Home उत्तराखंड न्यूज़ ऑल वेदर रोडः विकास जरूरी, पर रखना होगा पर्यावरण का भी ख्याल
उत्तराखंड न्यूज़

ऑल वेदर रोडः विकास जरूरी, पर रखना होगा पर्यावरण का भी ख्याल

उत्तराखंड की आय का एक बड़ा स्रोत पर्यटन है। उत्तराखंड में पर्यटकों को साल भर लाने के लिए ही आॅल वेदर रोड़ बनाई जा रही है। हालांकि पर्यटन के अवसरों को बढ़ाने के लिए हो रहे विकास के दौरान पर्यावरण की अनदेखी पर कई लोग चिंता जता रहे हैं। कई का कहना है कि पर्यावरण का ख्याल रखते हुए ही विकास करना होगा।

हिल-मेल ब्यूरो, देहरादून

सड़कें विकास का मानक होती हैं। सड़कों से ही प्रदेश की खुशहाली और संपन्नता की नींव पड़ती है। सड़क निर्माण के साथ ही तमाम दूसरी सुविधाओं को भी जुड़ने में समय नहीं लगता। यही कारण है कि सड़कों को किसी राज्य की लाइफ लाइन माना जाता है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति के हिसाब से यहां सड़कों की बेहद ही अहम भूमिका है। प्रदेश सरकार, केंद्रीय एजेंसियों व स्वयं सेवी संगठनों के उत्तराखंड में किए गए सर्वे में सड़कों को दुरुस्त करने की बातें आ चुकी हैं। प्रदेश सरकार के साथ ही समय समय पर केंद्रीय सड़क निधि योजना व प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण कार्य चल रहे हैं और कई अन्य प्रस्ताव केंद्र स्तर पर विचाराधीन हैं। इसमें सबसे अहम चारधाम ऑल वेदर रोड है। इस परियोजना के तहत राज्य के चारों धाम यानी बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे।

तकरीबन 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना उत्तराखंड के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, इसका राष्ट्रीय और सामरिक महत्व भी है। राज्य के तीन जिले उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ चीन सीमा से सटे हैं। इस लिहाज से उत्तरकाशी व चमोली जिलों तक ऑल वेदर रोड बनने से बड़े वाहनों की आवाजाही का रास्ता भी साफ होगा। चारधाम यात्रा ही उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति का मजबूत सहारा है। चारधाम यात्रा के दौरान सड़कें खराब होने से कई बार यात्रा बाधित होती है। कई बार तो दो से तीन दिन तक यात्रियों को एक ही स्थान पर सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ता है। ऑल वेदर रोड बनने से यह परेशानी दूर हो जाएगी। यहां तक कि यह यात्रा वर्ष भर संचालित हो सकेगी। इसके साथ ही स्थानीय निवासियों को भी बारह महीने रोजगार के अवसर भी बने रहेंगे। इतना ही नहीं, इससे न केवल चारधाम यात्रा मार्ग के अंतर्गत आने वाले जिलों के भीतर यातायात का भार कम होगा, बल्कि संपर्क मार्गों को पक्का करने में भी मदद मिलेगी। यह कहानी का एक पहलू है, इसका दूसरा पहलू यह है कि हम ऑल वेदर रोड बनाने के लिए प्रकृति और पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं। गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ को जाने वाले मोटर मार्गों को ऑल वेदर रोड़ के नाम पर 10-24 मीटर तक चौड़ा करने की योजना के सामने आने के बाद जो दृश्य उभर रहा है, उसमें ऋषिकेश से प्रांरभ होने वाले चार धाम मार्गों के दोनों तरफ पेड़ों का अंधाधुंध कटान चल रहा है। गंगोत्री में देवदार के हजारों हरे पेड़ों पर छपान किया गया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए देवदार के अतिरिक्त बांझ, बुरांस, तुन, सीरस, उत्तीस, चीड़, पीपल आदि के पेड़ों की भी कटाई हुई है। मध्य हिमालय के इस भू-भाग में विकास का यह नया प्रारूप स्थानीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जनजीवन पर असर डाल रहा है। सड़क निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं व सुरंगों का निर्माण हिमालय क्षेत्र की अस्थिरता को बढ़ा रहा है, इसके बदले में पर्यावरण और पारिस्थितिकी का संतुलन बनाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं हो रहे हैं। इन बड़ी परियोजनाओं से भूस्खलन, भूकटाव, बाढ़, विस्थापन आदि की समस्या भी लगातार बढ़ी है।

उत्तरकाशी से भटवाड़ी के बीच जहां सड़क चौड़ीकरण और निर्माण की जद में हजारों वृक्ष आ रहे हैं। इसके आगे सुक्खी टॉप से गंगोत्री के बीच का 30 किमी का भाग देवदार का घना जंगल है। यह भाग हर्षिल का सर्वोत्तम हरियाली वाला क्षेत्र भी है। हर्षिल के इसी भाग में आसपास केवल 5-7 किमी के दायरे में ही उत्तरकाशी-गंगोत्री हाइवे के चौड़ीकरण के लिए 6000 से अधिक देवदार के पेड़ों को काटने के लिए छापा गया है।

