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उत्तराखंड के रण के सूरमा तैयार

चेतना नेगी, नई दिल्ली उत्तराखंड के सियासी रण के लिए सूरमाओं की घोषणा हो चुकी है। भाजपा और कांग्रेस ने राज्य की पांचों लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। भाजपा ने हरिद्वार सीट से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक, टिहरी से

चेतना नेगी, नई दिल्ली

उत्तराखंड के सियासी रण के लिए सूरमाओं की घोषणा हो चुकी है। भाजपा और कांग्रेस ने राज्य की पांचों लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। भाजपा ने हरिद्वार सीट से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक, टिहरी से माला राज्यलक्ष्मी शाह और अल्मोड़ा से अजय टम्टा को प्रत्याशी बनाया है। तीनों मौजूदा सांसद हैं। वहीं पौड़ी सीट पर राष्ट्रीय सचिव तीरथ सिंह रावत और नैनीताल सीट पर प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को प्रत्याशी बनाया गया है। अभी इन सीटों पर मेजर जनरल (रिटा.) बीसी खंडूरी और भगत सिंह कोश्यारी सांसद हैं। दोनों 2019 के समर में नहीं उतर रहे हैं। भाजपा के प्रांतीय नेतृत्व ने तीन दौर के सर्वे के बाद प्रत्याशियों का पैनल 15 मार्च को केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया था। इसमें 17 संभावित दावेदारों के नाम थे। 16 मार्च को दिल्ली में हुई भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इन पर चर्चा भी हुई।

उधर, कांग्रेस ने नैनीताल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस महासचिव हरीश रावत, हरिद्वार सीट से अंबरीश कुमार, पौड़ी सीट से मनीष खंडूड़ी, अल्मोड़ा (सुरक्षित) सीट से राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा, टिहरी सीट से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है। कांग्रेस को नैनीताल और हरिद्वार सीटों पर प्रत्याशियों को तय करने में काफी वक्त लगा। दोनों सीटों पर पूर्व सीएम हरीश रावत को लेकर पेच फंसा हुआ था। प्रदेश संगठन रावत को हरिद्वार सीट से प्रत्याशी बनाने की पैरवी कर रहा था, जबकि खुद वह नैनीताल सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे।

एक नजर दोनों दलों के प्रत्याशियों पर

भाजपा

माला राज्य लक्ष्मी शाह, सांसद (टिहरी गढ़वाल)

टिहरी राज परिवार से आने वाली माला राज्यलक्ष्मी शाह ने 2012 में टिहरी सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की। इसके बाद साल 2014 में माला राज्य लक्ष्मी शाह ने कांग्रेस के साकेत बहुगुणा को हराकर जीत दर्ज की थी। एकसितंबर, 2014 के बाद से महिला सशक्तिकरण समिति की सदस्य हैं। इसके अलावा संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति, परामर्शदात्री समिति, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय समिति की सदस्य हैं।

डा. रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद (हरिद्वार)

डा. रमेश पोखरियाल निशंक1991 से साल 2012 तक पांच बार यूपी और उत्तराखंड की विधानसभा पहुंचे।साल 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित। जिसके बाद लगातार तीन बार विधायक बने।साल 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार में कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में पर्वतीय विकास विभाग के मंत्री बने। साल 1999 में रामप्रकाश गुप्त की सरकार में संस्कृति पूर्त व धर्मस्व मंत्री।2000 में उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद प्रदेश के पहले वित्त, राजस्व, कर, पेयजल सहित 12 विभागों के मंत्री बने। वर्ष 2009 में उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री।वर्ष 2012 में डोईवाला (देहरादून) क्षेत्र से विधायक निर्वाचित। 2014 में डोईवाला से इस्तीफा देकर हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित।

