दिवाली के अवसर परप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किए दर्शन। अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की विस्तार से कीसमीक्षा। आपदा के बाद फिर लौटा केदारघाटी का वैभव। केदारनाथ से हिल-मेल की खास रिपोर्ट केदारनाथ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगाव जगजाहिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर
- दिवाली के अवसर परप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किए दर्शन। अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की विस्तार से कीसमीक्षा। आपदा के बाद फिर लौटा केदारघाटी का वैभव।
- केदारनाथ से हिल-मेल की खास रिपोर्ट

केदारनाथ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगाव जगजाहिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर दिवाली से पहले केदारनाथ पहुंचे। मंदिर में विधिविधान से पूजा करने के बाद केदारनाथ में चलाए जा रही पुनर्निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी का फोकस उन पांच परियोजनाओं पर खास तौर पर रहा, जिनका उन्होंने पिछले साल उद्घाटन किया था। इनमें केदारनाथ के सामने के मार्ग को चौड़ा करना,घाटों का निर्माण और सुरक्षा दीवार, तीर्थ पुरोहितों (पुजारियों) के लिए घरऔर आदि शंकराचार्य का भव्य समाधि स्थल का निर्माण शामिल है। सारा प्रयास केदारघाटी को उसका दिव्य और भव्य स्वरूप लौटाने के लिए हो रहे हैं। आपदा के बाद यहां शुरू किए गए काम का परिणाम मन मोह रहा है।
प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर के विस्तार, कुंड, सीढ़ियों से आते हुए 250 मीटर के मंदिर मार्ग की गहन समीक्षा की। वहां बिछाए गए पत्थरों की जानकारी ली और मंदाकिनी व सरस्वती नदी के संगम के समीप निर्मित गोल फर्श पर बनाए गए गोल चबूतरे के बारे में अधिकारियों से पूछा। राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह लगातार प्रधानमंत्री को जानकारी देते रहे।पीएम दी को बताया गया कि मंदिर परिसर में13 हजार, मंदिर मार्ग पर 18700 और गोल चबूतरे पर 51 हजार पत्थर बिछाए गए हैं। पीएम ने मंदाकिनी नदी किनारे बन रही सुरक्षा दीवार और उसके साथ बन रहे आस्था पथ का भी जायजा लिया।

पीएम का खास दिलचस्पी आदि शंकराचार्य की समाधि में है। जेएसडब्ल्यू समूह ने केदारपुरी में प्रख्यात ब्रह्मज्ञानी आदि शंकराचार्य की समाधि का निर्माणकर रहा है। केदारनाथ में दिव्य शिला के पीछे बनने वाली आदि शंकराचार्य की समाधि भूमिगत गुफा में होगी। इसके लिए 100 मीटर लंबी गुफा तैयार की जाएगी।
पहाड़ी शैली के पत्थर बिछाए

केदारनाथ की भव्यता को बढ़ाने के लिए यहां पहाड़ी शैली के एक 1.10 लाख पत्थर (पठाल) लगाए गए। ये पठाल पैदल मार्ग, मंदिर परिसर और दिव्य शिला के आसपास लगाए गए हैं। मंदिर परिसर और मंदिर के ठीक सामने पैदल मार्ग पर लगे पठालों की चमक धाम के सौंदर्य को और भी बढ़ा रही है।पहाड़ के अलावा राजस्थान व अन्य राज्यों से भी पत्थर तरासने वालेकारीगर केदारनाथ बुलाए गए। रात-दिन की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने कुल 1.10 लाख पहाड़ी पत्थर मंदिर परिसर, मंदिर के सामने पैदल मार्ग और दिव्य शिला के आसपास लगाए। वहीं, मंदिर के सामने बने चबूतरे पर 40 हजार और मंदिर के पीछे बनी दिव्य शिला पर दस हजार पत्थर लगाए गए हैं।
भीम गुफा तैयार
केदारनाथ में साधना के लिए पहाड़ी शैली की गुफा का निर्माण किया गया है। ये गुफा केदारनाथ मंदिर के बायीं ओर की पहाड़ी पर स्थित है। ये गुफा पांच मीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी है। जहां पर साधना के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।गुफा की छत पर पठाल (पहाड़ी पत्थर) लगाए गए हैं और उसका आंगन भी पठालों से बनाया गया है। साधना के दौरान गुफा का दरवाजा पूरी तरह बंद रहेगा और खिड़की से ही उसे भोजन व अन्य जरूरी सामान भिजवाया जाएगा। आपातकाल के लिए गुफा में लोकल फोन की सुविधा भी उपलब्ध है।
केदारघाटी का विहंगम नजारा

