चैत्र के फूलदेई से प्रारंभ होते हुए बैसाख में बैसाखी, ज्येष्ठ में गंगा दशहरा, आषाढ़ की गुरु पूर्णिमा, श्रावण में आदियोगी, भाद्रपद में वीर तेजा जी जयंती, आश्विन में दुर्गा पूजा, कार्तिक में दीपावाली और छठ, मार्गशीष में गीता जयंती, पौष में लोहड़ी, माघ की उत्तरयाणी और फाल्गुन की होली को विश्वविद्यालय के छात्रों ने मंच पर प्रदर्शित किया। अंकुरण बाल समूह द्वारा वेद-उपवेद व उपनिषदों की व्याख्या ने दर्शकों को प्रेम अभिभूत कर दिया। वनवासी कल्याण छात्रावास, रुद्रपुर के दीदियों की समूह संगीत ने भारत के ग्राम्य जीवन की अद्भुत झलक प्रस्तुत की।

सांस्कृतिक चेतना परिषद की परामर्षदात्री डॉ. विनीता राठौर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए नूतन दिवस विशेष की महत्ता बताई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एम.एस. चौहान, कुलपति, पंतनगर विश्वविद्यालय, डॉ. जे.पी. जायसवाल, निदेशक संचार, डॉ. सत्यपाल सिंह, अधिष्ठाता पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान, डॉ. अल्का गोयल, डॉ. बी.एन. शाही, डॉ. एस.के. गुरु की उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि ने परिषद द्वारा अभिकल्पित संस्कृति पत्रिका के द्वितीय संस्करण का विमोचन किया। साथ ही परिषद की वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. चौहान ने परिषद को इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु साधुवाद दिया और यह विश्वास दिलाया कि अगर ऐसे ही प्रयास युवाओं के रहे तो निश्चित ही हम पुनः भारतीय पंचांग को स्वीकार करेंगे और मंच पर प्रस्तुत इस संकल्पना को साकार करेंगे।
इस कार्यक्रम में परिषद् द्वारा पूर्व में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरुस्कृत किया गया। प्रश्नोत्तरी में प्रथम विजेता चन्दन कुमार, द्वितीय प्रज्ञा, तृतीय अनूप, आलेख लेखन प्रतियोगिता में प्रथम विजेता गौरव, द्वितीय, श्रेया, तृतीय, विकास कुमार, चित्रकला प्रतियोगिता के मण्डला में, प्रथम विजेता साक्षी, द्वितीय तोशिया, वरली में, प्रथम पुरुस्कार, प्रज्ञा, द्वितीय रागिनी, एेंपण कला में, प्रथम पुरुस्कार श्रृष्टि, द्वितीय श्रेया गोस्वामी, मधुबनी कला में, प्रथम पुरस्कार, साक्षी, द्वितीय भव्या को दिया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन और संचालन में परिषद् छात्र अध्यक्ष रवि, सचिव रजनीश पांडेय, प्रभात, उर्वी, साहिल, नन्दिनी, प्रियांशु, विनय, विधि, अंकेश, कपिल, रवीना, निमिशा, भरत, पीयूष सहित अन्य सभी परिषद् सदस्यों का सहयोग रहा।


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