दिल्ली पुलिस में 35 साल की सर्विस दे चुके एसीपी ललित मोहन नेगी जो कि वर्तमान में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में कार्यरत हैं वह आज सेवानिवृत हो रहे हैं। उन्होंने अपनी सर्विस के दौरान 47 आतकंवादियों और अंडरवर्ल्ड एवं गैंगस्टर को मार गिराया है। जिनमें से 10 पाकिस्तानी आतंकवादी और 37 अंडरवर्ल्ड/गैंगस्टर थे। देश विदेश की खुफिया और इन्वेस्टिगेशन एजेंसियों के लिए एसीपी ललित मोहन नेगी ’एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के तौर पर जाने जाते हैं। वह 26 साल से स्पेशल सेल में रहते हुए अपनी बहादुरी से सर्वाधिक मेडल, अवॉर्ड, प्रशस्ति पत्र पाने वाले अफसर हैं। आतंकवाद और अंडरवर्ल्ड के खिलाफ सबसे अधिक सक्सेस ऑपरेशन की वजह से दिल्ली पुलिस ही नहीं बल्कि रॉ, सीबीआई, इंटेलीजेंस ब्यूरो और अन्य जांच एजेंसियों ने मेडल से पुरस्कृत किया है।

एसीपी ललित मोहन नेगी ने हिल मेल के साथ अपनी कुछ जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड के जिला पौड़ी गढ़वाल के पोखरा ब्लॉक के कोला गार्ड गांव के रहने वाले हैं। उनके परिवार में माता पिता, भाई और अन्य सदस्य हैं। उनकी प्राथमिक पढ़ाई गांव में हुई। चूंकि पिता चंद्र सिंह नेगी दिल्ली स्थित एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे और उनके पिता के एक दोस्त दिल्ली पुलिस में दरियागंज थाने में तैनात थे। उनके पिता उन्हें छोटी सी उम्र में दिल्ली ले आये और उन्हे चौथी क्लास में दरियागंज के डीएवी में दाखिला दिला दिया। उसके बाद उन्होंने दिल्ली में रहकर ही अपनी पढ़ाई की। वहीं से दिल्ली पुलिस की तरफ उनका रुझान हुआ।
एसीपी ललित मोहन नेगी ने भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद जून 1989 में बतौर सब इंस्पेक्टर दिल्ली पुलिस जॉइन की। निजामुद्दीन, वसंत कुंज, आरके पुरम, कापसहेड़ा, धौला कुआं थाने में रहने के बाद 1998 में स्पेशल सेल में आ गए। साल 2000 पार्लियामेंट अटैक, जर्मन बेकरी ब्लास्ट, चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम ब्लास्ट, लाल किला अटैक, अलकायदा, आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन या अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ ऑपरेशन करने के बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिलते चले गए।

एसीपी ललित मोहन नेगी को दिल्ली पुलिस में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए 26 जनवरी 2024 को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। उन्हें पहले वीरता के लिए पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान दिल्ली में कई कुख्यात बदमाशों को गिरफ्तार और कईयों को मौत के घाट भी उतारा है। वह दिल्ली पुलिस में एक ईमानदार और निडर अधिकारी के तौर पर जाने जाते हैं।
गौरतलब रहे कि एसीपी ललित मोहन नेगी की टीम ने आनंदमयी मार्ग पर दो बदमाशों को 17 फरवरी, 2020 को घेर लिया था। एसीपी ललित मोहन नेगी ने जिप्सी से बदमाशों की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। टक्कर से बदमाश नीचे गिर गए। कुछ देर में बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग करना शुरू कर दी। गोलियां एसीपी ललित मोहन नेगी, एसआई सुंदर गौतम, एसआई रघुवीर और शमशेर की बूलट प्रूफ जैकेट में लगीं। ये पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए। मुठभेड़ में दोनों बदमाश ढेर हो गए। एसीपी ललित मोहन नेगी की देखरेख में एसआई मनोज भाटी (उस समय एएसआई) व शजाद खान ने बहादुरी दिखाते हुए आतंकी गुरजीत सिंह उर्फ भा और सुखदीप सिंह उर्फ भूरा को गिरफ्तार किया था।

उत्तराखंड के निवासी एसीपी ललित मोहन नेगी ने कई एनकाउंटर को अंजाम दिया है। उनको इससे पहले 2021 में गणतंत्र दिवस के दिन हुए दंगों की जांच करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की टैक्टर परेड के दौरान लाल किले में हुई हिंसा के मामले में यूएपीए और राजद्रोह की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। एनकाउंटर स्पेशिलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को यूएपीए का इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया था। उस दिन किसान आंदोलनकारी काफी उग्र हो गये थे और उन्होंने कई जगह पर तोडफोड़ और हिंसक घटनाएं की थीं।


Leave a comment