एक साल में ही किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन त्रिवेंद्र सरकार ने उम्मीदों और जन-आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में कई नए कदम उठाए हैं, ताकि शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर पलायन और रोजगार जैसी चुनौतियों से निपटा जा सके। हिल-मेल ब्यूरो, देहरादून उत्तराखंड
एक साल में ही किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन त्रिवेंद्र सरकार ने उम्मीदों और जन-आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में कई नए कदम उठाए हैं, ताकि शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर पलायन और रोजगार जैसी चुनौतियों से निपटा जा सके।
हिल-मेल ब्यूरो, देहरादून
उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष का पूरा कर लिया है। राज्य गठन का डेढ़ दशक से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद उत्तराखंड की जनता के किसी एक दल को इतने प्रचंड जनादेश के साथ सत्ता सौंपी। साफ है, उम्मीदें बेशुमार हैं। प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन के साथ राज्य के विकास की चुनौतियां हैं। जिस विजन डॉक्युमेंट के साथ भाजपा ने जनता का साथ मांगा, अब उसे धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी है। पहले साल में राज्य सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख और इसके आरोप से बचा रहना है।एक साल में उत्तराखंड के लिए जो अच्छी खबरें आईं, उनमें राज्य की सकल घरेलू उत्पाद दर, राष्ट्रीय दर के बराबर है। यही नहीं राज्य की प्रति व्यक्ति औसत आय भी राष्ट्रीय औसत आय से डेढ़ गुना से अधिक है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, सामाजिक तरक्की के मामले में उत्तराखंड देश में चौथे पायदान पर है। हालांकि लैंगिक अनुपात सुधारने में उत्तराखंड को अभी कोशिश करनी है। उत्तराखंड का ग्रामीण क्षेत्र खुले में शौच मुक्त होने वाला देश का चौथा राज्य बना है। राज्य में स्वच्छता अभियान को भारत सरकार का बैस्ट प्रैक्टिसेज दर्जा मिला है।
राज्य सरकार का दावा है क घोषणा पत्र के अनुरूप एक वर्ष के कार्यकाल में ठोस बुनियाद तैयार की गई है, जिस रास्ते पर चलकर जनता से किए वादों को पूरा कया जा सकेगा। किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य हो, नौजवानों को रोजगार की बात हो, शिक्षा में बुनियादी सुधार की बात हो, शहरी विकास विभाग के अंतर्गत वेस्ट मैनेजमेंट, आवास देने का मुद्दा, पेयजल विभाग के तहत सबको पानी देने का मुद्दा हो, उड़ान योजना के तहत राज्य को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने का मुद्दा हो, उत्तराखंड में रेल लाइन के निर्माण का मुद्दा हो, छोटी योजना और बड़ी योजनाओं को मिलाकर स्किल इंडिया-स्टार्टअप योजना और नौजवानों को रोजगार देने की बात हो, जो नौजवान आईटीआई में पढ़ रहे हैं उन्हें स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम और इसके साथ ही इंडस्ट्री से जोड़ने के मुद्दे हों, सभी को लेकर ठोस शुरुआत हुई है। यही नहीं आर्थिक तौर पर कमज़ोर बच्चों के लिए कोचिंग की व्यवस्था की गई है। विद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों में राष्ट्र भावना विकसित करने की भी शुरुआत की गई है। इसके लिए कॉलेजों में शौर्य दीवार बनाई गई। वंदे मातरम् का गान किया जाता है। ताकि विद्यार्थी राष्ट्र भावना से प्रेरित हों।
