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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली ने जीता बैस्ट सेंटर अवार्ड

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की अखिल भारतीय समन्वित मक्का पर शोध परियोजना की तीन-दिवसीय 66वीं वार्षिक कार्यषाला के समापन अवसर पर कुल 58 संस्थान एवं विश्वविद्यालय तथा 20 निजी कृषि कम्पनियों में से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली को वर्ष 2022-23 का मक्का के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध करने हेतु बैस्ट सेंटर अवार्ड से नवाजा गया। वहीं बैस्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की श्रेणी में बहुराष्ट्रीय कम्पनी कटेवा एग्री साइंसेस को बैस्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अवार्ड दिया गया।

इससे पूर्व कार्यशाला के तृतीय दिवस को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक डा. टी.आर. शर्मा की अध्यक्षता में वराइटल रिलिज कमेटी की बैठक की गयी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों हेतु मक्का की 30 नयी प्रजातियों का अनुमोदन किया गया। कार्यशाला के समापन सत्र में मक्का के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया, जिसमें मरणोपरान्त बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा. जे.पी. साही, महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय, उदयपुर से डा. श्याम सुन्दर शर्मा, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के डा. एम.सी. कम्बोज, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के डा. रविन्द्र एन गडग थे।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि अन्तर्राष्ट्रीय संस्थान इक्रिसैट हैदराबाद के निदेशक डा. एम.एस. जाट ने कहा कि मक्का अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में पंतनगर विश्वविद्यालय मक्का मदीना की तरह है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि आज डा. भीम राव अम्बेटर की जयन्ती पर हम यह महत्वपूर्ण कार्य कर रहें है। मक्का को और अधिक प्रचलित करने हेतु यह आवश्यक है कि मक्का अनुसंधान, प्रसार, विकास, विपणन एवं मूल्यसंवर्धन के क्षेत्र में कार्य कर रहे अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय संस्थानों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा तथा सभी संस्थानों को मिलकर लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।
समापन समारोह की अध्यक्षता कर रहे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डा. एस.के. प्रधान ने कहा कि यह तीन-दिवसीय कार्यशाला बहुत ही सफल रही इसमें विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा दिये गये प्रस्तुतिकरण एवं संस्तुतियों का संकल्न कर देश के विभिन्न संस्थानों को भेजा जायेगा, जिससे की मक्का अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में और गति मिल सके।

समापन समारोह में पंतनगर विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डा. ए.एस. नैन ने सभी पुरस्कार विजेताओं एवं उन वैज्ञानिकों को जिनकी मक्का की नयी प्रजातियां अनुमोदित हुई है उन्हें बधाई दी और कहा कि हमें अभी और उत्पादकता देने वाली प्रजातियों का विकास करना है। साथ ही मक्का के मूल्यसर्वधित उत्पादों का भी विकास करना होगा, जिससे किसानों को उनके द्वारा उत्पादित मक्का का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना का धन्यवाद दिया कि उन्होंने यह कार्यशाला 35 वर्षों के बाद पंतनगर विश्वविद्यालय में आयोजित करायी और अनुरोध किया कि भविष्य में भी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद इस प्रकार की कार्यशालायें विश्वविद्यालय में आयोजित करवाता रहेगा।

कार्यशाला में भारत में मेज मैन से प्रख्यात वैज्ञानिक डा. साई दास, पूर्व निदेशक भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना, डा. प्रधुम कुमार, राष्ट्रीय समन्वयक मक्का परियोजना डा. रमेष कुमार, वर्तमान निदेशक डा. एस.एच. जाट, डा. आर.एस. पन्नु, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व कुलपति डा. एम.पी. पाण्डे, निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल, डा. एन.के. सिंह सहित 350 वैज्ञानिक उपस्थित थे। कार्यशाला के अन्त में आयोजन सचिव डा. आर.पी. सिंह ने सभी उपस्थितजनों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला का तीनों दिन संचालन पादप रोग विज्ञान विभाग की परास्नातक छात्रा कुमारी आयुषी जोशी द्वारा किया गया।

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