भटवाड़ी के आसपास अनेक स्थानों पर उत्तरकाशी-गंगोत्री सड़क की चौड़ाई 4.5-6 मीटर तक है। वहीं हर्षिल के आस-पास यही सड़क 6-6.5 मीटर चौड़ी है। लेकिन गंगोत्री से हर्षिल की ओर 10 किमी के क्षेत्र में बीआरओ द्वारा ऑल वेदर रोड के लिए घोषित 18-24 मीटर चौड़ी सड़क तैयार कर ली है। केंद्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत 30,000 हेक्टेयर जमीन पर वनों के रोपण का लक्ष्य रखा है। लेकिन गंगा के उद्गम स्थल में गंगोत्री से हर्षिल गांव के बीच हजारों पेड़ों को काटने के लिए चिन्हित किया गया है। गंगोत्री क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण से सिर्फ पेड़ों का कटान नहीं हो रहा है बल्कि चटटानों की ब्लास्टिंग के लिए विस्फोटक का प्रयोग किया जा रहा है। कई विशेषज्ञ हिमालय की संवेदनशील भूगर्भीय स्थिति को देखते हुए ऑल वेदर रोड के नाम पर होने वाले हरे वृक्षों के कटान तथा भारी मशीनों व जबरदस्त डाइनामाइट के उपयोग को इन क्षेत्रों के भविष्य के लिए खतरा बता रहे हैं। ऑलवेदर रोड़ के कारण ऋषिकेश से बद्रीनाथ और रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर सरकारी आंकड़ों में कुल 9105 पेड़ काटे जा चुके हैं। इसके अलावा 8939 और नए पेड़ ऋषिकेश बद्रीनाथ हाइवे पर चिन्हित किए गए हैं।

सरकार को पुर्नविचार करना चाहिए कि गंगा घाटी में बाढ़ आने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले दस वर्ष के दौरान लाखों वृक्ष सड़क निर्माण के नाम पर काटे और मलवे में दबाए गए हैं। सड़क निर्माण में प्रयोग हो रही तकनीक स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और तापमान को बढ़ा रही है। गंगोत्री के ग्लेशियरों के लिए खतरा पैदा हो गया है। गंगोत्री घाटी में फैले 2300 वर्ग किमी क्षेत्र को सरकार ने पहले से गंगोत्री नेशनल पार्क घोषित किया है। 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने के साथ ही गंगा के उद्गम से लगे 4000 वर्ग किमी क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया गया है।

योजना की लागत–
11700 करोड़ रुपये।
क्या बनेगा –
-25 पुल, 13 बाइपास, तीन फ्लाई ओवर, दो सुरंग
-तीर्थ यात्रियों के लिए 28 सुविधा केंद्र
-राजमार्ग पर बनेंगे 154 बस बे व ट्रक बे।
-38 स्थानों पर बनेंगे लैंड स्लाइड जोन।
कहां से कहां तक कितनी सड़क
– ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग – 140 किमी
-रुद्रप्रयाग से माणा गांव – 160 किमी
-ऋषिकेश से धरासू – 144 किमी
-धरासू से गंगोत्री – 124 किमी
-धरासू से यमुनोत्री – 95 किमी
-रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड – 76 किमी
-टनकपुर से पिथौरागढ़ – 150 किमी
उत्तराखंड में पक्की सड़कें (किमी में)
– राष्ट्रीय राजमार्ग – 2471.30
– प्रादेशिक राजमार्ग – 4521.07
– मुख्य जिला सड़कें – 2151.81
– अन्य जिला सड़कें – 2651.1
– ग्रामीण सड़कें – 19537.38
– हल्का वाहन मार्ग- 732.21
– पंचायत मोटर मार्ग – 992.95
– निकाय मोटर मार्ग – 2428.27
– वन क्षेत्र में – 3359.53
– बार्डर रोड टास्क फोर्स – 1281.32
– अन्य – 2574.98
कुल – 42702.32 किमी

पहाड़ों में निर्माण कार्य का मलवा आपदा का करण बन रहा है,। मलवा बंजर जमीन को आबाद कर सकता है, जिस पर वृक्षारोपण करके सड़क को भी टूटने से बचाया जा सकता है। – मुरारी लाल, समाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद

पर्यावरण और विकास दोनों की चिंता साथ-साथ करनी चाहिए। विकास की अंधी दौड़ से पर्यावरण को खतरा न पहुंचे। इस दिशा में शोध व अध्ययन की आवश्यकता है। – डां गीता शाह, पर्यावरण विशेषज्ञ

