टिहरी के नरेंद्रनगर क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब कुंजापुरी मंदिर से लौट रही तीर्थयात्रियों की बस अचानक नियंत्रण खोकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
उत्तराखंड की पहाड़ियों में रविवार सुबह वह खामोशी भरी दहशत छा गई, जब कुंजापुरी मंदिर से लौट रहे श्रद्धालुओं की बस अचानक रसूलगढ़ के पास बेकाबू होकर 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। यात्रा के बाद घर लौटने की खुशी एक ही पल में चीत्कार में बदल गई। हादसा इतना अचानक था कि बस में सवार कई यात्रियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला।
दिल्ली से आए तीर्थयात्री सुबह दर्शन कर वापस लौट रहे थे। लगभग 20 से अधिक लोग बस में सवार थे। जैसे ही वाहन नरेंद्रनगर के मोड़ों को पार कर रहा था, ड्राइवर ने अचानक स्टीयरिंग से नियंत्रण खो दिया। कुछ ही सेकंड में बस सड़क छोड़ते हुए नीचे पत्थरों पर पलटती चली गई। चीख-पुकार सुनते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल बचाव शुरू किया। हादसे में अनामिका चौहान, मधु चौहान, रवि चोपड़ा और दो अन्य श्रद्धालुओं की मौके पर ही जान चली गई। 12 घायलों में कई महिलाएँ और बुजुर्ग शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल लोगों को पहले नरेंद्रनगर अस्पताल और फिर बेहतर उपचार के लिए ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस मोड़ पर तेज़ रफ्तार में थी। स्थानीय लोगों और SDRF टीम ने मिलकर घायलों को खाई से बाहर निकाला। रास्ता कठिन था, लेकिन टीमों ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। खाई से लोगों को स्ट्रेचर पर निकालना सबसे मुश्किल हिस्सा था—फिर भी करीब एक घंटे में सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया। हादसे के बाद नरेंद्रनगर-न्यू टिहरी मार्ग कुछ देर के लिए बंद रखा गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से बस को सीधा किया और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में माना गया है कि ब्रेक फेल होने या अचानक मोड़ पर संतुलन बिगड़ने से हादसा हुआ, हालांकि पुलिस तकनीकी जांच के बाद ही आधिकारिक रिपोर्ट देगी।
स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के प्रति शोक व्यक्त किया है और घायलों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी मामले का संज्ञान लिया और घायलों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कुंजापुरी मंदिर मार्ग पर दुर्घटनाएँ पहले भी होती रही हैं। तीखे मोड़, संकरे रास्ते और गहरी खाइयाँ इस मार्ग को बेहद संवेदनशील बनाती हैं। रविवार का यह हादसा एक और चेतावनी है कि पर्वतीय सड़कों पर रफ्तार और लापरवाही कभी भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
श्रद्धालु इस यात्रा को आध्यात्मिक शांति के लिए करते हैं, लेकिन इस घटना ने परिवारों को अपूरणीय दुख दे दिया। हादसे की गूंज केवल टिहरी में नहीं, बल्कि दिल्ली के उन घरों तक भी पहुँची है, जहाँ लौटने की उम्मीद में बैठे लोग अब शोक में डूबे हैं।








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