अनुमोदित किस्मों में धान की पंत धान 29, जौ की पंत जौ 1091 (यूपीबी-1091), मक्का की पंत संकर मक्का 9 (डीएच-353), राई की पीआरबी 2015-2, ज्वार की पंत चरी 16 (यूटीएफएस-121) और जई की पंत चारा जई-5 (यूपीओ-16-4) शामिल हैं।
धान की पंत धान 29 अल्प अवधि में पकने वाली उच्च उत्पादकता वाली बौनी किस्म है। यह करीब 115 दिन में तैयार होती है और इसकी उत्पादन क्षमता 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। कम अवधि में पकने के कारण फसल को रोग एवं कीट प्रकोप से बचाने में भी मदद मिलती है।
पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अनुमोदित पंत जौ 1091 ने पिछले तीन वर्षों के परीक्षणों में प्रचलित किस्मों यूपीबी-1008, वीएलबी-130 और वीएलबी-118 की तुलना में क्रमशः 21.98, 8.36 और 5.87 प्रतिशत अधिक उपज दर्ज की। पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी उपज क्षमता 38.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। यह रतुआ और आवृत कंड रोग के प्रति अवरोधी भी है।
मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुमोदित पंत संकर मक्का 9 एकल संकर किस्म है। इसकी उपज क्षमता खरीफ में 84.85 क्विंटल और बसंत में 92.13 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। राज्य स्तरीय परीक्षणों में इसकी औसत उपज 64.30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। मजबूत तने, मध्यम ऊंचाई और सुडौल नारंगी-पीले दानों वाले भुट्टे इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
राई की पीआरबी 2015-2 ने राज्य स्तरीय परीक्षणों में पीआर-20 और क्रांति की तुलना में क्रमशः 15.55 और 12.95 प्रतिशत अधिक उपज दी। यह 134 दिन में पकती है और इसमें तेल की मात्रा 40.8 प्रतिशत है। यह रोग एवं कीटों के प्रति भी अवरोधी है।
चारा उत्पादन के लिए पंत चरी 16 की औसत हरे चारे की उपज 828.35 क्विंटल और सूखे चारे की 124.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। वहीं पंत चारा जई-5 से औसतन 599.48 क्विंटल हरा और 131.76 क्विंटल सूखा चारा प्राप्त हुआ। जई का चारा उच्च गुणवत्ता वाला है और इसमें न्यूट्रल डिटर्जेन्ट फाइबर तथा एसिड डिटर्जेन्ट फाइबर की मात्रा कम है।
इन किस्मों के विकास में विश्वविद्यालय के विभिन्न वैज्ञानिकों का योगदान रहा। कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने सभी वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि एक साथ छह फसलों की उन्नत किस्मों का अनुमोदन विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इन किस्मों से प्रदेश में खाद्यान्न और चारा उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।


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