केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों पर लगी रोक अगले 24 घंटे तक रहेगी जारी

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों पर लगी रोक अगले 24 घंटे तक रहेगी जारी

जनपद में बाहर से आने वाले प्रत्येक घोड़े और खच्चर की गहन स्क्रीनिंग की जा रही है। बीते एक माह में राज्य भर के 16 हजार से अधिक पशुओं की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। केवल पूर्णतः स्वस्थ पशुओं को ही जिले में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

केदारनाथ यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चरों के बीच इक्वाइन इन्फ्लुएंजा नामक विषाणुजनित रोग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यात्रा मार्ग पर एक दिन के लिए घोड़े खच्चरों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी, जिसे फिर से 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ आशीश रावत ने बताया कि चिकित्सकों के साथ ही राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार से विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक दल जनपद में पहुंच चुका है, जो लगातार घोड़े-खच्चरों की बीमारी एवं स्थिति पर नजर रख रहा है।

उन्होंने बताया कि मंगलवार से चिकित्सक गौरीकुंड़ क्षेत्र में घोड़े-खच्चरों के सैंपल ले रहे हैं और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है, इसलिए सैंपलिंग प्रक्रिया के पूरी होने एवं जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा के चलते यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के परिचालन पर पुनः आगामी 24 घंटे तक पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। इस अवधि में पशुओं के संचालन पर पूर्णतया रोक रहेगी, जिस दौरान अस्वस्थ पशुओं को पृथक कर क्वारंटाइन किया जाएगा एवं राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार को प्रेषित की गई जांच रिपोर्ट आने तक रोक जारी रहेगी। रोक हटाने संबंधी निर्णय इसके पश्चात लिया जाएगा।

कहा कि पशुपालन विभाग ने तत्काल प्रभाव से अतिरिक्त पशु चिकित्सकों की तैनाती की है। गौरीकुंड समेत अन्य संवेदनशील स्थलों पर सरकारी दवाएं और उपचार सुविधाएं अत्यंत रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में कुछ पशुओं में पेचिश जैसे तीव्र लक्षण भी देखे जा रहे हैं, इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार से विशेषज्ञों की टीम बुलाकर जांच प्रारंभ की गई है।

डॉ आशीश रावत ने बताया कि प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ इन्फेक्शियस डिजीजेज इन एनिमल्स 2009 अधिनियम के प्राविधानों के अंतर्गत अस्वस्थ पशु को अलग रखने एवं अस्वस्थ पशु से कार्य ना कराने का उत्तर दायित्व पूर्णतः पशु मालिक का होगा एवं यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित पशु मालिक के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

पूर्व में भी हो चुका है वायरस का प्रकोप

पशु चिकित्सकों का कहना है कि इक्वाइन इन्फ्लुएंजा मुख्यत श्वसन मार्ग से फैलता है और बेहद तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में संक्रमण फैला सकता है। वर्ष 2009 में भी इस रोग ने केदारनाथ यात्रा को प्रभावित किया था। फिलहाल इस रोग की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर इलाज और आराम से पशु जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं। गौरीकुंड और आसपास के क्षेत्रों में जैसे ही लक्षण सामने आए, संबंधित गांवों को प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया गया।

यात्रा मार्ग पर पर्याप्त विशेषज्ञों की टीम तैनात

पुशुपाल विभाग की ओर से स्थिति से निपटने के लिए जनपद में एक मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, दो उप मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, 20 पशु चिकित्सक, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के दो वैज्ञानिकों की टीम तैनात की गई है। इसके अतिरिक्त बुधवार को पंतनगर विश्वविद्यालय के दो विशेषज्ञ डॉक्टर भी केदारघाटी पहुचेंगे। यह दोनों विशेषज्ञ डॉक्टर वर्ष 2009 में भी इस बीमारी के उपचार में कार्य कर चुके हैं।

डीएम ने किया यात्रा संचालन में सहयोग की अपील

जिलाधिकारी डॉ सौरभ गहरवार ने स्पष्ट किया कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तीर्थयात्री डंडी, कंडी और पिट्ठू जैसे वैकल्पिक माध्यमों से यात्रा करें। व्यापारियों से भी अनुरोध किया गया है कि वे सामान ढुलाई के लिए इन विकल्पों का प्रयोग करें, ताकि बीमार पशुओं को आराम मिल सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। कहा कि “यह संकट केवल पशुधन का नहीं, बल्कि हमारी यात्रा व्यवस्था और स्थानीय आर्थिकी से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही लक्षण सामने आए, तुरंत स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन और विशेषज्ञों की सहायता शुरू कर दी गई थी। पंतनगर, देहरादून और हिसार से परामर्श लेकर सभी आवश्यक टीमें गठित की जा चुकी हैं। उन्होंने अपील की कि वे किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार या अफवाहों पर विश्वास न करें। केवल विभागीय पशु चिकित्सकों से ही संपर्क करें और बीमारी के किसी भी लक्षण को नज़र अंदाज़ न करें।

स्थानीय निवासियों, व्यापारियों ने जताया पशुपालन विभाग का आभार

घोड़े खच्चरों में फैले संक्रमण के बीच स्थानीय निवासियों, व्यवसायियों ने भी घोड़े-खच्चरों की व्यापक जांच की मांग की। इनमें प्रधान संगठन उखीमठ के अध्यक्ष सुभाष रावत के साथ-साथ अवतार नेगी, सुरेंद्र रावत एवं संदीप पुष्पवाण ने प्रशासन से 24 घंटे से लेकर चार दिन तक के लिए घोड़े खच्चरों की आवाजाही पर रोक की मांग की थी। चिकित्सकों द्वारा व्यापक स्तर पर जांच करने एवं 24 घंटे के लिए आवाजाही पर रोक को लेकर उन्होंने पशुपालन विभाग का धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

  • यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित

    यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित0

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।

    READ MORE
  • अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट

    अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट0

    देश में मौसम ने दो अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देकर बारिश की उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने का अलर्ट जारी किया है।

    READ MORE
  • ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ

    ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ0

    भारतीय वायुसेना के जांबाज योद्धाओं की बहादुरी की कहानियां हमेशा देशवासियों के भीतर गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और अद्भुत युद्ध कौशल का परिचय देकर भारतीय वायुसेना का मान बढ़ाया। दुश्मन के इलाके में आधी रात को अंजाम दिए गए इस बेहद जोखिम भरे मिशन में उन्होंने जिस धैर्य और सटीकता के साथ कार्रवाई की, वह आज भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की मिसाल बन चुकी है।

    READ MORE

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this