इस सम्मेलन का श्रीगणेश मुख्य व विशिष्ट अतिथियों के साथ-साथ अन्य मंचासीनों में प्रमुख एकीकृत पर्वत पहल (आईएमआई) फोरम अध्यक्ष पी बी राय, सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे ताप्ती ग्यालसन, प्रधान वन संरक्षक चिमकेन, डॉ सतीश, करतथा पूर्व फोरम अध्यक्ष सुशील रमोला इत्यादि द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर व आयोजकों द्वारा सभी मंचासीनों को पसमीना ओढा कर व पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत अभिनंदन किया गया।
एकीकृत पर्वत पहल (आईएमआई) फोरम अध्यक्ष पी बी राय द्वारा मुख्य व विशिष्ट अतिथियों के साथ-साथ सभी मंचासीनों व 11 पर्वतीय राज्यों से ’जलवायु परिवर्तन’ विषय पर गहन मंथन करने आए प्रबुद्ध जनों का फोरम सदस्यों व पदाधिकारियों की ओर से अभिनंदन स्वागत कर अवगत कराया गया, आयोजित सम्मेलन में विधायक सिक्कम व मणिपुर क्रमशः वैन्युंगपा व राम मोहिता भी सभागार में उपस्थित हैं।

इस अवसर पर अतिथि केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा आयोजकों व सभागार में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों का प्रभावशाली ज्वलंत विषय पर सम्मेलन आयोजित करने व उन्हें आमन्त्रित करने हेतु आभार व्यक्त कर कहा गया, उत्तराखंड केदारनाथ 2013 की त्रासदी मैंने प्रत्यक्ष देखी व भुक्ती है। उत्तराखंड की धरती को प्रणाम करता हूं। स्वतंत्रता के अमृत काल में भारत विकास करे सभी चाहते हैं परंतु एकीकृत पर्वतीय पहल पहाडी क्षेत्रों के योगदान की नितांत जरूरत है। अनुसंधान आधारित विकास की योजना तैयार करने से यह पूर्ण होगा।
अश्विनी कुमार चौबे द्वारा व्यक्त किया गया, पूत के पांव पालने मे ही दिख जाता है। पर्वतीय क्षेत्र का विकास भारत को सम्रद्ध बनाने के लिए जरूरी है। इतने बडे भू-भाग का विकास जरूरी है। कहा गया, पूर्वोत्तर के राज्यों ने हमारी सरकार बनाई है, सरकार का ध्यान पहाडी क्षेत्रों के विकास पर है। एक्ट ईस्ट पर नीति बदल कर कार्य किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में मोटे अनाज उपयुक्त होते हैं। जल भराव, जल संग्रहण नहीं हो पाता है, बदलती जलवायु मे सबसे प्रमुख पहाड हैं। पोषक अन्न यहा की भूमि में उगाए जा सकते हैं।
व्यक्त किया गया, भारत के लोग आपदा को अवसर में बदल सकते हैं। पहाड के छोटे किसानां की अर्थव्यवस्था अच्छी बन सकती है। पहाडों की यात्रा पर्यटन व तीर्थाटन के लिए की जाती है। देश में 30 प्रतिशत पहाडी क्षेत्र है। भारत के अधिकतर देवालय पहाडों में वास करते हैं। पर्वतों को देखने की क्षमता को कम समझा जाता है। पहाडां में कचरे की व्यवस्था ठीक की गई है। आयोजित सम्मेलन में दो दिन की पहल सार्थक रूप से चले कामना करता हूं।