राज्य के शहरी विकास मंत्री और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता मदन कौशिक का कहना है कि हमारी सरकार ने पहली बार पहाड़ों पर डॉक्टरों को भेजा है। पहाड़ों पर डॉक्टरों की कमी दूर करने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए करीब 1200 डॉक्टरों का इंटरव्यू भी किया गया है। जल्द ही उनकी तैनाती का काम भी शुरु होगा। राज्य में पहली बार पलायन आयोग बनाया है और इसका मुख्यालय पौड़ी में रखा गया है। इससे पहले पलायन रोकने के लिये मंत्रि परिषद की एक समिति भी बनाई गई थी। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 13 जिले 13 डेस्टिनेशन जैसी योजनाओं की शुरुआत हुईहै। इसके तहत हर जिले में एक नया डेस्टिनेशन विकसित करने की कोशिश की जा रही है। एंडवेचर ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां की झीलों का उपयोग किया जा रहा है। पहली बार उत्तरकाशी में राष्ट्रीय स्तर की जल क्रीड़ाओं का आयोजन किया गया। इसके लिए मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना की खाली पड़ी झील को में नौकायन के साथ विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स आयोजित किए गए, जिससे रोजगार देने और पलायन रोकने की भी दिशा में जो कारगर हो सकते हैं। इसके साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों को रोपवे से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य
प्रदेश प्रवक्ता के मुताबिक, किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार कोशिश हो रही है। हॉर्टी कल्चर, सुंगधित फसल, बागवानी, मत्स्य पालन, पशु पालन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत छोटे किसानों को एक लाख रुपये तक का कर्ज मात्र 2 फीसदी ब्याज पर देने के लिए दीन दयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना लागू की गई है। उत्तराखंड को ऑर्गेनिक हर्बल स्टेट बनाने की कार्य योजना बनाई गई है। डीबीटी के ज़रिये उर्वरक पर सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में दी जाएगी। इसके साथ ही ढाई लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन भी दिया जा रहा है।
वर्ष 2022 तक सौ फीसदी साक्षरता का लक्ष्य
अपने घोषणा पत्र में भाजपा ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए कई वादे किए थे। जिसमें गरीब और मेधावी छात्रों को निशुल्क लैपटाप, विश्वविद्यालयों में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा देने की बात भी कही गई थी। राज्य सरकार के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुधार किए गए हैं। राज्य के स्कूलों में डिजिटल क्लास रूम मुहैया कराने के लिए केयान जैसे डिवाइस पर कार्य किया गया है ताकि दूरस्थ स्कूलों में भी आधुनिक तकनीक से बेहतर शिक्षा मुहैया कराई जा सके। राज्य के बहुत से ऐसे स्कूल जहां दस से कम विद्यार्थी थे, उन्हें क्लब किया जा रहा है। सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करने का फैसला लिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2022 तक सभी जनपदों में सौ फीसदी साक्षरता दर हासिल की जा सके।
उच्च शिक्षा और ई-शिक्षा पर जोर
उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए भी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। गुणवत्ता शिक्षा अभियान के तहत राज्य में सहायक प्रोफेसरों के 877 रिक्त पदों पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के जरिए भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है। राज्य सरकार की कोशिश है कि सरकारी महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद खाली न रहें। जहां सहायक प्रवक्ताओं की कमी है, गेस्ट फैकल्टी की सेवा लेना का अधिकार दिया गया है।सरकार ई-शिक्षा पर भी पूरा जोर दे रही है। सभी महाविद्यालयों में ई-लाइब्रेरी बनाने की कोशिश है। इसके साथ हर वर्ष राज्यभर के 100 विद्यार्थियों को रिसर्च स्कॉलरशिप देने की बात गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर समीक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने सरकारी महाविद्यालयों और विश्व विद्यालय के छात्रों के कॅरियर ट्रैकिंग की व्यवस्था बनाने को कहा है। महाविद्यालयों में एकेडमिक कैलेंडर के कड़ाई से पालन पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य में 6 नर्सिंग कॉलेज शुरु किया जा रहे हैं। रुद्रपुर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, कोटद्वार और भगवानपुर में मेडिकल कॉलेजों को तुरंत स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज राज्य में चिकित्सा और चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने में बड़ा योगदान देंगे।
