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अब पलायन पर वारः मालू-कंधार से रोजगार

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हिल-मेल ब्यूरो

देवभूमि उत्तराखंड का जनपद पौड़ी गढ़वाल जहां पलायन का दंश झेल रहा है तो वहीं पलायन रोकने व स्वरोजगार देने के लिए देवेश आदमी आगे आए है। देवभूमि उत्तराखंड के जनपद पौड़ी गढ़वाल के रिखणीखाल प्रखंड में देवेश आदमी ने मालू, कंधार के पत्तों से पत्तल-दोने बनाने की यूनिट लगाई है।

रिखणीखाल ब्लॉक के जुई गांव में रोजगार सृजन की यह नई पहल हुई है। देवेश ने खुद कीसोच- समझ से एक मशीन तैयार की। उस मशीन से मालू और कंधार के पत्तल-दोने तैयार किए जा रहे हैं। आमतौर पर यह मशीन बाजार में 8-10 लाख रुपये तक में मिलती है लेकिन देवेश ने देशी तरीके से इस मशीन को महज ढाई लाख रुपये में तैयार कर दिया। अब इस मशीन से वह स्वरोजगार की नई राह तैयार कर रहे हैं। इस मशीन में कुछ कलपुर्जे ट्रैक्टर व कुछ आटा चक्की के लगे हैं।

ग्राम जुई में इस मशीन से मालू तथा कंधार के पत्तों से पत्तल व दोने तैयार कर बाजार मं सप्लाई की जा रही है। देवेश आदमी के साथ यूनिट की संचालक सुषमा गुंसाई ‘नीर’ व वीरेंद्र सिंह नेगी आदि शामिल हैं। सुषमा गुंसाई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा लेखिका भी हैं। वीरेंद्र नेगी कुछ समय पहले नौकरी छोड़कर गांव वापस चले आए थे। पलायन को मात देने के लिए उन्होंने बकरी पालन तथा व्यावसायिक खेती को स्वरोजगार के रूप में अपनाया।

देवेश आदमी की पहल पर जुई गांव में एक व्यावसायिक यूनिट लगाई गई इस स्वरोजगार के खुलने से जहां 15 स्थानीय महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया वहीं स्थानीय संसाधनों का सद्पयोग करते हुए कैसे पलायन को मात दी जा सकती है सरकार को इसका उदाहरण भी दिखाया। पहाड़ों में उद्योग लगाने के लिए बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार वास्तव में धरातलीय सच्चाई से बहुत दूर खड़ी है।

देवेश जैसे उद्यमी से पहाड़ों में स्वरोजगार बढ़ाने के लिए उपायों पर चर्चा की जानी चाहिए। देवेश कुछ माह पूर्व नौकरी छोड़कर गांव वापस आए हैं। कुछ करने की चाह ने देवेश को सामाजिक कार्यकर्ता के साथ-साथ रचनात्मक कार्य के लिए प्रेरित किया। देवेश की बालावाला (देहरादून) में एक पहाड़ी उत्पादों की दुकान भी है। जिससे पहाड़ों उत्पादों की सप्लाई की जाती है।

देवेश ने बताया की आज उनके द्वारा तैयार की गई मशीन की बाजार में बहुत मांग है। ऐसी मशीनें जल्द ही रूद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भी स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। देवेश ने बताया की यदि हम पहाड़ों में इस प्रकार की यूनिटें लगाते हैं तो यह प्लास्टिक का सशक्त विकल्प हो सकता है। उत्तराखंड के बेरोजगारों के लिए यह स्वरोजगार के रूप में बढ़ा विकल्प हो सकता है। आवश्यकता है इस दिशा में सकारात्मक सोच की तथा सरकार द्वारा पहल करने की।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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