आयोजित सम्मेलन मुख्य अतिथि केन्द्रीय रक्षा व पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट द्वारा बीज भाषण में व्यक्त किया गया, ताप्ती ग्यालसन की अध्यक्षता, चिमकेन प्रधान वन संरक्षक, पर्वतीय क्षेत्र से जुडे प्रबुद्ध जन व पत्रकारों के मध्य आयोजित हो रहे सम्मेलन का विषय बहुत सार्थक व उपयुक्त है। देश के सभी पर्वतीय क्षेत्र एक जैसे हैं। सभी पर्वतीय राज्यों में प्राकृतिक आपदा लिखी हुई है। पर्वतीय क्षेत्र भूकंप के जोंन 4-5 में आते हैं। हम पर्वतवासी ज्वाला मुखी में बैठे हैं। वरुणाव्रत पर्वत में पत्थर गिरते रहते थे। कुदरत का करिश्मा था। अटल जी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते 250 करोड़ रुपया उत्तरकाशी आपदा के लिए दिए थे। भगत सिंह कोश्यारी ने भी पद पर रहते एक बडी राशि आपदा के लिए दी थी। अश्वनी चौबे 2013 त्रासदी में बच कर आए थे।
मुख्य अतिथि अजय भट्ट द्वारा व्यक्त किया गया, जब वे उत्तराखंड स्वास्थ विभाग देख रहे थे, राज्य में पहली बार स्वास्थ व आपदा विभाग खोला था। हिमाचल, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, नार्थ ईस्ट सभी जगह की यही स्थिति है। यह समस्या है पहाडो की नियति में। ऐसे में पर्यटन को बंद नहीं किया जा सकता। कोरोना महामारी ने भी दहशत में डाला, हमें हिलाया।
व्यक्त किया गया, प्रकृति में बहुतसी अचंभित करने वाली अद्भुत चीजे हैं। हर राज्य की कुछ न कुछ किसी चीज विशेष मे पहचान है। पर्यटन को हर राज्य नहीं उभार पाया है। हम इसे उभारने में लगे हैं। पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ अपनी चीजों को उभारने व पर्यटन को बढ़ाने के काम में हम कार्यरत हैं। बार्डर टूरिज्म, हार्टीकल्चर टूरिज्म पर कार्य हो रहा है। मैदानी क्षेत्र के पर्यटन वृद्धि पर भी कार्य हो रहा है। कठिनता से कार्य करना पड़ रहा है। जो कार्य हो रहा है, नीति बना कर। सबसे ऊंची सड़क व ऊंचा रेल पुल भारत में है। सुरंग हम खोद रहे हैं। सात करोड़ रुपया सुरंग रास्तों से यात्रा करने से बच रहा है। नार्थ ईस्ट का विकास किया जा रहा है, जिसमें पर्यटन तो होगा ही इन पहाडी राज्यों की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। इस सबसे राष्ट्र को ताकत मिलेगी। बार्डर इलाकों के लिए बनाई जा रही नीतियों से पलायन भी नहीं होगा।

रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट द्वारा व्यक्त किया गया, हम अपनी सुरक्षा करना जानते हैं। आज हमारी बिटिया पायलट है। हर चीज पर्यटन से जुडी हुई है। कैलास मानसरोवर की यात्रा छोटी हो गई है। पर्यटन, सुरक्षा बार्डर टूरिज्म के बावत जनमानस को बता रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों में लोग रहैंगे, टूरिज्म की कोई कमी नहीं है। सब लोग निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। आक्सीजन की कमी उचाई वाले क्षेत्रों में कही-कही है। आप जो काम कर रहे हैं, सबको इकठ्ठा कर, विद्वानों को इकठ्ठा कर नीति नियोजन कर रहे हैं। पहाडी क्षेत्रों के लोग कहा नहीं हैं, सर्वव्यापी हैं। विकास तेज गति से हो रहा है, देखने की जरूरत है।
अजय भट्ट द्वारा व्यक्त किया गया, कई पहाडी राज्यां के पर्यटन को देखा, समस्याये देखी। पर्यटन व एक दूसरे की संस्कृति को देखने हम उत्सुकवश एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। आपदा मं घबराने की जरूरत नहीं है, उस पर अंकुश लगाने का प्रयास सरकार कर रही है। धीरे-धीरे सब पर वार्ता होगी, रोजगार कैसे बढाऐ? देश की सीमाओं को कैसे सुरक्षित रखें? सभी समस्याओं के निदान पर सोच समझ कर नीति नियोजन किया जा रहा है। फोरम अच्छा कार्य कर रहा है।
देश के सभी पर्वतीय राज्यों की ज्वलंत समस्याओं व उक्त राज्यो के उत्थान हेतु गठित एकीकृत पर्वत पहल (आईएमआई) फोरम द्वारा प्रतिवर्ष किसी न किसी पर्वतीय राज्य में पहाडी राज्यों की ज्वलंत समस्या पर प्रभावशाली सम्मेलन का आयोजन किया जाता रहा है। गठित फोरम द्वारा पहला सम्मेलन 2011 उत्तराखंड के नैनीताल में आयोजित किया गया था। नई दिल्ली में 23-24 मार्च को आयोजित यह दसवां सम्मेलन है।
– सी एम पपनैं


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