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हवाई सेवाओं से पर्यटन को लगेगा पंख

उत्तराखंड में उड़ान योजना के तहत हेलिकॉप्टर सेवाओं के लिए 14 हवाई मार्ग तय किए गएहैं। इन रूट पर सेवाएं देने के लिए कंपनियों का भी चयन हो चुका है।

हिल-मेल ब्यूरो

पर्यटन उत्तराखंड के विकास की रीढ़ साबित हो सकता है। पर्यटकों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य में आवागमन को सुगम बनाना आधारभूत आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से त्रिवेंद्र सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि सड़क से लेकर हवाई मार्ग तक की सुविधाएं मजबूत की जा सकें। ऑल वेदर रोड से उड़ान सेवा तक इसी कोशिश का नतीजा है।

एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से उत्तराखंड को इस वर्ष बड़ी सफलता मिली है। उड़ान योजना के तहत उत्तराखंड को पहले चरण में पिथौरागढ़, चिन्यालीसौड़, गौचर, हल्द्वानी व सहस्त्रधारा से हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू हो गई हैं। 13 जिलों में 13 नये टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर हेलीपैड की सुविधा जल्द शुरू की जाएगी।

उड़ान योजना केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना है। जिसका लक्ष्य आम लोगों को कम दामों पर हवाई सुविधा उपलब्ध कराना है। उत्तराखंड में उड़ान योजना के तहत हेलिकॉप्टर सेवाओं के लिए 14 हवाई मार्ग तय किए गए हैं। केंद्र सरकार साल के शुरुआत में ही इन रूट पर सेवाएं देने के लिए कंपनियों का भी चयन कर चुकी है। इस बीच कंपनियों ने रूट सर्वे से लेकर हेलीपैड का निरीक्षण सहित डीपीआर पर काम पूरा कर लिया है। सूत्रों के अनुसार अब कंपनियों को संचालन के लिए अंतिम तौर पर डीजीसीए का लाइसेंस जारी होने है। संभावना है कि अक्तूबर अंत तक राज्य में चयनित रूट पर हवाई सेवा शुरू हो जाएगी। इन रूट पर किराया प्रति घंटे दो हजार रुपये प्रति सीट की दर से तय किया जाएगा। अपर सचिव नागरिक उड्डयन आर राजेश कुमार ने बताया कि तय समय पर सेवा शुरू करने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इन रूट पर हेली-सेवा

सहस्रधारा-चिन्यालीसौड़ (हैरिटेज एविएशन सात सीटर)
गौचर-सहस्रधारा-चिन्यालीसौड़ (पवनहंस सात सीटर)
पंतनगर-अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ (पवनहंस ग्यारह सीटर)
हल्द्वानी-धारचूला (हैरिटेज एविएशन सात सीटर)
सहस्रधारा-गौचर (हैरिटेज एविएशन सात सीटर)

राज्य मे मौजूद कई परियोजनाओं मे निवेश के अच्छे अवसर हैं। जैसे रोपवे, टिहरी झील का विकास, ऋषिकेश मे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, हैली टैक्सी और सफारी, स्कायर्स के लिए औली का विकास, आधुनिक आयुष एवं योगा सेन्टर का विकास, अस्पताल और अन्य कई परियोजनाएं।

पर्वतीय पर्यटक स्थलों पर यातायात के दबाव को कम करने के लिए देहरादून-मसूरी, देहरादून-कालाढूगी और रानीबाग-नैनीताल के बीच रोपवे बनाये जाने की कार्य चल रहा है।

