देहरादून की ठंडी सुबह में, सचिवालय से आई एक खबर ने राज्य भर में उम्मीद की नई लहर फैला दी उत्तराखंड ने आखिरकार एआई मिशन-2025 की दो महत्वपूर्ण नीतियों का ड्राफ्ट जारी कर दिया। यह वह कदम है, जिसकी झलक पहाड़ों में रहने वाले लोगों की जिंदगी बदलने के वादे में दिखाई देती है। राजभवन में राज्यपाल गुरमीत सिंह द्वारा जारी AI पॉलिसी और डेटा शेयरिंग पॉलिसी सिर्फ तकनीकी दस्तावेज नहीं हैं। यह उस सोच का परिणाम हैं, जो मानती है कि विकास तब तक अधूरा है, जब तक आधुनिक तकनीक गांवों, धारों और दुर्गम पहाड़ियों तक न पहुँच जाए।

राज्यपाल ने साफ कहा “21वीं सदी के तीसरे दशक में आधुनिक तकनीक का हिस्सा होना विकल्प नहीं, आवश्यकता है।” उनकी बात में सच भी है। आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आगे बढ़ रही है, ऐसे में उत्तराखंड पीछे नहीं रहना चाहता। इन नीतियों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे पहाड़ों की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों को ध्यान में रखें। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव निताशा झा ने बताया कि नीति में केंद्र की एआई नीति को आधार बनाते हुए स्थानीय जरूरतों के अनुसार बदलाव किए गए हैं। पहाड़ों में शिक्षा, स्वास्थ्य, मौसम पूर्वानुमान, डिजास्टर मैनेजमेंट, कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग लोगों के जीवन को आसान करेगा। डेटा शेयरिंग पॉलिसी से सरकारी विभागों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान सरल होगा और शोधकर्ता स्थानीय समस्याओं के समाधान खोज सकेंगे।

राज्य चाहता है कि तकनीक सिर्फ शहरों तक सीमित न रहे। गांव की वह लड़की, जो ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बेहतर संसाधन चाहती है; वह किसान, जो मौसम और मिट्टी को समझकर अच्छी पैदावार पाना चाहता है; वह परिवार, जो हर आपदा में डर के साए में जीता है सभी को एआई से उम्मीद है। उत्तराखंड लंबे समय से कहता आया है कि विकास उसके पहाड़ों की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। और यह नीतियाँ उसी सोच का ठोस रूप हैं।
‘तकनीक जब पहाड़ों तक पहुँचेगी, तभी भविष्य वास्तव में उजला होगा। एआई मिशन-2025 उसी उजाले की पहली किरण है’।


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