उत्तराखंड में मौजूद सौ साल पुराने आयुर्वेद कालेजों का होगा कायाकल्प!

उत्तराखंड में मौजूद सौ साल पुराने आयुर्वेद कालेजों का होगा कायाकल्प!

उत्तराखंड में सौ वर्ष पुराने दो आयुर्वेद कॉलेजों की जल्द ही कायाकल्प होगी। इसमें से एक ऋषिकुल कॉलेज के उच्चीकरण का मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार को भेजने के लिए उत्तराखंड ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है। केंद्र सरकार का रुख इस संबंध में बेहद सकारात्मक है। इसी तरह, सौ वर्ष पुराने गुरुकुल आयुर्वेद कॉलेज पर भी सरकार की नजर है। हालांकि अभी इसका विचार बेहद प्राथमिक स्तर पर है।

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

उत्तराखंड सरकार राज्य को आयुष प्रदेश बनाना चाहती है और इसके लिए तमाम पहल करने के दावे हो रहे है। लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि प्रदेश में मौजूद आयुष कॉलेज ही मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। ऋषिकुल काॅलेज को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था दरअसल, नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन की ओर से हाल ही में आयुष कॉलेजों की रेटिंग जारी की गई है। एनसीआईएसएम के मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की ओर से जारी की गई रेटिंग में उत्तराखंड के कुल 20 आयुष कॉलेजों में से मात्र 8 आयुष कॉलेज ही मानकों पर खरे उतरे हैं। प्रदेश में मौजूद 12 निजी कॉलेज मानकों पर अधूरे पाए गए हैं। उत्तराखंड के 12 निजी आयुष कॉलेज NCISM की रेटिंग से बाहर: दरअसल एनसीआईएसएम के मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की ओर से देशभर में संचालित आयुष कॉलेज के लिए तय मानकों के आधार पर पहली बार रेटिंग जारी की गई है। एनसीआईएसएम की वेबसाइट पर जारी रेटिंग सूची के अनुसार देश भर में मौजूद 540 आयुष कॉलेजों को शामिल किया गया था। इन सभी आयुष कॉलेज के लिए टाइम मांगों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इसमें सिर्फ 221 आयुष कॉलेज मानकों पर खरे उतरे। 319 आयुष कॉलेज मानकों पर अधूरे थे। मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने मानकों पर खरे उतरे 221 आयुष कॉलेज को मानकों के आधार पर तीन श्रेणी में बांटा है।

NCISM की रेटिंग पाए 8 में सिर्फ 1 कॉलेज को A रेटिंग: इसके तहत A रेटिंग में प्रदेशों के 55 आयुष कॉलेजों को शामिल किया गया है। B रेटिंग में प्रदेशों के 55 आयुष कॉलेजों को शामिल किया गया है। C रेटिंग में प्रदेशों के 111 आयुष कॉलेज को शामिल किया गया है। उत्तराखंड राज्य में मौजूद आयुष कॉलेजों की स्थिति की बात करें तो 20 कॉलेजों में से आठ आयुष कॉलेज ही रेटिंग में आ पाए हैं। इसके तहत ए रेटिंग में एक कॉलेज, बी रेटिंग में एक कॉलेज और सी रेटिंग में 6 कॉलेज को शामिल किया गया है। एनसीआईएसएम के मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की ओर से जारी रेटिंग इस बात को बयां कर रही है कि उत्तराखंड में सरकारी आयुष कॉलेज की स्थिति दयनीय है। मेडिकल साइंस के साथ-साथ देश में आयुर्वेद विज्ञान ने भी पिछले कुछ सालों में अपनी जगह मजबूत बनाई है।

