उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण की भावना को जीवंत करते हुए, गढ़वाल टेरिटोरियल आर्मी बटालियन ने हरेला पर्व के उपलक्ष्य में चारधाम पार्क और गौमुख गौशाला में एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया।
प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों का मिला संगम
हरेला पर्व के अवसर पर चारधाम पार्क और गौमुख गौशाला में 2500 से ज्यादा अलग अलग तरह के पौधे लगाये गये। यह कार्यक्रम न केवल प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी की भावना को दोहराता है, बल्कि राज्य की परंपराओं और पर्यावरणीय चेतना को सहेजने की एक अनूठी पहल भी है। इस इको पार्क को बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चारधाम की थीम पर बनाया गया है।
हरेला, उत्तराखंड का एक प्रमुख पारंपरिक पर्व है, जो विशेषकर कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व वर्षा ऋतु के आगमन, नई फसलों की शुरुआत और हरियाली के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। ‘हरेला’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ही ‘हरियाली’ से है, और यह पर्व प्रकृति से गहरे जुड़ाव का सशक्त प्रतीक है।
हरेला पर्व केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का अवसर है। वृक्षारोपण जैसे कार्य हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार करने में मदद करते हैं। – कर्नल प्रत्युल थपलियाल
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
- टीए बटालियन के जवानों, स्थानीय स्वयंसेवकों और गौमुख गौशाला के सदस्यों ने मिलकर विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण किया, जिनमें रूद्राक्ष, पीपल, बरगद, आम, नीम, आंवला सहित कई प्रकार के फलदार पेड़ थे।
- वृक्षारोपण के दौरान पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने प्रकृति की रक्षा करने और अधिकाधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लिया।
- इस अवसर पर गौमुख गौशाला प्रबंधन ने टीए बटालियन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से स्थानीय समुदाय को पर्यावरणीय जागरूकता के प्रति नई दिशा मिलेगी।

टीए बटालियन की पहल
गढ़वाल टेरिटोरियल आर्मी हमेशा से सामाजिक और पर्यावरणीय कार्यों में अग्रणी रही है। इस अवसर पर गढ़वाल टीए बटालियन के सीओ कर्नल प्रत्युल थपलियाल ने कहा कि हरेला पर्व केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का अवसर है। वृक्षारोपण जैसे कार्य हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार करने में मदद करते हैं।
हरेला पर्व के इस पावन अवसर पर ‘हरियाली ही जीवन है’ की भावना को आत्मसात करते हुए टीए बटालियन की यह पहल प्रशंसनीय है। इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब सैनिक और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तो न केवल सीमाएं सुरक्षित होती हैं, बल्कि पर्यावरण भी संवरता है।








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