उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे वन्यजीव हमलों ने सरकार को कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भालू और गुलदार की बढ़ती गतिविधियों से आम लोग सहमे हुए हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग को तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और निगरानी किसी भी हालत में कमजोर नहीं पड़नी चाहिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन घटनाओं की गंभीरता समझते हुए 50 लाख रुपये की तात्कालिक सहायता राशि जारी की है। इस धनराशि से टॉर्च, फोकस लाइट, ग्रास कटर समेत अन्य जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे। पहाड़ी गांवों में रात के समय होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए ये उपकरण काफी उपयोगी माने जा रहे हैं। मुख्य वन संरक्षक समीर रिखड़ी ने बताया कि सरकार के निर्देश पर स्थानीय टीमों को मजबूत किया जा रहा है। गांवों में वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए ट्रैप कैमरा, ड्रोन और गश्त टीमों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही गांव-गांव में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि लोग सतर्क रहें और खतरनाक स्थितियों में तुरंत जानकारी दे सकें।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया कि विभाग की किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने माना कि कई घटनाओं के समय त्वरित प्रतिक्रिया में कमी दिखी थी, जिसे अब ठीक करना जरूरी है। वन मंत्री ने यह भी कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में फुल-प्रूफ निगरानी सिस्टम तैयार किया जाएगा।
विभाग 1926 हेल्पलाइन को भी और सक्रिय बनाने पर काम कर रहा है। इसके जरिए वन्यजीवों के दिखने या हमला करने की स्थिति में ग्रामीण तुरंत सूचना दे सकते हैं। सरकार का मानना है कि समय रहते सूचना मिल जाए तो हमलों को काफी हद तक टाला जा सकता है।स्थानीय लोग भी राहत की उम्मीद कर रहे हैं। कई गांवों में भालू और गुलदार के डर से लोग देर शाम घरों से बाहर नहीं निकलते। अब सरकार और वन विभाग की नई रणनीति से उम्मीद है कि इन घटनाओं में कमी आएगी और लोगों का दैनिक जीवन सामान्य हो सकेगा।


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