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कर्नल कोठियाल का ऐलान, चुनाव नहीं लड़ेंगे, समाजसेवा का मिशन जारी रहेगा

वाई एस बिष्ट, देहरादून

सेना से सेवानिवृत्त कर्नल अजय कोठियाल अपने समाज सेवा के मिशन को और रफ्तार देंगे। यही वजह है कि उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव के समर में उतरने का इरादा त्याग दिया है। उत्तराखंड और पर्वतारोहण की दुनिया में कर्नल अजय कोठियाल का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उत्तराखंड के युवाओं को नई दिशा देने के उनके अभियान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कर्नल अजय कोठियाल का यूथ फाउंडेशन एक मिशन के रूप में परिवर्तित हो चुका है। वह युवक-युवतियों को सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बलों में जाने के लिए तैयार करते हैं। खास बात यह है कि इतने बड़े अभियान को वह निशुल्क चलाते हैं। सेना से रिटायर होने के बाद अब वह पूरी तरह समाजसेवा में उतर गए हैं।

उनके द्वारा किया गया केदारनाथ के पुनर्निर्माण का कार्य कई लोगों के लिए प्रेरणा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें केदारनाथ के दिव्य और भव्य स्वरूप को साकार करने की जिम्मेदारी दी थी। उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में अपने सेवाकाल के दौरान इस जिम्मेदारी को पूरी तत्परता से निभाया। यही वजह है कि आज केदारघाटी का नया स्वरूप सबको अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। हर चुनौती का सामना शांति और सलीके से करने का हुनर उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। चाहे वह सैन्य मोर्चे पर दुश्मनों के कुटिल इरादों को नाकाम करना हो या फिर आपदा पीड़ित उत्तराखंड में राहत और पुनर्वास का काम। कर्नल कोठियाल सेना के एक बेहद सम्मानित अधिकारी रहे हैं। कर्नल कोठियाल को सेना में रहते कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, और विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया। वह दो बार माउंट एवरेस्ट को फतेह कर चुके हैं। कीर्ति चक्र फौज का वह सम्मान है जो शांतिकाल में अद्वितीय साहस के लिए दिया जाता है। शौर्य चक्र भी शांतिकाल के दौरान उच्च स्तर का साहस और कर्तव्य परायणता के लिए प्रदान किया जाता है। विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) फौज के उन अफसरों को दिया जाता है जिनकी सेवा असाधारण स्तर की रही हो। जाहिर है ऐसे तीन-तीनमेडल पाने वाला अफसर निश्चित ही खास व्यक्तित्व का होगा।

उनकी एक छवि इससे अलग भी है। वह है केदारनाथ को नया स्वरूप प्रदान करने वाले अधिकारी की। कर्नल अजय कोठियाल और उनकी टीम ने वर्ष 2013 की आपदा के दौरान हजारों लोगों को सुरक्षित बचाने का कार्य किया। उत्तरकाशी, गंगोत्री में फंसे लोगों को एनआईएम की टीम ने रेस्क्यू किया। कर्नल कोठियाल को केदारनाथ आपदा के बाद युद्ध स्तर पर पुनर्निर्माण कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने का भी श्रेय जाता है। उन्होंने यह काम तब अपने जिम्मे लिया था जब कोई सरकारी एजेंसी इसके लिए तैयार नहीं थी। तब चार गढ़वाल रेजिमेंट के कर्नल कोठियाल ने यह जिम्मेदारी संभाली और उसे बखूबी निभाया। बारह सौ नेपाली श्रमिकों के साथ टीम कोठियाल ने रात-दिन एक करके केदारनाथधाम की यात्रा के लिए न केवल नया पथ निर्मित किया, बल्कि केदारधाम को नए स्वरूप में ले आए। उनकी टीम ने यह काम रिकॉर्ड समय में किया। कर्नल कोठियाल आपदाके बाद से केदारवासी बन चुके थे।

एक और काम जिसने उन्हें युवाओं में लोकप्रिय बना दिया, वह है यूथ फाउंडेशन की ओर से चलाए जाने वाले निशुल्क भर्ती प्रशिक्षण शिविर। वह सैन्य, अर्धसैन्य बलों के लिए युवक और युवतियों दोनों को तैयार करते हैं। अब तक यूथ फाउंडेशन के प्रयासों से 8000 से ज्यादा युवा सेना का हिस्सा बन चुके हैं। इसके अलावा यूथ फाउंडेशन स्किल डेवलपमेंट के लिए भी लगातार काम कर रहा है। युवाओं में पकड़ को देखते हुए उनकी लोकप्रियता की धमक राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रही है। दूसरी ओर राजनीतिक हलचल से दूर कर्नल कोठियाल का कहना है कि वह युवाओं को सेना में भर्ती कैंपों के लिए प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाएंगे और मेडिकल कैंप आयोजित करेंगे। उनका उद्देश्य उत्तराखंड के युवाओं को देशसेवा के लिए तैयार करना और सही दिशा देना है।

