राओं को लगातार पढ़ने के साथ और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया और बताया कि यही आपके आत्मविश्वास की जड़ बनेगी। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने साइबर सुरक्षा के दिल्ली पुलिस की कर्त्तव्यनिष्ठा और प्रतिबद्धता को ज़ाहिर किया।

अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ अरुंधति चौधरी ने अपने वक्तव्य में महिला सशक्तिकरण के लिए साइबर सुरक्षा को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की कड़ी में अनिवार्य क़दम बताया। अपने वक्तव्य में के लिए कहा छात्राओं को 3डी (डिसिप्लीन, डेडिकेशन और डिटरमिनेशन) होकर अपने लक्ष्य की ओर हिम्मत के साथ जुटे रहने और खुद को किसी भी स्थिति में कमतर न आंकने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद एनसीवेब हंसराज महाविद्यालय केंद्र की छात्राओं द्वारा स्वरचित काव्यपाठ किया गया।
अगले महत्त्वपूर्ण चरण में साइबर सुरक्षा जागरूकता पर कार्यशाला की शुरुआत हुई। इस कार्यशाला में दिल्ली पुलिस के साइबर एक्सपेर्ट विनोद वालिया ने छात्राओं से संवाद किया और उन्हें पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जागरूक किया। जागरूकता की कड़ी में सचेत होने पर सर्वाधिक बल दिया। इसके अतिरिक्त वास्तविक जीवन के विभिन्न साइबर अपराधों की घटनाओं के माध्यम से उन्हें जागरूक किया। साथ ही साथ केस स्टडी के द्वारा उन्हें साइबर अपराध और धोखाधड़ी के सभी पहलुओं की जानकारी दी और साइबर सुरक्षा के सभी पहलुओं से भी परिचित कराया। सुरक्षा की महत्त्वपूर्ण कड़ी में उन्होंने हर महीने मोबाइल फोन को निजी तौर पर ऑडिट करने के लिए कहा। इसके साथ ही इंटरनेट पर विभिन्न अकाउंट्स के पासवर्ड की सुरक्षा के पहलुओं से भी परिचित कराया।

अंतिम पड़ाव पर एनसीवेब उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र कुमार को धन्यवाद ज्ञापन के लिए आमंत्रित किया गया। सबसे पहले उन्होंने इस कार्यक्रम की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसके लिए दिल्ली पुलिस के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। सागर सिंह कलसी (आईपीएस), अरुंधति चौधरी (अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़), के. रमेश, रश्मि शर्मा (आईपीएस), साइबर एक्सपेर्ट विनोद वालिया, अंतरराष्ट्रीय जॉइन्ट प्रॉक्टर प्रो. अवधेश कुमार, हंसराज महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रमा शर्मा, एनसीवेब निदेशक प्रो. गीता भट्ट, हंसराज महाविद्यालय केंद्र, महाराजा अग्रसेन केंद्र, सत्यवती महाविद्यालय केंद्र के टीचिंग, नॉन-टीचिंग स्टाफ और विद्यार्थियों, नाट्य प्रस्तुति, नृत्य प्रस्तुति और स्वरचित कविता पाठ करने वाली छात्राओं, एनसीवेब केंद्र के सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों, आयोजन समिति के सभी सदस्यों और छात्राओं का धन्यवाद किया। इस कार्यक्रम में, हंसराज महाविद्यालय केंद्र, महाराजा अग्रसेन केंद्र, सत्यवती महाविद्यालय केंद्र और पीजी केंद्र की 1000 से अधिक छात्राएं शामिल थीं। इस कार्यक्रम के बाद 15,000 से अधिक छात्राएं एनएसीवेब के साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान से लाभान्वित हुईं।


Leave a comment