Friday , 4 September 2026
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सीएम धामी ने वैशाखी मेले का दीप जलाकर किया शुभारम्भ, पंजाबी महासभा द्वारा सीएम को पहनाई गई पगड़ी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को बैसाखी पर्व की ‘लख-लख बधाइयां’ देते हुए गुरुदेव से प्रार्थना की कि यह त्योहार सभी के जीवन में नव-तरंग, नव-उमंग और नव-सृजन लेकर आए। उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि जैसी अनुभूति नानकमत्ता साहिब में कार सेवा के समय होती है, वैसी ही अनुभूति आज बैसाखी मेले में आप सबके बीच उपस्थित होकर हो रही है।

उन्होंने कहा कि सभी लोगों विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं के द्वारा जो सम्मान दिया गया है, यह सम्मान मेरे लिए महज सम्मान नहीं, हमारी महान संस्कृति के तेज, त्याग और तपस्या का प्रसाद है, यह सम्मान मेरा नहीं बल्कि प्रदेश की समस्त जनता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान को, इस गौरव को गुरु नानक देव जी के चरणों में समर्पित करता हूं।

मुख्यमंत्री ने गुरुनानक साहब के चरणों में नमन करते हुए नम्रतापूर्वक प्रार्थना करते हुए कहा कि मेरे भीतर का सेवाभाव दिनों दिन बढ़ता रहे और गुरुओं का आशीर्वाद ऐसे ही मुझ पर तथा मेरे प्रदेश की सवा करोड़ जनता पर बना रहे। उन्होंने कहा कि यह त्योहार विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन दशम गुरु, गुरु गोविंद सिंह साहब ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि यह खुशियों का पर्व जहां एक ओर समाज के सभी लोगों में प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूती प्रदान करता है वहीं दूसरी ओर देश की तरक्की में योगदान देने का संकल्प लेने की भी प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि यह पर्व हमारी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में खेती-किसानी की महत्वपूर्ण भूमिका की याद भी दिलाता है। उन्होंने मेले के आयोजन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को बधाई दी, जिनकी कड़ी मेहनत से मेले को आयोजित करने का प्रयोजन सफल हुआ है। सीएम धामी ने कहा कि इस प्रकार के मेले हमारी लोक संस्कृति और लोक परंपराओं को बढ़ावा देने का काम करते हैं। मेले हमारी सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं, ये हमारे जीवन में इन्द्रधनुषीय रंग लाते हैं और खुशियां देते हैं।

मुख्यमंत्री ने अपनी बचपन की यादें ताज़ा करते हुए कहा कि जब मैं, छोटा था, तब मेले में जाने के लिए हमेशा आतुर रहता था क्योंकि मेलों में जहां एक ओर मुझे मेरे पसंदीदा करतब देखने को मिलते थे वहीं तरह-तरह के खिलौने भी मिल जाया करते थे। उन्होंने कहा कि सामान्य परिवार से होने के कारण मैं, अधिक खिलौने खरीद तो नहीं पाता था पर उस जमाने में तो खिलौनों को देखकर ही बहुत आनंद आ जाता था।

उन्होंने कहा कि उस समय संचार और परिवहन की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तो इन मेलों और त्यौहारों के द्वारा ही मित्रों और सगे-संबंधियों से मुलाकात संभव हो पाती थी। उन्होंने कहा कि हम सभी ने मिलकर लोकपर्वों और मेलों को संरक्षण प्रदान करना होगा, इसके लिए हम सभी को मिलकर निरंतर प्रयास करने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड का दशक होगा और 2025 तक हमारा राज्य देश के अग्रणीय राज्य में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए सरकार विकल्प रहित संकल्प के आधार पर कार्य करते हुए आगे बढ़ रही है। इस दौरान विद्यालय के राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त विद्यार्थियों समृद्धि अग्रवाल, आयरा अल्वी, हर्ष, रिद्धि, काव्या, कनिष्का को सम्मानित किया गया।

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Hill Mail

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