पिथौरागढ़ में 2020 में लिए गए पतंजलि गाय घी के नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। राज्य और राष्ट्रीय लैब दोनों में घी मानकों पर खरा नहीं उतरा। 1348 दिन चली प्रक्रिया के बाद न्याय निर्णायक अधिकारी ने पतंजलि आयुर्वेद समेत डिस्ट्रीब्यूटर और दुकानदार पर कुल 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग ने लोगों को उत्पाद सावधानी से खरीदने की सलाह दी है।
“चार साल… दो लैब… और एक फैसला—पिथौरागढ़ में लिया गया पतंजलि गाय घी का नमूना आखिर क्यों फेल हो गया? और इतनी लंबी जांच में क्या सामने आया?”
पिथौरागढ़ जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की एक पुरानी जांच आखिरकार निष्कर्ष तक पहुंच गई है। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के गाय घी के सैंपल, जो 20 अक्टूबर 2020 को लिए गए थे, मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। गुरुवार, 27 नवंबर 2025 को आए फैसले में कंपनी समेत तीन कारोबारियों पर कुल 1 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह जानकारी खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन, पिथौरागढ़ के असिस्टेंट कमिश्नर आर.के. शर्मा ने दी।
नमूना कहां से लिया गया था?
साल 2020 में कासनी क्षेत्र में रूटीन चेकिंग के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने करन जनरल स्टोर से पतंजलि गाय घी का नमूना लिया था। सैंपल को पहले राज्य सरकार की राजकीय प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया। यहां यह पाया गया कि घी खाद्य मानकों से नीचे है। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि ऐसा घी उपभोक्ताओं के लिए हानिकारक हो सकता है और उसके साइड इफेक्ट भी संभव हैं।
कंपनी से जवाब और दोबारा जांच की मांग
असिस्टेंट कमिश्नर के अनुसार, पतंजलि को 2021 में रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन कंपनी की ओर से लंबे समय तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बाद में पतंजलि ने 15 अक्टूबर 2021 को दोबारा जांच की अपील की। इसके लिए कंपनी ने निर्धारित राशि 5,000 रुपये भी जमा की।
इसके बाद 16 अक्टूबर 2021 को विभाग की टीम नमूने लेकर राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला, गाजियाबाद पहुंची। 26 नवंबर 2021 को आई केंद्रीय लैब की रिपोर्ट में भी घी स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरा।
मामला कोर्ट में कैसे पहुंचा?
दोनों लैब रिपोर्ट की विस्तृत स्टडी की गई। फरवरी 2022 में यह मामला न्याय निर्णायक अधिकारी/अपर जिलाधिकारी पिथौरागढ़ योगेंद्र सिंह की अदालत में पेश किया गया। अदालत को खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने सभी सबूत और रिपोर्ट उपलब्ध कराई।
कुल 1348 दिनों की सुनवाई और दस्तावेजी प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने पतनंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (निर्माता) पर 1,00,000 रुपये, ब्रह्म एजेंसी (डिस्ट्रीब्यूटर) पर 25,000 रुपये, करन जनरल स्टोर (विक्रेता) पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया है और चेतावनी दी है कि भविष्य में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 का कड़ाई से पालन किया जाए।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सतर्क रहकर ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए। विभाग समय समय पर सैंपलिंग करता रहेगा ताकि बाजार में मिलावटी या मानक से कम खाद्य सामग्री बेचे जाने पर रोक लग सके।
“चार साल लंबी जांच ने साफ कर दिया कि गुणवत्ताहीन खाद्य पदार्थ कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं। पिथौरागढ़ का मामला एक चेतावनी है—मानक से गिरा कोई भी उत्पाद, चाहे वह कितना भी बड़ा ब्रांड क्यों न हो, जवाबदेही से बच नहीं सकता।”
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