अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान द्वारा विद्यार्थियों को अनुशासन, शोध, नेटवर्किंग, टीम वर्क और लीडरशिप के बारे में अवगत कराया। उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत विद्यार्थियों को शोध कार्य, 20 प्रतिशत खेल-कूद गतिविधियों एवं 10 प्रतिशत अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभागिता सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्नातक विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को शोध गतिविधियों एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों को प्रकाशन, पेटेंट एवं उत्पाद के कार्यो में सम्मिलित होना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को अपना व्यक्तित्व विकास में ध्यान केन्द्रीत करना चाहिए और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसे छुपाना नहीं चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को छात्रावासों में अनुशासन में रहने के बारे में बताया और विद्यार्थियों से आशा की कि विद्यार्थी अध्यनरत होकर एक अग्रणीय वैज्ञानिक के रूप में विश्वविख्यात होंगे।

इस कार्यक्रम के प्रारम्भ में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. बृजेश सिंह द्वारा सभी का स्वागत किया गया। साथ ही अधिष्ठाता कृषि डा. एस.के. कश्यप द्वारा विश्वविद्यालय के बारे में; कुलसचिव डा. के.पी. रावेरकर द्वारा शैक्षणिक नियम; कार्यवाहक अधिष्ठाता प्रौद्योगिकी डा. लोकेश वाष्णैय द्वारा सलाहकार प्रणाली; कार्यवाहक अधिष्ठाता स्नातकोत्तर डा. अनिता रानी द्वारा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की विशेषताएं; कार्यवाहक अधिष्ठात्री सामुदायिक विज्ञान डा. साक्षी द्वारा विश्वविद्यालय में सह-शिक्षा; कार्यवाहक अधिष्ठाता मत्स्यिकी डा. अवधेश कुमार द्वारा छात्र आचरण और अनुशासन; अधिष्ठाता कृषि व्यवसाय प्रबंधन डा. आर.एस. जादौन द्वारा व्यक्तित्व विकास और सॉफ्ट स्किल्स आपको सफल बनाने की कुंजी हैं; अधिष्ठाता विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय डा. संदीप अरोरा द्वारा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में बुनियादी विज्ञान की भूमिका; अधिष्ठाता पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान डा. एस.पी. सिंह द्वारा छात्रावास में विद्यार्थी जीवन; निदेशक शोध डा. ए.एस. नैन द्वारा अनुसंधान प्रणाली और सुविधाएं तथा सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. वी.एन. शाही द्वारा छात्र कल्याण गतिविधियाँ के बारे में विस्तार विद्यार्थियों को अवगत कराया।
अंत में डा. शोभित गुप्ता ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशकगण, संकाय सदस्य, छात्रावास अभिरक्षक एवं अभिरक्षिकाएं तथा प्रथम वर्ष के सभी महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित थे।


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