फिजिकल क्राइम अपने पीछे ढेर सारे फुटप्रिंट्स छोड़ जाता है जबकि साइबर क्राइम के डिजिटल फुटप्रिंट्स नहीं होते – डीजीपी अशोक कुमार

फिजिकल क्राइम अपने पीछे ढेर सारे फुटप्रिंट्स छोड़ जाता है जबकि साइबर क्राइम के डिजिटल फुटप्रिंट्स नहीं होते – डीजीपी अशोक कुमार

आईआईटी दिल्ली एलुमनी एसोसिएशन के सेमिनार हॉल में ‘साइबर एनकाउंटर्स’ पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार द्वारा लिखी गई है और पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक ओपी मनोचा द्वारा इस पुस्तक में सहलेखक का कार्य किया गया है। यह पुस्तक पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित की गई है और इस पुस्तक की प्रस्तावना महान सुपरस्टार अमिताभ बच्चन द्वारा लिखी गई।

आईआईटी दिल्ली एलुमनी एसोसिएशन के सेमिनार हॉल में ‘साइबर एनकाउंटर्स’ पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार द्वारा लिखी गई है और पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक ओपी मनोचा द्वारा इस पुस्तक में सहलेखक का कार्य किया गया है। यह पुस्तक पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित की गई है और इस पुस्तक की प्रस्तावना महान सुपरस्टार अमिताभ बच्चन द्वारा लिखी गई। साइबर एकाउंटर्स में सहलेखक ओपी मनोचा डीआडीओ में विभिन्न रक्षा परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के साथ ही सक्रिय ब्लॉगर एवं लेखक हैं।

इस मौके पर प्रोफेसर डॉ. विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी यूपी, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) (डॉ.) राजेश पंत, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक, पीएमओ, अमन गुप्ता, सह-संस्थापक और सीएमओ एवं बूएट, संजय अरोड़ा, दिल्ली पुलिस आयुक्त, अनीश दयाल सिंह, डीजी आईटीबीपी और मनोज यादव डीजी, एनएचआरसी आदि द्वारा पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर साइबर अपराध जांच विशेषज्ञों, कानून प्रवर्तन अधिकारियों, नौकरशाहों, उद्यमियों, शिक्षाविदों, संकाय सदस्यों, छात्रों और मीडिया कर्मियों सहित प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थिति थी।

इस अवसर पर बोलते हुए अशोक कुमार ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने आने वाली चुनौतियों और क्षेत्र में जागरूकता और क्षमता निर्माण की आवश्यकता है। डीजीपी ने कहा कि पुलिस के लिए 5 जी से निपटना ही मुश्किल हो रहा है 6 जी आएगा तो क्या होगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पर 100 प्रतिशत सुरक्षित कुछ भी नहीं है। साइबर क्राइम इतना बड़ा है कि इससे निपटना असंभव है। उन्होंने कहा अपना आधार नंबर आसानी से किसी को न दें। फर्स्ट आईडी के तौर पर आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कम करें। उन्होंने कहा कि फिजिकल क्राइम अपने पीछे ढेर सारे फुटपिं्रट्स छोड़ जाता है जबकि साइबर क्राइम के डिजिटल फुटप्रिंट्स नहीं होते। सावधानी में ही समाधान है। ओपी मनोचा ने विभिन्न प्रकार के साइबर खतरों और व्यक्तियों, संगठनों और राष्ट्रों पर उनके प्रभाव पर चर्चा की।

‘साइबर एनकाउंटर्स’ पुस्तक 12 सच्ची कहानियों पर आधारित है। जिसमें अपराधियों की नकली पहचान, रैनसमवेयर, कार्ड क्लोनिंग, सेक्सटॉर्शन, फिशिंग आदि साइबर अपराधों के बारे में विस्तृत से बताया गया है। यह पुस्तक साइबरस्पेस में होने वाले अपराधों के बारे में लोगों को जागरूक करती है, इन अपराधों को करने में अपराधियों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालती है। यह इस तरह के अपराधों का शिकार होने से रोकने के लिए मूल्यवान साइबर टिप्स भी प्रदान करता है।

अशोक कुमार उत्तराखंड कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इससे पहले भी उनकी ’खाकी में इंसान’ पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है जिसको जी.बी. पंत एवं बीपीआरएंडडी और गृह मंत्रालय की ओर से पुरस्कार मिल चुका है। इस पुस्तक का प्रकाशन मैकग्रा हिल द्वारा किया गया है।

मंच का संचालन प्रसिद्ध पत्रकार और बॉलीवुड थ्रिलर फिल्म ’कहानी’ की पटकथा लेखक अद्वैता काला द्वारा किया गया। उन्होंने पैनल चर्चा में साइबर अपराधियों द्वारा नियोजित तकनीकों और पुलिस द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। यहां उपस्थित लोगों ने पैनल चर्चा के बाद दिलचस्प सवाल-जवाब सत्र का आयोजन किया गया, जहां लेखकों ने श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए और आज के परिदृश्य में पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद पुस्तक के लेखकों ने सभी पुस्तक प्रेमियों को अपनी पुस्तक हस्ताक्षर करके दी।

‘साइबर एनकाउंटर्स’ पुस्तक विमोचन कार्यक्रम एक बड़ी सफलता थी और आईआईटी दिल्ली एलुमनी एसोसिएशन को इस तरह के एक व्यावहारिक और सूचनात्मक कार्यक्रम के आयोजन के लिए व्यापक प्रशंसा भी मिली। यह पुस्तक छात्रों, पुलिसकर्मियों, व्यापारियों, सरकारी और गैर-सरकारी अधिकारियों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, घर में रहने वाले माता-पिता, अधिकारियों, कानून प्रवर्तन अधिकारियों और अन्य पेशेवरों सहित जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के लिए अत्यधिक उपयोगी साबित होगी। साइबर अपराध की जांच और रोकथाम में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘साइबर एनकाउंटर’ पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में डॉ अलकनंदा अशोक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया और कार्यक्रम की मास्टर ऑफ सेरेमनी शक्ति मनोचा और चारुल शर्मा रहीं।

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