Tuesday , 15 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ हाईकोर्ट ने सरकार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की दी अनुमति
उत्तराखंड न्यूज़देहरादून

हाईकोर्ट ने सरकार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की दी अनुमति

इसके अलावा उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार को याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों पर तीन हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी प्रत्याशी को इसमें आपत्ति है तो वह कोर्ट में अपना पक्ष रख सकता है। आज हुई सुनवाई में ब्लॉक प्रमुख सीटों का आरक्षण निर्धारित करने व जिला पंचायत अध्यक्ष सीटों का आरक्षण निर्धारित न करने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।

आरक्षण रोस्टर को लेकर लगाई गई पंचायत चुनाव पर रोक का हटाया
चुनाव कार्यक्रम को तीन दिन आगे बढ़ाते हुए चुनाव कराने को कहा
उठाए गए मुद्दों पर तीन हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर निर्धारण के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं पर शुक्रवार को भी सुनवाई की। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने चुनाव को लेकर बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने जहां चुनाव पर लगी रोक हटाई तो वहीं राज्य निर्वाचन आयोग से पूर्व में जारी चुनाव कार्यक्रम को तीन दिन आगे बढ़ाते हुए चुनाव कार्यक्रम जारी करने को कहा है।
कोर्ट को बताया गया कि ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव एक ही तरह से होता है। एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि देहरादून के डोईवाला ब्लॉक में ग्राम प्रधानों के 63 फीसदी सीटें आरक्षित की गई। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से आरक्षण रोस्टर में कई सीटों के लंबे समय से एक ही वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलने का उल्लेख करते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 243 व सुप्रीम कोर्ट के समय-समय पर दिए आदेशों के खिलाफ बताया। महाधिवक्ता व मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि पिछड़ा वर्ग समर्पित आयोग की रिपोर्ट के बाद आरक्षण रोस्टर को शून्य घोषित करना व वर्तमान पंचायत चुनाव को प्रथम चरण माना जाना आवश्यक था।

आरक्षण का नया रोस्टर जारी कर पहली बार वर्तमान चुनाव में लागू माना
नैनीताल। दरअसल, बागेश्वर निवासी गणेश कांडपाल समेत कई लोगों ने राज्य सरकार की ओर से जारी 9 और 11 जून की नियमावली व परिपत्र को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी याचिकाओं ने कहा था कि सरकार की तरफ से जारी की गई नियमावली में अब तक के आरक्षण रोस्टर को शून्य घोषित कर दिया था। साथ ही आरक्षण का नया रोस्टर जारी कर उसे पहली बार वर्तमान चुनाव से लागू माना। इसके अलावा याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार का यह नियम कोर्ट के पूर्व के आदेश के खिलाफ है। याचिकाकर्ता का दूसरा तर्क पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा-126 के अनुसार कोई भी नियम तभी प्रभावी माना जायेगा, जब उसका सरकारी गजट में प्रकाशन होगा। हालांकि आज की सुनवाई के बाद कोर्ट ने पंचायत चुनाव पर लगी रोक को हटा दी है। साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार को याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों पर तीन हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है।

कोर्ट के आदेश के बाद दावेदारों में राहत
देहरादून। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से हाईकोई ने लगी रोक हटा दी है जिसके बाद चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली है। जिसका कारण है कि कुछ दिनों पहले पंचायत चुनाव को लेकर आचार संहिता लगा दी गई थी और दोवदारों ने अपना प्रचार प्रसार शुरू कर दिया था और उनका चुनाव में खर्चा शुरू हो गया था कोई की सुनवाई जितनी लम्बी चलती उतना ही चुनाव का खर्चा बढ़ता ही जाता। लेकिन कोर्ट से राहत मिलने के बाद दावेदार चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles