हादसों का उत्तराखंड : 04 माह में 50 से अधिक लोगों ने जान गवाईं

हादसों का उत्तराखंड : 04 माह में 50 से अधिक लोगों ने जान गवाईं

उत्तराखंड में आर्थिकी का सबसे बड़ा स्रोत पर्यटन गतिविधियां हैं। पर्यटन और तीर्थयात्राएं स्थानीय लोगों की आजीविका का भी स्रोत हैं। पर्यटन और परिवहन का सीधा संबंध है। पर, सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि राज्य में पर्यटन के लिए अच्छा संदेश नहीं है। ऐसे में सड़क से लेकर आकाश तक की परिवहन सुरक्षा के मानकों पर ध्यान देना प्रदेश और केंद्र सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकता होनी चाहिए।

व्‍योमेश चन्‍द्र जुगरान, देहरादून

उत्तराखंड में वाहन दुर्घटनाओं और बारिश व भूस्‍खलन के कारण हादसों में पिछले चार माह में 50 से अधिक लोगों की अकाल मृत्यु हो गई। 15 जुलाई को थल-पिथौरागढ़ मार्ग पर सवारियों से भरी एक मैक्‍स जीप सौ फीट गहरी खाई में जा गिरी। जिसमें आठ सवारियों की तो दुर्घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई, जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। 28 जून को उत्तरकाशी में बड़कोट के पास यमुनोत्री मार्ग पर बादल फटने से हुए भूस्खलन में एक निर्माणाधीन होटल तबाह हो गया और नौ मजदूरों के मलबे में दबने की सूचना है। 25 जून को रुद्रप्रयाग से बदरीनाथ जा रही एक बस घोलतीर के पास अलकनंदा में गिर गई, जिसमें 12 तीर्थयात्रियों के बहने की जानकारी है। कुछ यात्रियों के शव मिले, अधिकतर का पता नहीं चला। 22 जून को देहरादून के पास वाहन दुर्घटना में चार युवकों की मृत्यु हो गई।

15 जून को केदारनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें पायलट सहित सात लोगों की मौत हो गई। 26 मई को कीर्तिनगर-बडियारगढ़ मोटर मार्ग पर एक कार गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में चार लोगों की दुर्घटनास्थल पर ही मौत हो गई। 12 अप्रैल को बदरीनाथ हाईवे पर श्रीनगर के पास थार अलकनंदा में जा गिरी, जिसमें पांच लोगों की जान चली गई। वहीं, 20 जुलाई को देहरादून के भानियावाला फ्लाईओवर पर बाइक पलटने से दो कांवड़ियों की मृत्यु हो गई। जोशीमठ-बदरीनाथ मार्ग पर भी बाइक दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए।

राज्य गठन के 24 साल के भीतर उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं में बीस हजार से अधिक लोगों ने जान गंवाई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की पिछले साल जारी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि उत्तराखंड छोटा राज्य होने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता यानी मारक क्षमता के मामले में 62.2 प्रतिशत के साथ देश में आठवें पायदान पर है, जबकि राष्‍ट्रीय औसत 36.5 प्रतिशत है।

पर्वतीय मार्गों पर होने वाले सड़क हादसे कोई भूकंप या प्राकृतिक आपदा नहीं हैं कि रोके नहीं जा सकें। ऐसे अधिकतर मामलों में लापरवाही, मानवीय भूल, खस्ताहाल सड़कें, वाहनों की फिटनेस, ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार, अकुशल ड्राइविंग, ड्राइवरों की मनोदशा, शराब, खराब मौसम और निर्माण कार्यों की अराजक दशा जैसी वजह सामने आती हैं।

अभी हाल में एक अमेरिकी जर्नल ‘क्‍यूरियस मेडिकल’ में ऋषिकेश एम्‍स के मनोरोग विभाग के चिकित्सकों के हवाले से छपे एक शोध में बताया गया है कि 21 प्रतिशत सड़क हादसों का कारण चालकों को झपकी या नींद आना है। 26 प्रतिशत का संबंध थकान और 32 प्रतिशत दुर्घटनाओं के पीछे नशा कारण है।

इनमें एक भी कारण ऐसा नहीं है, जिससे पार न पाया जा सके। बावजूद इसके, हर नया साल यहां मौतों का बढ़ा हुआ आंकड़ा छोड़कर विदा हो रहा है।

