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पहाड़ का बुजुर्ग ‘ऑर्गेनिक मैन’, इनके पास मिलती हैं कमाल की दालें

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

उत्तराखंड में कई ऐसे लोग हैं, जो पहाड़ी उत्पादों को पहचान दिलाने के साथ अपना रोजगार भी कर रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स 70 साल के हर्षमणि जोशी भी हैं। हर्षमणि जोशी मूल रूप से टिहरी जिले के डागर के रहने वाले हैं। जो बीते 10 सालों से श्रीनगर गढ़वाल में पहाड़ी दालों और उत्पादों की छोटी सी दुकान चलाते हैं। उनकी इस छोटी सी दुकान पर गहत, भट्ट, काली दाल, रयांश और झंगोरा, मंडुवे का आटा, जख्या, अदरक समेत कई प्रकार की पहाड़ी दालें मिलती है। वर्तमान समय में बाजार में ऑर्गेनिक उत्पादों की डिमांड काफी तेजी से बढ़ रही है। जिसे देखते हुए हर्षमणि जोशी घर पर खुद भी ऑर्गेनिक तरीके से दालें और चीजें उगाते हैं। इसके अलावा वे गांव के अन्य काश्तकारों से पहाड़ी उत्पादों को खरीद कर उन्हें बाजार बेचते हैं। श्रीनगर में काफी संख्या में लोग उनके पहाड़ी उत्पाद को खरीदते हैं।

उम्र के इस पड़ाव में भी सुबह की सर्दी में भी घर से पहाड़ी उत्पादों को लाकर श्रीनगर में छोटी सी दुकान लगाते हैं। इतना ही नहीं बिना किसी की मदद के अकेले दिन भर दुकान संचालित करते हैं। जिससे उनकी आमदनी हो जाती है। पहाड़ी उत्पादों को बाजार में बेचने का उनका उद्देश्य ऑर्गेनिक उत्पादों को लोगों तक पहुंचाना है। वे 10 सालों से पहाड़ी उत्पादों को बेच रहे हैं। खुद भी पहाड़ी उत्पाद घर पर उगाते हैं और गांव-गांव जाकर लोगों से भी पहाड़ी उत्पाद खरीदते हैं। उसके बाद उनको बाजार में बेचते हैं। झंगोरा की कीमत 100 रुपए किलो, दालें 200 रुपए से 250 रुपए किलो तक बेच रहे हैं।

उन्होंने बताया कि गांवों से दाल लाना बड़ा कठिन काम है। गांव से घोड़े में दालों को इकठ्ठा करते हैं, उसके बाद गाड़ी से श्रीनगर लाते हैं, तब जाकर यहां दालों और अन्य उत्पादों को बेच पाते हैं। हर्षमणि जोशी ने बताया कि लोगों को पहाड़ी उत्पाद पसंद आ रहे हैं, जो व्यक्ति एक बार उनकी दुकान पर आता है, वो दोबारा जरूर उनसे पहाड़ी उत्पाद खरीदता है। वे कहते हैं आजकल की जीवन शैली में लोगों का खान-पान ठीक नहीं है। इसलिए लोगों को ऑर्गेनिक खाने की जरूरत है। बाजार में ऑर्गेनिक उत्पादों की डिमांड भी है। वो इसी डिमांड को पूरा करने के लिए रोजगार कर लोगों को ऑर्गेनिक उत्पाद दे रहे हैं।

स्थानीय निवासी भास्करानंद ने बताया कि लोग श्रीनगर और आसपास के क्षेत्र से हर्षमणि जोशी की दुकान पर पहाड़ी उत्पाद और दालें खरीदने आते हैं। अगर कोई व्यक्ति उनकी दुकान पर आता है तो जरूर दोबारा भी उनसे ही खरीदता है। उनकी दुकान पर पहाड़ी उत्पादों के रेट भी काफी कम हैं। उन्होंने कहा जोशी केवल पहाड़ी उत्पादों को बेचते ही नहीं, बल्कि लोगों को उनके बारे में बताते भी हैं। देश में अब लोग सस्टेनेबल लाइफस्टाइल, ईको-फ्रेंडली और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के बारे में जागरूक हो रहे हैं। लोग अपनी जीवनशैली में भी परिवर्तन ला रहे हैं। अब प्रदेश में ऑर्गेनकि प्रोडक्ट्स की काफी डिमांड है। पहाड़ की हल्दी और तमाम औषधीय जड़ी बूटी उत्पादों के लिए अब लोगों को पहाड़ के बाजारों की खाक नहीं छाननी होगी। एक क्लिक पर उन्हें ये जैविक उत्पादन अपने घर में मिल जाएंगे।

लेखक दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

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