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लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के अध्यक्ष नियुक्त

सैन्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट को भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) का महानिदेशक बनाया गया था। आईएसपीए अंतरिक्ष और उपग्रह कंपनियों का प्रमुख उद्योग संघ है, जो भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की सामूहिक आवाज बनने की आकांक्षा रखता है। भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से उन्नत और एक अग्रणी देश बनाने में मदद करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) का गठन किया गया था।

प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए आईएसपीए भारत को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से उन्नत और अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी देश बनाने में मदद कर रहा है।

लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट ने अपने सैन्य सेवाकाल में सामरिक रूप से अहम श्रीनगर स्थित 15वीं कोर का भी नेतृत्व किया। उनकी अगुवाई में सेना ने कश्मीर घाटी में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन ऑलआउट छेड़ा। यह काफी कामयाब अभियान रहा और कश्मीर में 250 से ज्यादा आतंकी मारे गए। उनके कार्यकाल के दौरान एलओसी और सीमा पर सेना की कड़ी चौकसी के चलते पाकिस्तान के लिए आतंकियों की घुसपैठ कराना नामुमकिन साबित हुआ।

जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सफल अभियान से पहले डीजीएमओ रहने के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट ने खुद को चीनी मोर्चे पर भी साबित करके दिखाया। डोकलाम विवाद के दौरान उनके महानिदेशालय में बने सेना के वॉर रूम से कई बार शीर्ष नेतृत्व को हालात से अवगत कराया गया। इतने कम समय में भारतीय सेना की तैयारी देख चीन भी हैरान था।

लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर ब्लॉक के खतवाड़ गांव निवासी हैं। उनका परिवार पिछले पांच दशक से अधिक समय से मसूरी में रह रहा है। भट्ट ने प्रारंभिक शिक्षा मसूरी के हेंपटनकोर्ट और 12वीं तक की पढ़ाई प्रतिष्ठित सेंट जार्ज कॉलेज में की। लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट बचपन से ही मेधावी थे। देश सेवा की ललक उनमें स्कूल के दिनों से ही थी। लेफ्टिनेंट जनरल भट्ट ने 9 गोरखा रेजीमेंट में कमीशन लिया था।

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Hill Mail

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