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ऑल वेदर रोड में ‘ऑल इज वेल’

बीआरओ का दावा है कि सड़कों के निर्माणके दौरान पर्यावरणीय मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। नई तकनीक से कररहे हैं काम। हिल-मेलब्यूरो, देहरादून उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य की चीन से लगती हुई सीमा पर आवागमन बेहतर बनाने के

  • बीआरओ का दावा है कि सड़कों के निर्माणके दौरान पर्यावरणीय मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। नई तकनीक से कररहे हैं काम।

हिल-मेलब्यूरो, देहरादून

उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य की चीन से लगती हुई सीमा पर आवागमन बेहतर बनाने के लिए सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ सड़क निर्माण के कार्य में जुटा हुआ है। ऑल वेदर रोड के तहत राज्य में हो रहे सड़क निर्माण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कई बार सवाल खड़े कर चुका है। लेकिन बीआरओ का दावा है कि उनके द्वारा सड़कों के निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के महानिदेशक ले. जनरल हरपाल सिंह ने नवंबर के पहले हफ्ते में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की। उन्होंने राज्य के सीमांत सड़कों के निर्माण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर मुख्यमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीआरओ द्वारा राज्य की सड़कों के निर्माण में नवीन तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसके साथ ही वृक्षारोपण और पर्यावरण सरंक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। ले. जनरल हरपाल सिंह ने बताया कि सड़कों के निर्माण में अवशेष सामग्री जैसे कि सड़कों के कटान के दौरान होने वाला मलबा आदि को प्राथमिकता के साथ दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है।  

चीन सीमा तक कनेक्टीविटी पर जोर

 भारतमाला परियोजना के तहत राज्य में 18 हजार करोड़ की लागत से चीन की सीमाओं तक कनेक्टिीविटी के लिए मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में कार्य किया जा रहा है।

भारतमाला परियोजना

  • बैजनाथ-थराली-कर्णप्रयाग मार्ग
  • अस्कोट-धारचूला-मालपा-लिपुलेख मार्ग
  • बैजनाथ -बागेश्वर-कपकोट-मुनस्यारी-सेराघाट-जौलजीवी मार्ग
  • माणा-मूसा पानी-माणा पास
  • जोशीमठ-मलारी मार्ग

सीमा सड़क संगठन को राज्य में सड़कों के निर्माण के लिए वन विभाग से क्लीयरेंस, भूमि-अधिग्रहण, और अन्य जरूरी मुद्दों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल सहयोग दिया गया। ताकि राज्य की अंतर्राष्ट्रीय सीमा को महफूज़ किया जा सके।


बीआरओ ने राज्य सरकार से हरिद्वार रोड़ पर सीमा सड़क संगठन के प्रोजेक्ट मुख्यालय के लिए अतिरिक्त 20 एकड़ भूमि का अनुरोध किया है। सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक ले. जनरल हरपाल सिंह के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने इस पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही सीएम ने बीआरओ के भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लीयरेंस जैसे अन्य मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सीमांत क्षेत्रों और गांवो में रोड कनेक्टिीविटी सामरिक दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। सेना को भी सीमान्त ग्रामीणों से सामरिक और देश की सुरक्षा से सम्बन्धित महत्वपूर्ण सूचनाएं प्राप्त होती है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा सीमा सड़क संगठन के साथ हर संभव सहयोग की बात कही।

अल्मोड़ा से सांसद और केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने भी कहा है कि केंद्र सरकार सीमांत सड़कों की अहमियत को समझ रही है और इसलिए अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में कई सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिया गया है। यही वजह है कि इस क्षेत्र की कई सड़कों का निर्माण ऑल वेदर रोड के तहत भी किया जा रहा है। अजय टम्टा ने कहा कि सरकार अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में सीमांत क्षेत्रों में सड़क निर्माण को ख़ास तवज्जो दे रही है। टनकपुर-लिपुलेख, कर्णप्रयाग-बैजनाथ, सामा-जौलजीबी और अस्कोट-लिपुलेख सड़कों का निर्माण ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत किया जा रहा है। इन सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग में शामिल करने पर इनके निर्माण की लागत भी केंद्र सरकार  वहन करेगी।

दरअसलचीन सीमा के साथ सड़कों के निर्माण में देरी सामरिक दृष्टि से तो नुकसानदायक है ही, राज्य को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।सड़कों की खराब स्थिति के कारण ही मानसरोवर यात्रा के लिए यात्रियों को सिक्किम से हो कर जाना पड़ता है। इतना ही नहीं व्यापार मार्ग खुलने के बाद भी पिथौरागढ़ के लिपुलेख दर्रे तक सड़क नहीं बन पाई। इसका भी सेना और राज्य को नुकसान हो रहा है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि सीमांत सड़कों के बनने में देरी से बार्डर असुरक्षित है। मानसरोवर यात्रा रूट का जहां धार्मिक महत्व है वहीं यह सड़क सामरिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। जबकि वहीं सीमा के दूसरे छोर पर चीन ने सड़कें, रेलमार्ग, हवाई पट्टी और ऑयल डिपो तक बना लिये हैं। चीन ने सीमा पर सड़कों का जाल बिछा दिया है। यही वजह है कि उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों के लिए चीन जाकर जरूरत का सामान लाना ज्यादा आसान हो गया। यहां तक कि बरसात के मौसम में छह सीमावर्ती गांव राशन का सामान लेने के लिए पिथौरागढ़  न जाकर चीन से ला रहे थे। खराब सड़कों की वजह से उनके लिए चीन-नेपाल रूट पर आवाजाही आसान हो रही थी।इस मामले पर हाईकोर्ट ने भी चिंता जताई और राज्य सरकार को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिये थे।हालांकि भारत माला परियोजना के तहत सीमावर्ती सड़कों के निर्माण में तेज़ी लाई जा रही है।

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