कौशल विकास पर जोर
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद इस बात को जोर देकर कहते हैं कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां केंद्र के सहयोग से पहले दो कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं। उत्तराखंड के नौजवानों को रोजगार देने के साथ ही स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए पर्वतीय जिले पिथौरागढ़ में भी कौशल विकास केंद्र खोला गया है। साथ ही राज्य के आईआईटी और पॉलीटेक्निक में पढ़ने वाले छात्रों को इंडस्ट्री से जोड़ने के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि नौजावनों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से राज्य की स्टार्टअप नीति बन गई है। इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना हो गई है। जल्द ही स्टार्टअप काउंसिल का गठन भी किया जाएगा। उत्तराखंड में 60 स्टार्टअप शुरू हो गए हैं। इनसे 400 लोगों को रोजगार मिला है। दो इनक्यूबेटर कार्यरत हैं। उत्तराखंड में हेल्थ केयर, आयुर्वेद, ट्रेवल एंड टूरिज्म, कृषि और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उद्यम के नए विचार विकसित करने के लिए स्टार्टअप में 10,000 रुपये मासिक, 5 लाख रुपये उत्पाद विकसित करने के लिए, 5 लाख रुपए जरूरत के मुताबिक सहायता के रूप में दिए जाते हैं। इनक्यूबेटर को एक करोड़ रुपये एकमुश्त, 2 लाख रुपये रनिंग कॉस्ट और 2 लाख रुपये मैचिंग ग्रांट दिया जाता है।
महिलाओं को कौशल विकास से जोड़ने और स्वाबलंबी बनाने की दिशा में भी सरकार कई योजनाओं चला रही है। मार्च महीने में ही सरकार ग्रामीण एलडीईडी लाइट योजना लेकर आई है। जिसके तहत हर जिले और ब्लॉक में महिलाओं को एलईडी लाइट बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि वे ब्रांडेंड कंपनियों से बेहतर एलईडी बना सकें। ये योजना महिलाओं को स्वाबलंबी बनाने के लिए है। देहरादून में महिलाओं को एलईडी लाइट बनाने का प्रशिक्षण दिया भी जा रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है ये योजना पूरी तरह महिलाओं को समर्पित है। महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री ई-रिक्शा योजना के तहत विशेष छूट दी गई है।
मुख्यमंत्री रावत का कहना है कि जब हम दूसरों पर निर्भर रहते है तो अपनी क्षमता व ताकत का बेहतर उपयोग नहीं कर पाते हैं। आज जरूरत है अपनी क्षमता व कौशल से समाज को नई दिशा देने की। अपने स्वयं के संसाधनों से लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले उद्यमी प्रशंसा के योग्य हैं। ऐसे व्यक्ति समाज के लिये प्रेरणा का कार्य ही नहीं करते बल्कि युवाओं को स्वरोजगार के लिये प्रेरित करने में भी मददगार होते है।
शीतकाल में भी उत्तराखंड आएंगे पर्यटक
पर्यटन राज्य के आर्थिकी की रीढ़ साबित हो सकता है। उत्तराखंड सरकार इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। तीर्थाटन के अलावा राज्य को शीतकालीन पर्यटन के केंद्र के रूप में भी विकसित करने पर कार्य किया जा रहा है। 13 जिले 13 डेस्टिनेशन पहल के अलावा चारधाम यात्रा को बेहतर बनाने के लिए राज्य में ऑल वेदर रोड बनाई जा रही है। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड 23 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए। इससे उत्साहित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तक ने कहा, पहला मौका है जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दो-दो बार एक ही सत्र में श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ धाम आये। भारत के शीर्ष नेतृत्व द्वारा उत्तराखंड के प्रति दर्शाये गए प्रेम से प्रत्येक उत्तराखंडवासी अभिभूत है। इससे देश-दुनिया में सुरक्षित और सुगम उत्तराखंड का संदेश भी गया है। केदारनाथ में प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल भव्य केदारपुरी का पुनर्निर्माण कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ धाम में केदारपुरी के पुनर्निर्माण से संबंधित पांच परियोजनाओं का शिलान्यास किया है, जिनमें केदार मंदिर परिसर पहुंचने के मुख्य मार्ग चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य, सरस्वती और मंदाकिनी नदियों के बाढ़ सुरक्षा और घाट निर्माण कार्य, तीर्थ पुरोहितों के लिये आवासीय भवनों के निर्माण कार्य तथा आदि शंकराचार्य के समाधि स्थल के पुनर्निर्माण कार्य शामिल है।
नदियों को पुनर्जीवन और ऑल वेदर रोड
इसके साथ ही राज्य की नदियों को पुनर्जीवित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। देहरादून की ऋषिपर्णा यानि रिस्पना, बिंदाल नदी और कुमाऊं क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण कोसी नदी को पुनर्जीवन करने का लक्ष्य चिन्हित किया गया है। प्रत्येक जनपद में कम-से-कम एक नदी या जलस्रोत के पुनर्जीवीकरण का अभियान चलाने का निर्णय लिया है। नैनीताल की नैनी झील को संरक्षण के लिए भी योजना चलाई जा रही है।चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए ही ऑल वेदर रोड जैसी केंद्र की महत्वकांक्षी योजना पर राज्य में कार्य चल रहा है। राज्य में आने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। आलवेदर रोड के लिये भूमि अधिग्रहण, वन भूमि स्थानांतरण और मुआवजा वितरण कार्यशीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उड़ान योजना के तहत राज्य के सभी जिलों को हवाई सेवा से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए राज्य में हैलीपैड के लिए भूमि चिन्हित करने का कार्य भी शुरु कर दिया गया है। ये हवाई सेवाएं सस्ती होंगी ताकि आम लोग भी हवाई सेवाओं का लाभ उठा सकें।
यही नहीं राज्य की प्रमुख नदियों में सी-प्लेन योजना भी शुरु की जा रही है। केंद्र के सहयोग से जल्द ही टिहरी झील में सी-प्लेन की लैंडिंग भी कराई जाएगी। उत्तराखंड में बड़ा एयरपोर्ट बनाना आसान नहीं है इसलिए सी-प्लेन लैंडिंग यहां कारगर साबित हो सकती है। टिहरी के अलावा नैनीताल समेत राज्य की दूसरी प्रमुख नदियों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। नदी के पानी से यात्री उड़ान भरेंगे और पानी पर विमान की लैंडिंग की रोमांचक अनुभूति से गुजरेंगे। सी-प्लेन प्रोजेक्ट केंद्र के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में से एक है जिसमें उत्तराखंड भी शामिल हो रहा है।
वर्ष 2019 तक उत्तराखंड का हर गांव होगा रोशन
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत राज्य के गांवों में बिजली पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2019 तक बिजली से वंचित हर परिवार को ग्रिड या ऑफ ग्रिड बिजली उपलब्ध करा दें। इसके साथ ही राज्य में सौभाग्य बिजली योजना का शुभारंभ भी मार्च के महीने में ही किया गया है। इस योजना के पहले दिन ही 9 मार्च 2018 को राज्यभर के 10400 घरों को बिजली के कनेक्शन दिये गए।मुख्यमंत्रीरावत ने कहा कि बिजली पहुंचने का मतलब सिर्फ रोशनी नहीं है। आज के आधुनिक युग में जब देश डिजिटल हो रहा है। इंसान तकनीक पर निर्भर होता जा रहा है। हमारे सभी उपकरण बिजली पर ही निर्भर हैं, ऐसे में गरीब घरों में प्रकाश पहुंचाने की पहल बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण योजना से उन सभी परिवारों के जीवन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आएगा जिनके घरों में अब तक बिजली के कनेक्शन नहीं थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक साल में ऐसे 46 गांवों को बिजली पहुंचाई गई है, जहां अभी तक बिजली नहीं थी। अभी राज्य में 26 गांव ऐसे हैं जहां बिजली पहुंचाना बाकी है। उन्होंने कहा कि अप्रैल माह तक हर गांव तक बिजली पहुंचा दी जाएगी।