अजय भट्ट, प्रत्याशी (नैनीताल सीट)
अजय भट्ट छात्र जीवन में विद्यार्थी परिषद से जुड़ाव एवं 1980 से सक्रिय सदस्य व पूर्व में पूरा परिवार जनसंघ में समर्पित। 31 दिसंबर 2015 से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हैं। मई 2012 से मार्च 2017 तक नेता प्रतिपक्ष रहे। 2001 में अंतरिम सरकार में कैबिनेट मंत्री का दायित्व संभाला। 1996 से 2000 और 2002 से 2007 तक रानीखेत से विधायक रहे। 2009 से 2011 तक उत्तराखंड सरकार में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ सलाहकार एवं अनुश्रवण परिषद के अध्यक्ष रहे।

अजय टम्टा, राज्य मंत्री, सांसद (अल्मोड़ा सीट)

अल्मोड़ा के दुगालखोला निवासी अजय टम्टा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत जिला पंचायत सदस्य से की। उन्होंने सबसे पहले जिले के तल्ला तिखून से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। जिसके बाद टम्टा 1996 में जिला पंचायत उपाध्यक्ष बने। 2007 में भाजपा ने उन्हें सोमेश्वर विधानसभा से उम्मीदवार बनाया। इस बार टम्टा जीते और उन्हें खंडूरी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दायित्व मिला। पार्टी संगठन में टम्टा की सक्रियता को पार्टी ने 2009 में टम्टा को अल्मोड़ा पिथौरागढ़ सीट से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया गया। लेकिन इस चुनाव में टम्टा को शिकस्त का सामना करना पड़ा। 2012 में टम्टा ने फिर सोमेश्वर से विधानसभा का चुनाव जीता और 2014 में भाजपा ने उन्हें फिर लोकसभा में उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में टम्टा ने कांग्रेस के प्रदीप टम्टा को शिकस्त देकर यह चुनाव जीत लिया। 6 जुलाई 2014 को केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।

तीरथ सिंह रावत (पौड़ी सीट)

जनपद पौड़ी गढ़वाल की असवालस्यूं पट्टी के अंतर्गत ग्राम सिरौं निवासी तीरथ सिंह रावत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद खंडूडी के सबसे करीबी लोगों में शामिल तीरथ सिंह को 2012 के विधानसभा में चुनाव में चौबट्टाखाल सीट से मैदान में उतारा गया, जहां उन्होंने जीत हासिल की। फरवरी 2013 में उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई और 2015 में उन्हें प्रदेश की राजनीति से हटाकर राष्ट्रीय सचिव का दायित्व दे दिया गया।

कांग्रेस

प्रदीप टम्टा, प्रत्याशी, अल्मोड़ा (सुरक्षित)

उत्तराखंड जन संघर्ष वाहिनी से सामाजिक क्षेत्र में पदार्पण। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन से जुड़े। इसके बाद पहाड़ों में शराब के खिलाफ चलाए गए नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन में भी हिस्सा लिया। कांग्रेस में शामिल होकर राजनीति में प्रवेश किया। 2002 में अल्मोड़ा की सोमेश्वर सीट से विधायक चुने गए। 2003-04 में उत्तराखंड उद्योग परिषद के वाइस चेयरमैन रहे। 2009 में अल्मोड़ा क्षेत्र से सांसद बने। 2014 में भाजपा के अजय टम्टा से चुनाव हारे। इस समय राज्यसभा सांसद हैं।

प्रीतम सिंह, प्रत्याशी, टिहरी गढ़वाल

प्रीतम सिंह ने 1988 में चकराता ब्लाक प्रमुख बनने के साथ ही राजनीति में पदार्पण किया। 1993 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। उत्तराखंड बनने के बाद 2002, 2007, 2012 व 2017 में विधायक चुने गए। वर्ष 2002 में वे उत्तराखंड के पंचायती राज, ग्रामीण इंजीनियरिंग, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, खेल और युवा कल्याण विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 2012 में वह उत्तराखंड के गृह, ग्रामीण विकास, राज, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, लघु सिंचाई और पिछड़ा क्षेत्र विकास के कैबिनेट मंत्री भी रहे।