केदारनाथ पुनर्निर्माण की दिशा में किए गए कार्यों में एक और उपलब्धि जुड़ी। मंदिर के जिस दूसरे छोर पर तीर्थयात्री केदारघाटी के विहंगम दृश्य का आनंद उठा सकेंगे या फिर सुकून के साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं, वह स्थल आकार ले चुका है। इसका नाम अराइवल प्लाजा रखा गया है। केदारनाथ मंदिर परिसर के मुख्य आकर्षण में से एक अराइवल प्लाजा का पूरा क्षेत्रफल 64 वर्गमीटर है। इसके अलावा टेंपल प्लाजा और सेंट्रल प्लाजा भी यहां आकार ले चुके हैं।अराइवल प्लाजा में एक समय में करीब 400 लोग खड़े हो सकते हैं। 252 मीटर का मार्ग: इस मार्ग पर स्थानीय ग्रेनाइट पत्थरों से बनी 40 हजार टाइल्स लगाई गई हैं। यह टाइल्स तीन इंच मोटी, दो फीट लंबी व एक फीट चौड़ी हैं। वहीं, टेंपल प्लाजा70 चौड़ा और 65 मीटर लंबा है।
पीएम ने कर्नल कोठियाल के काम को सराहा
प्रधानमंत्री निम के पूर्व प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल से भी मिले और उनके द्वारा केदारपुरी में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी निम ने केदारपुरी में निर्माण कार्य जारी रखा है, यह काबिले तारीफ है। कर्नल (रि) अजय कोठियाल ने प्रधानमंत्री को केदारनाथ में चल रही पांच परियोजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने पिछले साल अक्टूबर में पांच परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी। केदारनाथ में आई आपदा के दौरान कर्नल अजय कोठियाल ही निम से रहत के लिए केदारनाथ पहुंचने वाले पहले लोगों में से एक थे और उन्हींकी देखरेख में केदारपुरी में पुननिर्माण की नींव रखी गई।
पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है केदारनाथ
केदारनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। 2013 में आई आपदा के समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। वह सबसे पहले राहत और बचाव दल लेकर देहरादून पहुंचे थे लेकिन तब राजनीतिक कारणों से उनकी केदारनाथ में पुनर्निर्माण में मदद की पेशकश को ठुकरा दिया गया। लेकिन 2014 में केंद्र सरकार बनाने के बाद उन्हें यह मौका मिल गया कि वह केदारनाथ को फिर से सजाने, संवारने और बसाने के लिए कार्य कर सके। केदारनाथ में केंद्र सरकार की ओर से कई काम कराए जा रहे हैं। अक्टूबर 2017 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ आए तो यहां चल रहे काम को नई गति मिली। पिछले साल 20 अक्टूबर को केदारनाथ की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने केदारनाथ मंदिर में पांच पुनर्निर्माण परियोजनाओं की नींव रखी थी। वह उत्तराखंड के अधिकारियों से टेली कॉफ्रेंसिंग के जरिये बात कर केदारनाथ में हो रहे काम की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। पीएम ड्रोन की मदद से वह चल रहे काम को सजीव देखते हैं। पीएमओ की केदारनाथ में सीधी निगरानी है।
विधि विधान से केदारनाथ के कपाट बंद

2018 का यात्रा सीजन समाप्त हो गया है। नौ नवंबर को 12 ज्योर्तिलिंगों में शामिलकेदारनाथ के कपाट चार घंटे से अधिक समय तक चले विस्तृत प्रार्थना समारोह के बाद शीतकालीन के लिए बंद हो गए। कपाट बंद होने के बाद भगवान की पंचमुखी उत्सव डोली सेना के बैंड की धुनों के साथ अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना हो गई। श्रद्धालुओं का कहना था की इस बार यात्रा में उन्हीं किसी भी तरह की कठिनाई नहीं हुए। कुछ लोग पहले भी केदारनाथ आ चुके हैं। उनका कहना था कि अब सुविधाएं ज्यादा बेहतर हैं और नई केदारपुरी का जो भव्य दृश्य मिलता है, वह अद्भुत है। 2013 की बाढ़ में मंदिर परिसर को तबाह कर दिया गया था। केदारनाथ आपदा में हजारों लोग मारे गए थे।
केदारनाथ में यात्रियों ने रचा इतिहास
केदारनाथ की यात्रा में इस वर्ष नया अध्याय जुड़ा है। यात्रा के इतिहास में पहली बार सात लाख 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए।29 अप्रैल से 9 नवंबर तक चली बाबा केदार की यात्रा ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं में पहले दिन से खासा उत्साह देखने को मिला। कपाट खुलने के दिन ही 25,073 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए, जो यात्रा इतिहास में एक दिन में दर्शनार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड था। अकेले मई माह में ही 4 लाख 60 हजार श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन को पहुंचे।यही नहीं जून 2013 की आपदा के बाद इस वर्ष पहला मौका रहा, जब भारी बरसात में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर एक भी दिन यात्रा नहीं रुकी। यात्रा ने कारोबार को भी नई रफ्तार दी। यात्रा के पहले माह में केदारघाटी में गुप्तकाशी से गौरीकुंड तक संचालित होटल, लॉज और रेस्टोरेंट को शत-प्रतिशत बुकिंग मिली। दूसरी तरफ श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को भी यात्राकाल में लगभग 12 करोड़ से अधिक रुपये की आय हुई।
केदारनाथ यात्रा का बीते सात वर्ष का आंकड़ा
वर्ष
यात्री
2012 5,83,167
2013 3,12,201
2014 40,833
2015 1,54,430
2016 3,09,746
2017 4,71,235
2018 7,30,456
चारों धाम रहे गुलजार
केदारनाथ के साथ-साथ चारधाम के बाकी स्थलों बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री ने भी नए कीर्तिमान स्थापित किए। इस साल बद्रीनाथ में दर्शन करने 10 लाख से भी ज्यादा लोग पहुंचे। 4,45,000 लोगों ने गंगोत्री धाम की यात्रा की। यह साल 2013 की आपदा के बाद सबसे अधिक संख्या थी। साल 2011 में 4,75.000 लोगों ने गंगोत्री धाम के दर्शन किए थे। वहीँ यमनोत्री धाम में दर्शन के लिए भी इस साल लोगों में खास उत्साह दिखा। साफ वातावरण और सुविधाओं के बेहतर होने से इस वर्ष यमुनोत्री धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ। इस वर्ष दर्शन करने वालों का आंकड़ा 3,90,000 को पार कर गया, जो केदारनाथ में आई आपदा के बाद सबसे ज्यादा था। 2018 में, राज्य में अभूतपूर्व तीस लाख पर्यटक आए। इनमें से 28 लाख पर्यटक उत्तराखंड में चार धाम के महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थयात्रा सर्किट के ही थे।







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