उत्तराखंड में सड़क हादसों के आंकड़े

  • 2018: कुल 1468 सड़क हादसे हुए।
  • 2022: सड़क हादसों की संख्या बढ़कर 1674 हो गई, जिनमें 958 मौतें हुईं और करीब 1500 लोग घायल हुए।
  • 2023: 1520 सड़क हादसों में 946 लोगों की जान गई।
  • 2024: साल भर में डेढ़ हजार से अधिक सड़क हादसे हुए, जिनमें 900 से ज्यादा मौतें हुईं।
  • सबसे भीषण दुर्घटना 4 नवंबर, 2024 को पौड़ी-अल्मोड़ा की सीमा पर मरचूला में हुई, जहां एक बस खाई में गिर गई। इस हादसे में 38 लोगों की मौत हुई।
  • एक अन्य बड़ा हादसा 25 दिसंबर, 2024 को हुआ, जब भीमताल से हल्द्वानी जा रही उत्तराखंड रोडवेज की बस खाई में गिर गई, जिसमें 4 लोग मारे गए और 24 घायल हुए।

बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से साफ है कि सड़क सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड राज्‍य अपना रिकॉर्ड सुधारने की दिशा में उतना गंभीर नजर नहीं आता। मरचूला हादसे में, 40 यात्रियों की क्षमता वाली बस में 63 लोग सवार थे। चलने के करीब डेढ़ घंटे के बाद ही बस असंतुलित होकर मरचूला के निकट डेढ़ सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी और 38 यात्रियों की मृत्यु हो गई। इससे पूर्व एक जुलाई 2018 को इसी क्षेत्र में धूमाकोट के पास ऐसी ही एक बस दुर्घटना में 48 लोगों की मौत हुई थी।

सड़क हादसों की जांच रिपोर्ट कभी पता नहीं चलती। मरचूला हादसे के बाद सरकार ने सीटों के अतिरिक्त एक भी यात्री ले जाने पर सख्त पाबंदी लगाई थी, मगर क्या हुआ, आज कोटद्वार बस अड्डे का ही जायजा लें तो यहां से पहाड़ से विभिन्‍न मोटर मार्गों पर चलने वाली बसों में यात्रियों की बड़ी संख्या सच बयां कर देगी।

सड़कों का जाल बिछा पर सुरक्षा पर ध्यान नहीं

पर्वतीय क्षेत्रों में जिस तरह लिंक मार्गों का जाल बिछ रहा है, उसे विकास तो कहा जाएगा, पर यहां सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की कमजोर स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन (जीएमओयू), टिहरी गढ़वाल मोटर्स ओनर्स यूनियन (टीजीएमओयू) और कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन (केएमओयू) जैसी सहकारी संस्थाएं वर्षों से पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इन्होंने परिवहन में सहकारिता का एक अनूठा मॉडल स्थापित किया है, लेकिन हाल के वर्षों में गांव-गांव तक सड़कों के पहुंचने के साथ ही अनधिकृत जीप परिवहन का चलन तेजी से बढ़ा है। इसका नतीजा यह है कि जीएमओयू जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। उनके पास नई गाड़ियां नहीं हैं और 10-15 साल पुराने, जर्जर वाहनों से ही किसी तरह काम चला रही हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

सड़क परिवहन के अलावा, बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं के बढ़ते उपयोग ने भी एक नए तरह के जोखिम को जन्म दिया है। पिछले बारह वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हेलीकॉप्टर हादसों में 38 लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊपरी हिमालय का मौसमी मिजाज हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन के लिए अनुकूल नहीं है। दुर्भाग्य से, सरकार अक्सर इन चेतावनियों को नजरअंदाज करती है, और बाद में निजी हेलीकॉप्टर कंपनियां सुरक्षा नियमों की अनदेखी करती हैं, जिससे ये हादसे होते हैं।

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

  • यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित

    यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित0

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।

    READ MORE
  • अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट

    अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट0

    देश में मौसम ने दो अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देकर बारिश की उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने का अलर्ट जारी किया है।

    READ MORE
  • ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ

    ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ0

    भारतीय वायुसेना के जांबाज योद्धाओं की बहादुरी की कहानियां हमेशा देशवासियों के भीतर गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और अद्भुत युद्ध कौशल का परिचय देकर भारतीय वायुसेना का मान बढ़ाया। दुश्मन के इलाके में आधी रात को अंजाम दिए गए इस बेहद जोखिम भरे मिशन में उन्होंने जिस धैर्य और सटीकता के साथ कार्रवाई की, वह आज भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की मिसाल बन चुकी है।

    READ MORE

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this