आयुर्वेद के क्षेत्र में होने वाले शोध और अध्ययन में उत्तराखंड राज्य ने अपनी अग्रणी भूमिका निभाई है। यही वजह है कि अब उत्तराखंड में भी ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के तर्ज पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना की तैयारी की जा रही है। उत्तराखंड आयुष सचिव ने बताया कि प्रदेश में लगातार आयुर्वेद के क्षेत्र में हो रहे विकास और लोगों के रिस्पांस को देखते हुए उत्तराखंड में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के केंद्रीय संस्थान की स्थापना को जरूरी समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में मौजूद ऋषिकुल महाविद्यालय को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के रूप में विकसित किए जाने को लेकर राज्य सरकार विचार कर रही है। आयुष सचिव ने कहा, आयुर्वेद संस्थान को लेकर भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। हालांकि, अभी भारत सरकार से मंजूरी का इंतजार है। लेकिन ऋषिकुल महाविद्यालय इस तरह के बड़े संस्थान की स्थापना के लिए एक बेहतर विकल्प है।

उन्होंने बताया कि ऋषिकुल महाविद्यालय में आयुर्वेदिक अस्पताल भी मौजूद है। वहां पर यदि केंद्रीय संस्थान के रूप में विस्तारीकरण की जरूरत पड़ती है तो भूमि भी उपलब्ध कराई जाएगी। लिहाजा, भारत सरकार से मंजूरी मिलते ही इस दिशा में आगे कदम बढ़ाया जाएगा। उत्तराखंड में मौजूद सौ साल पुराने दो आयुर्वेद काॅलेजों का कायाकल्प किया जाएगा। जिसके तहत ऋषिकुल काॅलेज को अपग्रेड करने का मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऋषिकुल कॉलेज की केंद्र सरकार को भेजे जाने वाली डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को उत्तराखंड ने तैयार कर लिया है। इसी के साथ ही प्रदेश में मौजूद सौ साल पुराने गुरूकुल आयुर्वेद काॅलेज को अपग्रेड करने पर भी सरकार जोर दे रही है। आयुर्वेद के सौ साल पुराने काॅलेज पूरे देश में दर्जन भर हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में ऋषिकुल और गुरूकुल के रूप में दो ऐसे आयुर्वेद काॅलेज हैं, जो सौ साल से अधिक पुराने हैं। इनमें भी ऋषिकुल काॅलेज सबसे ज्यादा पुराना है। जिसकी स्थापना साल 1919 में हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि ने इसकी स्थापना की थी।

गुरूकुल काॅलेज की स्थापना साल 1921 में स्वामी श्रद्धानंद ने की थी। उत्तराखंड सरकार, सौ साल पुराने आयुर्वेद काॅलेजों के उच्चीकरण को लेकर भारत सरकार से लगातार अनुरोध कर रहा है। साथ ही, ऋषिकुल काॅलेज को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। जिसपर केंद्र सरकार ने उत्तराखंड से अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान बनाने के बजाए ऋषिकुल काॅलेज के उच्चीकरण का प्रस्ताव भेजने को कहा। जिसके बाद आयुष विभाग ने इसको लेकर जरूरी कार्यवाही पूरी कर ली है। साथ ही लोक निर्माण विभाग ने इसके उच्चीकरण से संबंधित डीपीआर भी तैयार कर दी है। जिस पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। उच्चीकरण के लिए जो विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, उसमें ऋषिकुल में सात मंजिला हाॅस्पिटल का प्रस्ताव रखा गया है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार, ऋषिकुल काॅलेज में मौजूद पुराने हाॅस्पिटल को तोड़कर यह हाॅस्पिटल बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। ऋषिकुल काॅलेज के पास 25 एकड़ जमीन उपलब्ध है। वर्तमान में यहां पर 11 विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कराई जा रही है। केंद्र के सकारात्मक रूख को देखते हुए पूरी उम्मीद है कि जल्द ही ऋषिकुल काॅलेज का उच्चीकरण हो जाएगा। केंद्रीय आयुष सचिव कहा उत्तराखंड के प्रस्ताव पर कार्रवाई गतिमान हैं। मंत्रालय का रूख सकारात्मक है। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड में आयुष से जुड़ी हर गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए सरकार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार का भी इस दिशा में राज्य को पूरा सहयोग मिल रहा है। ऐसे में उम्मीद हैं कि आयुष के संबंध में उत्तराखंड के जो भी प्रस्ताव है, उन पर जल्द ही मुहर लग जाएगी।

लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं और वह दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

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