Tuesday , 15 September 2026
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धराली, थराली की तर्ज पर पौड़ी को भी राहत पैकेज – पूर्णतः क्षतिग्रस्त भवनों और मृतकों के परिजनों को मिलेंगे पांच-पांच लाख रुपये

पौड़ी में 6 अगस्त को घटित आपदा के प्रभावितों को धराली और थराली की तर्ज पर राहत पैकेज प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि आपदा में जिनके आवास पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें ₹5 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, मृतकों के परिजनों को भी ₹5 लाख की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि इस सहायता में SDRF के मानकों के अनुरूप दी जाने वाली राशि SDRF मद से प्रदान की जाएगी, जबकि शेष राशि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दी जाएगी। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि इस संबंध में शीघ्र कार्रवाई करते हुए प्रभावितों को राहत पहुंचाई जाए।

उन्होंने यह निर्देश आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस विपदा की घड़ी में पूरी मजबूती के साथ प्रभावितों के साथ खड़ी है। चाहे धराली हो, थराली, स्यानाचट्टी या अब पौड़ी – सभी स्थानों पर राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए गए हैं।

पौड़ी में 6 अगस्त को भारी नुकसान

6 अगस्त को पौड़ी तहसील के अंतर्गत ग्राम सैंजी (पट्टी बाली कण्डारस्यूं) और ग्राम रैदुल (पट्टी पैडुलस्यूं) में अतिवृष्टि के कारण हुए भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ था। कई आवासीय भवनों और कृषि भूमि को व्यापक क्षति पहुंची। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया और उनकी भोजन, आवास एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित की।

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी, चमोली और पौड़ी के जिलाधिकारियों द्वारा किए गए राहत कार्यों की सराहना की और कहा कि प्रभावितों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि न केवल राज्य सरकार, बल्कि केंद्र सरकार भी पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावितों के साथ खड़ी है।

धराली की तर्ज पर थराली और पौड़ी में भी भेजी जाएगी विशेषज्ञों की टीम

थराली में 22 अगस्त को आई आपदा के कारणों का अध्ययन करने के लिए मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों की टीम भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि धराली की ही तरह थराली में भी विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाना आवश्यक है ताकि यह समझा जा सके कि हिमालयी क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं बार-बार क्यों घट रही हैं, और इतना भारी मलबा पानी के साथ क्यों बह रहा है।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (रुड़की), उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, केंद्रीय जल आयोग और सिंचाई विभाग के विशेषज्ञ जल्द ही थराली का दौरा करेंगे।

इस संबंध में अपर सचिव/अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप द्वारा सभी संबंधित संस्थानों को पत्र जारी कर दिया गया है।

विशेषज्ञ टीम नगर पंचायत थराली के राड़ीबगड़, तहसील कार्यालय परिसर, कोटडीप, थराली बाजार, चौपड़ों एवं सगवाड़ा में बाढ़ और भूस्खलन के कारणों का अध्ययन करेगी और न्यूनीकरण के उपाय सुझाएगी। सभी संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने संस्थानों से एक-एक विषय विशेषज्ञ को नामित करते हुए तत्काल चमोली जिलाधिकारी से संपर्क करें।

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Hill Mail

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