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पर्यटन व संस्कृति बन सकते हैं विकास की धुरी

अश्विनी लोहानी, चेयरमैन, रेलवे बोर्ड

पहाड़ों में आने पर एक अजब सी अनुभूति होती है। अगर आप ट्रेन से भी आ रहे हैं और पहाड़ नजर आने लगें तो एक खून में अलग सा संचार महसूस होने लगता है। मैंने कई बरस पहले एक लेख लिखा था, स्विट्जरलैंड आॅफ हिंदुस्तान। उत्तराखंड की मैंने भारत के स्विट्जरलैंड के रूप में परिकल्पना की थी। मेरा ये मानना है कि पर्यटन एवं संस्कृति उत्तराखंड को आगे ले जाने में बहुत ही अहम रोल अदा कर सकते हैं। उत्तराखंड में पर्यटन की जो संभावना है, उसका हमने पूर्ण रूप से दोहन ही नहीं किया है। इसका दोहन करने की जरूरत है। पर्यटन के कुछ अंग होते हैं, एक होता है कनेक्टिविटी में सुधार करने की जरूरत है। रेलवे से जोड़ने की जरूरत है। हवाई और सड़क संपर्क में सुधारने की आवश्यकता है। हमें नए हिल स्टेशन बनाने की बात करनी चाहिए। मैं लगातार उत्तराखंड सरकार को खत लिखता रहता था। कुछ वर्ष पहले मैं नैनीताल गया था सितंबर-अक्टूबर के महीने में। तब भी मैंने लिखा कि मैं दशहरे के समय में आया हूं लेकिन लग रहा है कुंभ का मेला चल रहा है। इतनी भीड़ थी। तो हिल-स्टेशन को उसी के स्वरूप में हमें रखना है। इन सब चीजों को हैंडल करने की जरूरत है। तो मैंने राज्य सरकार को सुझाव दिया था कि आप कारों की एंट्री बैन कर दीजिए। जो वहां के निवासी हैं, सिर्फ उनके पास दीजिए। बाकी लोगों को हैवी चार्ज करिए। मल्टी स्टोरी कार पार्किंग बनाइये। इस तरह के कई सुझाव मैंने दिए थे। पर्यटन एक ऐसी धुरी हो सकती है, जिस पर उत्तराखंड बहुत तरक्की कर सकता है। हम लोगों से जो बन पड़ेगा वो तो हम करेंगे ही।

एक चीज और है, जो मैं बोलना चाहता हूं। मैंने पलायन के आंकड़े देखे, वो भी एक मुद्दा है। उत्तराखंड के जो लोग बाहर जाकर बसे हैं, वो जिस भी संस्थान में या राज्य में काम कर रहे हैं, वो अपनी ईमानदारी और कर्मठता के लिए जाने जाते हैं। आपको कहीं ऐसा नहीं मिलेगा कि लोग कहेंगे कि यह अधिकारी कामचोर है या भ्रष्ट है। यह बहुत दुर्लभ ही देखने को मिलता है। राज्य में भी इस समय अच्छा काम हो रहा है लेकिन पहले उत्तराखंड से भ्रष्टाचार की काफी खबरें आती थीं। इस पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

कुछ और जटिल मुद्दे हैं, जैसे आज भी हम देहरादून में आए तो मेरा आकलन यह रहा कि ये एक खूबसूरत राज्य की राजधानी है तो इसे वैसा दिखना भी चाहिए। अच्छे फुटपाथ होने चाहिए, धूल नहीं होनी चाहिए। तारें नहीं लटकी होनी चाहिए। इसको उस तरह से विकसित करना चाहिए। इससे निवेशकों में भी भरोसा पैदा होगा कि यहां पर कुछ किया जा सकता है। साथ ही नए पर्यटन स्थल तो विकसित करने ही चाहिए।

खूबसूरती तो यहां जगह-जगह बिखरी पड़ी है। नए स्थान विकसित करने के लिए निवेश से ज्यादा इच्छाशक्ति की दरकार होगी। उत्तराखंड में पर्यटकों की आवाजाही कुछ क्षेत्रों में ज्यादा हो गई है, इसे बांटा जा सकता है। मध्य प्रदेश में रहने के दौरान हमने छोटे-छोटे स्थान डेवलप किए थे। कहीं कोई पानी का जलायश था या दूसरी छोटी चीज। ऐसा यहां भी हो सकता है। दूसरा एक अहम बात है राज्य का प्रचार। मध्य प्रदेश का प्रचार आपने देखा होगा, कितना जबरदस्त प्रचार है। लोगों को यह बताने की जरूरत है कि ये हिंदुस्तान का स्विट्जरलैंड ही है। आप आइये, देखिए इसको। बहुत जबरदस्त प्रचार करने की आवश्यकता है।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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