बातें जिन पर ध्यान देना जरूरी

• पहाड़ों में सड़क निर्माण की तकनीक को बदला जाना चाहिए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 2004 में प्रकाशित नियमों के अनुसार मलवा सीधे नदी में डालने के बजाय डंपिंग जोन बनाए जाने चाहिए। डंपिंग जोन में मलवा डालकर वहां जंगल व खेती योग्य जमीन विकसित की जानी चाहिए। मलवे का निपटान शक्ति से क्रियान्वित किया जाए।
• हर्षिल क्षेत्र के हाइवे में वर्तमान समय में दो वाहन आराम से आ-जा सकते हैं। इसलिए देवदार वृक्षों को बचाने के निमित्त से यहां सड़क का चौड़ीकरण मात्र 7 मीटर तक ही हो तो बेहतर होगा।
• गंगा के उद्गम का गौमुख ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग के कारण निरंतरर टूट रहा है। यह कई मीटर पीछे खिसक गया है। वायुमंडल को शीतलता देने वाली इस घाटी के इस एकमात्र देवदार वन के कटने से ग्लेशियर के पिघलने की गति और तीव्र हो जाएगी। यह गंगा के अस्तित्व के लिए खतरनाक है।
• ग्रीन तकनीक से सड़कों का निर्माण किया जाना चाहिए। पहाड़ों में सड़कों के निर्माण का अलग डिजायन बनना चाहिए। इसी तरह भवन व अन्यनिर्माण के मानचित्र मैदानों से भिन्न होने चाहिये। इसके लिये वैज्ञानिकों की राय ली जानी चाहिए।

क्या कहते हैं जानकार

• चारधामों की मौजूदा सड़क को ऑल वेदर बनाने के लिय यात्राकाल में यात्रा को बाधित करने वाले भूस्खलन क्षेत्रों (डेंजर जोन) का आधुनिक तकनीक से ट्रीटमेंट किया जाए।
• सड़क के दोनों ओर 24 मीटर के स्थान पर 10 मीटर तक ही भूमि का अधिग्रहण होना चाहिए। क्योंकि यहां छोटे और सीमांत किसानों के पास बहुत ही छोटी-छोटी जोत है, उसी में उनके गांव, कस्बे और सड़क किनारे आजीविका के साधन मौजूद हैं, जिसे पलायन रोकने और रोजगार देने की दृष्टि से बचाया जाना चाहिए।
• चारों धामों से आ रही पवित्र गंगा और उसकी सहायक नदियां-अलकनंदा, मंदाकनी, यमुना, भागीरथी के किनारों से गुजरने वाले मौजूदा सड़क मार्गों में पर्याप्त स्थान की कमी के कारण भी 10 मीटर चौड़ी सड़क बनाना जोखिम पूर्ण है। यदि बाढ़, भूकंप, भूस्खलन व हिमालय की नाजुकता जैसी समस्याओं को ध्यान में रखा जाए तो यहां के पहाड़ों को कितना काटा जा सकता है यह पर्यावरणीय न्याय ध्यान में रखना जरुरी है।
• जहां पर देवदार बांझ, बुरांस आदि के घने जंगल हैं, वहां पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचाया जाना चाहिए। इसके साथ अधिकतम 7 मीटर चौड़ी सड़क ही बननी चाहिए। जैसे-हर्षिल से भैरोंघाटी के बीच घने देवदार के जंगल हैं। दूसरा काकड़ा गाड़ से त्रिजुगीनारायण तथा लामबगड़ से लेकर बद्रीनाथ के बीच है। इसी तरह सड़कों पर बनी हुई बस्तियां, गांव, बाजार आदि को प्रभावित किए बिना सड़क यथावत रखी जाए।
• जैसा कि पहाडी सड़कों के निर्माण के लिए राजमार्ग, सडक परिवहन मंत्रालय ने 2004 में गाइडलाइंस दी हैं, उनका शब्दशः पालन किया जाना चाहिए। ऑल वेदर रोड अथवा सड़क चौड़ीकरण का टिकाऊ डिजायन भूगर्भविदोंव विशेषज्ञों से बनवाना चाहिए। निर्माण से निकलने वाला मलवा नदियों में सीधे न फेंककर सड़क के दोनों ओर सुरक्षा दीवार के बीच मलवा डालकर वृक्षारोपण हो। इसके लिए हरित निर्माण तकनीक का सहारा लिया जा सकता है।
• ऑलवेदर रोड के लिए जैसे रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्तमुनि, गुप्तकाशी फाटा, जोशीमठ, पीपलकोटी, चमोली, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग आदि मुख्य व्यापारिक स्थानों से गुजरने वाले मौजूदा मार्ग को पूर्ववत रखना चाहिए, क्योंकि इन स्थानों को छोड़कर नए प्रस्तावित इलाइंटमेंट से वनों का भारी मात्रा में कटान होगा और पहले से ही उपरोक्त बस्तियों में रहने वाले लोगों की आजीविका और सड़क सुरक्षा बाधित होगी।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

उत्तराखंड में 19 अक्टूबर को महानवमी पर सार्वजनिक अवकाश, मुख्यमंत्री धामी ने दी शुभकामनाएं

उत्तराखंड में शारदीय नवरात्र की महानवमी के अवसर पर सोमवार, 19 अक्टूबर...

उत्तराखंड में दिव्यांग युवाओं के लिए मुफ्त सिविल सेवा कोचिंग योजना शुरू, UPSC-UKPSC की करेंगे तैयारी

उत्तराखंड सरकार ने दिव्यांग युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें प्रशासनिक सेवाओं...