कर्नल कोठियाल पर 2019 के चुनावी महासमर में उतरने के लिए भारी जन दबाव था, लेकिन वह अभी समाजसेवा के मिशन को ही आगे बढ़ाना चाहते हैं। लोकसभा चुनाव लड़ने के संबंध में तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए उन्होंने एक बयान जारी किया है।

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‘मेरे साथियों

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि जून 2013 में केदारनाथ में आई आपदा के दौरान उत्तरकाशी से लेकर केदार घाटी में बचावऔर पुनर्निर्माणके काम से हमें एकनई पहचान मिली। केदारनाथ यात्रा शुरू करने से लेकर पुनर्निर्माण में हमारी भूमिका को सबने देखा। उसके बाद उत्तराखंड के युवाओं को एक नया रास्ता दिखाने के लिए हमनेयूथ फाउंडेशन की शुरूआत की। पिछले पांच साल में 8000 बेरोजगार युवाओं को निशुल्क ट्रेनिंग देकर भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होने एक रिकॉर्ड आप सबके सामने है।लड़कियों को भी सेना और अन्य बलों तथा स्वरोजगार लिए तीन माह की निशुल्क ट्रेनिंग दी गई।वर्तमान में तकरीबन 2000 बेरोजगार युवा यूथ फाउंडेशन के कैंपों में ट्रेनिंग ले रहे हैं।हमारे साथ इन सबके परिवारों के सदस्यों को जोड़ा जाए तो लगभग 50 हजार साथी हर गांव में कार्य करने के लिए आतुर हैं। इन्हीं साथियों के समर्थन से राजनीति में उतरकर उत्तराखंड की सेवा का एक रास्ता हमारे सामने था।

पौड़ी लोकसभा से आगामी 2019 केचुनाव में उतरने लिए मैंने अपने साथियों के साथ लंबी चर्चा की।इसमें पूरे लोकसभा क्षेत्र से शामिलसैकड़ों कार्यकर्ताओं का जोश और समर्थन को देखते हुए बतौर निर्दलीय प्रत्याशी लड़ने का निर्णय सर्वसम्मति से आया। सबके निर्णय के पश्चात मैंने आत्ममंथन किया कि देश सेवा मेंमैंने सारी उम्र गुजार दी। सेना में 27 साल सर्विस की। आज जिस पुलवामा की चर्चा हो रही है, वहां पर भी गोलियां खाई। मेरा मकसद सेवानिवृत्ति के बाद समाज की सेवा को विस्तार देना है।

मुझे राजनीति नहीं आती, पिछले कुछ दिनों में विभिन्न राष्ट्रीय दलों के नेताओं से मेलमिलाप के बाद मैंने यह महसूस किया कि हमराष्ट्रीयराजनीतिक दलों के सांचे में फिट नहीं हो सकते।लेकिन ये बात पक्की है कि हम जो काम कर रहे हैं वो सही दिशा में हो रहा है। हम अपने काम को और तेज करेंगे।उत्तराखंड के उत्थान के लिए मेरे सामने तीन चेहरे हैं।एक यहां का जोश से भरा युवा, जो मेरी तरफ एक उम्मीद से देखा रहा है। दूसरा यहां की मातृशक्ति जिसने नया राज्य बनाने में योगदान दिया और जो राज्य की धुरी है उसके सिर से बोझ कम करना है। तीसरा पहाड़ का वो प्रतिभाशाली फौजी जो दूरदराज के गांव में रहता है, उसे मजबूत बनाना है।

मैं अविवाहित हूं, लिहाजा मुझ पर कोई पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं है। जैसा आप सभी जानते हैं कि मेरेपिता बीएसएफ के सेवानिवृत आईजी हैं।छोटा भाई एकमल्टीनेशनल कंपनी मेंप्रेसिडेंट है।मेरा छोटा परिवार देहरादून के वसंत विहार में रहकर सामाजिक कार्यों में जुटा है। मैंने तय किया है किउत्तराखंड के युवा, महिलाओं और भूतपूर्व सैनिकों को भविष्य की राह दिखाने में अपनी ताकत लगाऊंगा। इसलिएअपनी अंतरात्मा की पुकार को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रहा हूं कि मैं पौड़ी लोकसभा से चुनाव में नहीं उतरूंगा।’

देह सिवा बरु मोहि इहै सुभ करमन ते कबहूं न टरों।
न डरों अरि सो जब जाइ लरों निसचै करि अपुनी जीत करों ॥

धन्यवाद
जय बद्री केदार

कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल, कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, वीएसएम

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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