सीएम योगी और सीडीएस चौहान ने गोरखपुर में किया गोरखा युद्ध स्मारक और संग्रहालय का शिलान्यास

सीएम योगी और सीडीएस चौहान ने गोरखपुर में किया गोरखा युद्ध स्मारक और संग्रहालय का शिलान्यास

जब हम भारतीय सेना के शौर्य की बात करते हैं, तो गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है। ‘जय महाकाली, आयो गोरखाली’ के उद्घोष के साथ जब ये रणभूमि में उतरते हैं, तो दुश्मन पीछे हटने को मजबूर हो जाता है। यह बात सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखा युद्ध स्मारक के शिलान्यास के अवसर पर कही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखा रेजीमेंट के वीर सपूतों की अदम्य साहस और शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाने के उद्देश्य से गोरखा युद्ध स्मारक के सौंदर्यीकरण और संग्रहालय के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। यह परियोजना 45 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी। यह न केवल गोरखा सैनिकों के बलिदान को सम्मान देगी, बल्कि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को भी सुदृढ़ बनाएगी।

कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गोरखा सैनिकों की वीरता को याद करते हुए कहा कि भारतीय सेना की गौरवशाली विरासत आज दुनिया भर में सम्मानित है। उन्होंने कहा, “ब्रिटिश भी गोरखा सैनिकों का सामना नहीं कर पाए और उन्हें संधि के लिए मजबूर होना पड़ा।”

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ भूमिपूजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संग्रहालय का भूमिपूजन किया और परिसर स्थित माँ काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर गोरखा रिक्रूटिंग डिपो (GRD) की कार्यशैली पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें गोरखा रेजीमेंट के बहादुर जवानों की शौर्यगाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में जवानों ने अपनी परंपरा और संस्कृति के अनुरूप नृत्य और गीतों की प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखा रेजीमेंट के शहीदों की वीरांगनाओं को सम्मानित भी किया।

गोरखा सैनिकों की वीरता का स्मरण

मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तियाँ उद्धृत कीं:

“जला अस्थियां बारी-बारी, चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो मर गए मातृभूमि के लिए, बिना किसी कीमत के मोल…
कलम आज उनकी जय बोल।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘पंच प्रण’ का उल्लेख करते हुए कहा कि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, और वीर सैनिकों के प्रति सम्मान आज के भारत की प्राथमिकताएं हैं।

गोरखा रेजीमेंट की शौर्यगाथा

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जब हम भारतीय सेना के शौर्य की बात करते हैं, तो गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है। ‘जय महाकाली, आयो गोरखाली’ के उद्घोष के साथ जब ये रणभूमि में उतरते हैं, तो दुश्मन पीछे हटने को मजबूर हो जाता है।’

उन्होंने बताया कि 1816 के ब्रिटिश-गोरखा युद्ध में ब्रिटिश सेना को संधि के लिए बाध्य होना पड़ा था। स्वतंत्र भारत में भी गोरखा जवानों ने कई मोर्चों पर दुश्मनों को पराजित किया है। उन्होंने महायोगी गुरु गोरखनाथ की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गोरखा सैनिकों की शक्ति का स्रोत शिव और शक्ति के समन्वय में निहित है।

अग्निवीरों को यूपी पुलिस में 20% आरक्षण

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह 100 वर्ष पुराना युद्ध स्मारक अब भव्य और आधुनिक स्वरूप में पुनर्निर्मित होगा। संग्रहालय में गोरखा रेजीमेंट के पुराने यूनिफॉर्म, हथियार, अस्त्र-शस्त्र, और युद्ध कौशल में आए परिवर्तनों को प्रदर्शित किया जाएगा।

उन्होंने अग्निवीर योजना के तहत लौटने वाले सैनिकों को उत्तर प्रदेश पुलिस में 20% आरक्षण देने की घोषणा दोहराई। साथ ही, शहीदों के परिवारों को 50 लाख रुपये की सहायता, नौकरी, और स्मारकों का नामकरण जैसे सरकारी प्रयासों का भी उल्लेख किया।

युवाओं में देशभक्ति की भावना को देगा बल

मुख्यमंत्री ने युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह परियोजना गोरखपुर के कुनराघाट क्षेत्र में रहने वाले हजारों पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके परिवारों के लिए गौरव की अनुभूति कराएगी। यह स्मारक युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण भी बढ़ाएगा।

उन्होंने बताया कि गोरखपुर में नया सैनिक स्कूल भी स्थापित किया गया है, जो “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने में सहायक होगा।

स्मारक सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक : सीडीएस

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने गोरखा सैनिकों की वीरता को नमन करते हुए कहा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। 1886 में कुनराघाट में गोरखा रिक्रूटिंग डिपो की स्थापना हुई थी। प्रथम विश्व युद्ध में 20,000 से अधिक गोरखा सैनिकों ने वीरगति पाई थी। 1925 में इस युद्ध स्मारक की स्थापना हुई थी और आज इसका नवीनीकरण हमारी दूरदृष्टि को दर्शाता है।” उन्होंने इस परियोजना को तीन प्रमुख कारणों से महत्वपूर्ण बताया:

  • गोरखा सैनिकों और भारतीय सेना के मजबूत संबंधों का प्रतीक,
  • उनकी निस्वार्थ सेवा और वीरता का स्मरण,
  • भारत-नेपाल के रिश्तों को और सशक्त करने की दिशा में प्रतिबद्धता।

संग्रहालय में क्या होगा खास?

इस संग्रहालय में गोरखा रेजीमेंट की गाथा को डिजिटल माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा:

  • डिजिटल साउंड एंड लाइट शो
  • 7D थिएटर
  • दीवारों पर म्यूरल पेंटिंग्स
  • वीडियो डॉक्यूमेंट्री

इनके माध्यम से वीर जवानों की कहानियाँ सजीव और प्रभावशाली रूप में दर्शकों तक पहुंचेंगी।

इस अवसर पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान, सांसद रवि किशन, केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, महापौर मंगलेश श्रीवास्तव, गोरखा बिग्रेड के प्रेसीडेंट संजीव चौहान, ले जनरल अजय कुमार सिंह  और गोरखा रेजीमेंट व सेना के अन्य अधिकारीगण एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

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