पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की 138वीं जयंती पर समारोह का आयोजन

पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की 138वीं जयंती पर समारोह का आयोजन

स्वतंत्र भारत के महान राष्ट्रनिर्माताओं में अग्रणी, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की 138वीं जयंती के अवसर पर आज लखनऊ स्थित लोक भवन में एक गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया।

यह आयोजन भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत समारोह समिति के तत्वावधान में हुआ, जिसमें उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के पर्वतीय समाज, सामाजिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं बृजेश पाठक बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। दोनों ही उपमुख्यमंत्रियों ने पंडित पंत जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए उन्हें भारतीय लोकतंत्र का आधार स्तंभ बताया।

केशव प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन में कहा “पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी ने केवल स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया, बल्कि स्वतंत्र भारत की राजनीतिक, सामाजिक और विधायी नींव मजबूत करने में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनका जीवन आज भी जनसेवा का आदर्श है।”

बृजेश पाठक ने उन्हें “कानून के जनक और समाज सुधारक” बताते हुए कहा कि “पंत जी ने उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो क्रांतिकारी कदम उठाए, वे आज भी प्रासंगिक हैं।”

समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी

इस कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधान परिषद सदस्य इंजीनियर अवनीश सिंह, विधायक जय देवी, तथा उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के पर्वतीय समाज के प्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

यह कार्यक्रम पर्वतीय महापरिषद, उत्तर प्रदेश लखनऊ के अध्यक्ष एवं समारोह समिति के संरक्षक गणेश चन्द्र जोशी के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। जोशी ने आयोजन के उद्देश्य और भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि “हमारा प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियां पंडित पंत जी जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लें और देश सेवा के संकल्प को आगे बढ़ाएं।”

वक्ताओं ने किया पंत जी के योगदान का स्मरण

कार्यक्रम के दौरान कई वक्ताओं ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी के संघर्षपूर्ण जीवन, राजनैतिक योगदान और समाज सुधारात्मक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्हें संविधान, प्रशासन और कानून व्यवस्था के उन्नायक के रूप में याद किया गया। विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि कैसे पंत जी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश हुकूमत का डटकर विरोध किया और बाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं भारत के गृहमंत्री के रूप में नैतिक, सुदृढ़ और पारदर्शी शासन की मिसाल कायम की।

कार्यक्रम में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने पंडित पंत जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया और इस बात पर जोर दिया कि देश को आगे ले जाने के लिए ऐसे महान नेताओं के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी है।

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