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि राज्य में 3,52,625 परिवार बिजली से वंचित हैं। इसमें से 95,577 परिवारों को दीनदयाल उपाध्याय योजना से विद्युत आपूर्ति की जाएगी। साथ ही शेष बचे 2,57,048 परिवारों को ‘‘सौभाग्य‘‘ योजना के तहत बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। उत्तराखंड राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में, जहां अपरिहार्य कारणों से लाइन बनाना संभव नहीं है, घरों को सौर ऊर्जा से रौशन किया जाएगा, जिसके लिये लगभग 50,000 रुपये प्रति घर खर्च होगा। ऐसे घरों की संख्या लगभग 9,128 है।
इसके साथ ही एक वर्ष में जल विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य को एक बड़ी सफलता मिली। पर्यावरण के चलते ठप पड़ी लखवाड़ और किशाऊ जैसी परियोजनाओं को फिर से शुरु करने की राज्य को अनुमति मिल गई है। व्यासी जल विद्युत परियोजना (120 मेगावाट) दिसम्बर, 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। 05 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को राज्य के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। उत्तराखण्ड सरकार और आईआईपी के बीच पिरूल से तारपीन ऑयल और बायोफ्यूल तैयार करने का समझौता किया गया है। बिजली की बचत के लिये सभी सरकारी भवनों में एलईडी बल्बों का उपयोग अनिवार्य किया गया है। ये वो छोड़े बड़े उपाय हैं जिससे पूरे उत्तराखंड को रोशन किया जा सके।
डिजिटल उत्तराखंड की नींव
मुख्यमंत्री रावत ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने की कोशिश की है। वे खुद जनता से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। इसके साथ ही आधुनिक तरीकों का भी भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ऐप, समाधान पोर्टल इंटरनेट पर वो जगहें हैं जहां आप मुख्यमंत्री से सीधे अपने मन की बात रख सकते हैं।त्रिवेंद्र सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मंचों पर कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकता है। समाधान पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नम्बर (1905) की व्यवस्था की गई है। साथ ही आईवीआरएस. के माध्यम से स्थानीय बोलियों में भी शिकायतें दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।सेवा के अधिकार अधिनियम को और अधिक सशक्त बनाने के साथ ही अन्य आवश्यक सेवाओं को शामिल कर 150 सेवाओं की सूची तैयार की गई है। ब्लॉक स्तर तक बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू कर दी गई है। विभिन्न अनियमित्ताओं की त्वरित जांच के लिए एस.आई.टी. का गठन किया गया है।सीएम डैशबोर्ड जैसी अभिनव पहल शुरू की गई है। इसके माध्यम से विभागों से संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी, जिस पर सीधा नियंत्रण मुख्यमंत्री कार्यालय का होगा।
राज्य सरकार ने एक साल में कई बेहतर योजनाओं की शुरुआत की है। त्रिवेंद्र सरकार का ये पहला वर्ष है। नौजवानों को रोजगार के अवसर देना, पहाड़ों से पलायन रोकना, पहाड़ों पर चिकित्सा सेवाओं में सुधार लाना, शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करना, साथ ही रुकी पड़ी जल विद्युत योजनाओं को रफ्तार देना, पर्यटन के क्षेत्र में नए विजन के साथ कार्य करना, पहाड़ में कृषि-बागवानी को बेहतर बनाना, राज्य की ये वो जरूरतें हैं जिससे वो अपनी आर्थिकी को सुधार सके और एक खुशहाल राज्य की ओर अग्रसर हो सके।







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