हरीश रावत, पूर्व सीएम एवं प्रत्याशी नैनीताल

हरीश रावत की गिनती जमीन से जुड़े नेताओं में होती है। गांव से लेकर जिला स्तर की राजनीति में काफी सक्रियता दिखाई। 1980 में कांग्रेस की ओर से लड़े हरीश रावत ने भाजपा के बड़े नाम मुरली मनोहर जोशी को अल्मोड़ा से पटखनी देकर तहलका मचा दिया। यह उनकी पहली संसद यात्रा थी। इसके बाद उन्होंने आठवीं लोकसभा 1984, नवीं लोकसभा 1989 में भी मुरली मनोहर जोशी को हराया। रावत की राजनीतिक किस्मत में पलटा खाया और 1991 से लेकर 1999 तक लगातार 4 चुनाव भाजपा प्रत्याशी से हारे। 1991 में उन्हें भाजपा के जीवन शर्मा और इसके बाद 1996, 1998, 1999 में बच्ची सिंह रावत ने लोकसभा चुनाव में उन्हें हराया। 2000 में उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने पर पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया। 2002 में वह यशपाल आर्य की जगह राज्य सभा में बतौर सांसद पहुंचे। यह चौथी बार था जब उन्होंने संसद में जगह बनाई। 2009 में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में परिवर्तन करते हुए हरिद्वार से दांव आजमाया और भाजपा के स्वामी यतींद्रानंद तीन लाख तीस हजार से अधिक मतों से हराकर पांचवीं दफे संसद में जगह बनाई। 2009 से 2011 तक श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री और 2012 से 2014 तक जल संसाधन कैबिनेट मंत्री का पद दिया। 2013 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा। रावत 2017 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे, रावत ने धारचूला से भाजपा विधायक की सीट खाली करा उपचुनाव जीत 2014 में राज्य विधानसभा में अपनी जगह बनाई थी। 2017 विधानसभा चुनाव में दो जगह हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा से अपनी किस्मत आजमाइ परवाह दोनों ही जगह भाजपा प्रत्याशियों के हाथों पराजित हुए।

मनीष खंडूरी, प्रत्याशी पौड़ी गढ़वाल

मनीष खंडूड़ी सांसद व पूर्व मुख्यपमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी (सेवानिवृत) के बेटे हैं। पेशे से पत्रकार और आइटी जानकार मनीष फेसबुक इंडिया के न्यू ज पार्टनरशिप के हेड हैं। उन्होंाने बिजनेस स्टैंेडर्ड, बिजनेस वर्ल्डप सरीखों पत्र-पत्रिकाओं के लिए पत्र कारिता की और सीएनएन के डिजिटल संस्ककरण से भी जुड़े हैं। वो शिकागो के कैलाग स्कूरल आफ मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी से स्नासतक हैं। हाल ही में देहरादून में हुई राहुल गांधी की जनसभा में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और पौड़ी सीट से कांग्रेस के प्रत्यााशी हैं।

अमरीश कुमार, प्रत्याशी हरिद्वार

45 वर्षों से हरिद्वार जिले और आसपास के इलाकों में विभिन्न मजदूर आंदोलनों के संयोजक रहे। शहर युवक कांग्रेस, शहर किसान कांग्रेस के अध्यक्ष और शहर कांग्रेस के महामंत्री रहे। 1996 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में निर्वाचित हुए। 2002 और 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ा, 2007, 2012 और 2017 में हरिद्वार से विधानसभा चुनाव में भाग्य अजमाया, लेकिन असफल रहे। वर्ष 2000 में उत्तराखंड अंतरिम विधानसभा के अधिष्ठाता मंडल के सदस्य, लोक लेखा समिति के सभापति और नियम समिति के सदस्य रहे। 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के शासन के दौरान कांग्रेस के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों और पूर्व प्रधानमंत्री कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में लगातार आंदोलन किया। वर्तमान में ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर कांग्रेस विचार कमेटी के सदस्य हैं। उत्तराखंड कांग्रेस मीडिया कमेटी के चेयरमैन भी हैं।

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