भविष्य की राह हो आसान

इसके साथ ही राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने उड़ान योजना के अंतर्गत राज्य की सभी प्रमुख हवाई पट्टियों तथा 27 हैलीपैड को हवाई सेवाओं से जोड़ने की सहमति दी है। राज्य की टिहरी झील सहित सभी बड़ी झीलों के लिए केंद्र सरकार सी-प्लेन योजना पर भी सहमत हो गई है। देहरादून, हरिद्वार एवं हल्द्वानी को रिंग रोड मिलेगी। 22 से अधिक सड़कों को नेशनल हाईवे की मंजूरी दी गई। गढ़वाल-कुमाऊं की कनेक्टिविटी के लिए कंडी मार्ग हेतु भी केंद्र सरकार पूरा सहयोग कर रही है। टनकपुर से पिथौरागढ़-बागेश्वर एवं रामगढ़-चौखुटिया रेल मार्ग का भी विकास होगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर काम शुरू कर दिया गया है।

चल पड़ी नैनी-दून जनशताब्दी

इसी वर्ष अगस्त महीने में शुरू हुई नैनी-दून जन-शताब्दी उत्तराखंड के लोगों का सपना पूरा होने जैसा है। इससे पहले देहरादून से नैनीताल जाने के लिए उत्तर प्रदेश घूमकर जाना पड़ता था। लेकिन दून-जन शताब्दी ने गढ़वाल और कुमाऊं की दूरी को कम कर दिया है। ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णपयाग रेल परियोजना के बाद नैनी-दून जनशताब्दी उत्तराखंड के लोगों के लिए एक बड़ी सौगात है। इससे पर्यटन के साथ ही व्यावसायिक गतिविधियों में भी फायदा होगा। नैनीताल हाईकोर्ट और राजधानी देहरादून के बीच यूं भी आवाजाही को आसान किया जाना काफी जरूरी था। न्यायिक मसलों के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को भी इस ट्रेन से सुविधा मिली है। पर्यटन के लिहाज से भी ये काफी अहम रेल सेवा है।

जब हर मौसम उत्तराखंड में होगी चारधाम यात्रा

केंद्र सरकार की चारधाम परियोजना उत्तराखंड के लिए इसी लिए अहम है क्योंकि इससे पर्यटक पूरे वर्ष उत्तराखंड आ सकेंगे। पर्यटक आएंगे तो जाहिर तौर पर स्थानीय व्यापारियों का मुनाफा होगा। कई पर्यावरणीय चिंताओं से जूझते हुए चारधाम परियोजना के तहत सड़कों का निर्माण चल रहा है।

ऋषिकेश से शुरू होकर ये प्रॉजेक्ट केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री तक जाएगा। इसी को हम ऑॅल वेदर रोड कह रहे हैं, यानी जिसमें हर मौसम में यात्रा की जा सके। इस परियोजना से उत्तराखंड के चारों धाम आपस में जुड़ जाएंगे। यात्रियों के लिए चारों धाम दर्शन में तय की जाने वाली दूरी काफी कम हो जाएगी। यात्रा का जोखिम भी कम होगा।

इस प्रॉजेक्ट के तहत 900 किलोमीटर लंबी शानदर सड़क बनाई जा रही। इस राजमार्ग में 13 बाईपास, 2 सुरंगें, 25 बड़े ब्रिज, 132 छोटे पुल और तीन फ्लाईओवरों का निर्माण प्रस्तावित है। चारधाम राजमार्ग का न्यूनतम 10 मीटर चौड़ीकरण होगा। यह राजमार्ग पूरे 900 किलोमीटर तक टू-लेन होगा, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई दस मीटर होगी। यह महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है।

अतिथि देवो भव:

उत्तराखंड में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बेहतर यातायात व्यवस्था जरूरी है। इसके साथ ही आपदा के लिहाज से संवेदनशील राज्य में यातायात को सुरक्षित बनाना भी जरूरी है। राज्य सरकार इसकी अहमियत समझती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में हवाई सेवा यहां आवाजाही को आसान बनाएगी। रेल सेवा, रोपवे, सीप्लेन से यात्रियों की सहूलियत बढ़ेगी। आस्था और रोमांच दोनों की तलाश में हर साल यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। देवभूमि अपने अतिथियों को सत्कार करने के लिए हर तरह से तैयार हो रही है।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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