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धंसते पहाड़, दरकती ज़मीन: उत्तराखंड के गांवों में बढ़ा खतरा, लोग दहशत में

उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में लगातार हो रही भीषण बारिश ने पहाड़ी इलाकों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल जैसे संवेदनशील जिलों में भूस्खलन और ज़मीन धंसने की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं।

उत्तराखंड में इन जिलों के कई गांवों में ज़मीन खिसकने लगी है, जिससे घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। कुछ मकानों की दीवारें पूरी तरह से फट चुकी हैं और छतों में भी दरारें देखी गई हैं। यह स्थिति इतनी भयावह हो गई कि लोगों ने रातों-रात अपने घर छोड़ने पड़े। कई गांवों में तो प्रशासन ने खुद नोटिस जारी कर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने को कहा है।

बंद होते हाईवे और दरकती सड़कें

स्थिति और गंभीर तब हो गई जब राज्य की जीवनरेखा कहे जाने वाले गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी दरारें और धंसाव देखने को मिला। इससे न केवल चारधाम यात्रा प्रभावित हुई, बल्कि दूर-दराज के गांवों से संपर्क भी कट गया। टिहरी, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में कई मुख्य और संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद हो चुके हैं।

प्रशासन की कोशिशें और चुनौतियां

लोक निर्माण विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोला जाए। विभाग के सचिव पंकज पांडेय ने जानकारी दी कि हर बंद सड़क को उसी दिन खोलने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन भारी बारिश बार-बार सारा काम बिगाड़ देती है। जैसे ही सड़कें खुलती हैं, फिर बारिश होती है और वही सड़कें दोबारा बंद हो जाती हैं।

इसके बावजूद, विभाग की टीमें लगातार काम में लगी हैं। राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें भी जुटी हुई हैं। अस्थायी राहत शिविरों में लोगों को शिफ्ट किया गया है, लेकिन मौसम के चलते राहत कार्यों में भी रुकावटें आ रही हैं।

गड्ढा मुक्त सड़क अभियान: 15 सितंबर से

वहीं, सरकार ने प्रदेश भर की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए 15 सितंबर से ‘गड्ढा मुक्त सड़क अभियान’ शुरू करने की घोषणा की है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा के मुताबिक, 31 अक्टूबर तक सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्य योजना तैयार कर ली गई है और बजट भी आवंटित कर दिया गया है।

पहाड़ों पर फिर मंडरा रहा है खतरा

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में हर साल भारी बारिश के दौरान इस तरह की त्रासदी सामने आती है, लेकिन इस बार स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर नज़र आ रही है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और धंसते गांव – ये सब मिलकर एक बड़ी आपदा का संकेत दे रहे हैं। प्रशासन और सरकार को अब केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि स्थायी समाधान और दीर्घकालिक नीति पर काम करना होगा, ताकि पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को हर साल इस तरह की असुरक्षा से ना गुजरना पड़े।

पहाड़ी से मलबा गिरने से बोलेरो वाहन दुर्घटनाग्रस्त

01 सितम्बर, 2025 को मुनकटिया क्षेत्र में एक बोलेरो वाहन के ऊपर अचानक मलबा गिरने से वाहन में सवार 11 लोग प्रभावित हुए। इस हादसे में 2 व्यक्तियों की मौके पर ही मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई है, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए तथा अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार हेतु सोनप्रयाग लाया गया है। सोनप्रयाग से 2 गंभीर घायलों को उच्चतर केंद्र रेफर किया गया है।

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Hill Mail

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