उत्तराखंड में राशनकार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत—अब 54 लाख लोग मोबाइल ऐप से घर बैठे ई-केवाईसी कर सकेंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने नई तकनीक शुरू की है, जिससे राशन डीलर की दुकानों पर लगने वाली भारी भीड़ खत्म होगी और आइरिस स्कैन से पहचान तुरंत संभव हो जाएगी।
क्या आपने भी राशन दुकान की लंबी लाइन में घंटों खड़े होकर ई-केवाईसी कराई है? अब यह परेशानी खत्म! एक मोबाइल ऐप आपकी उंगलियों पर पूरी प्रक्रिया आसान कर देगा…उत्तराखंड सरकार ने राज्य के 54 लाख राशन कार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत का एलान किया है। अब लोगों को ई-केवाईसी के लिए राशन दुकान पर लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने एक नए मोबाइल ऐप की शुरुआत की है, जिससे लोग घर बैठे ई-केवाईसी कर सकेंगे।
ई-केवाईसी की अंतिम तारीख 5 दिसंबर तक थी, और लाखों लोग इस समय सीमा को लेकर तनाव में थे। अब यह ऐप पूरे सिस्टम को सरल और तेज बनाने जा रहा है।
घर बैठे होगी ई-केवाईसी प्रक्रिया
नई प्रणाली में सबसे बड़ी सुविधा यह है कि अब किसी भी राशन डीलर के पास जाने की जरूरत नहीं। लोग अपने मोबाइल से ई-केवाईसी कर सकेंगे, जिसमें—
•राशन कार्ड की जानकारी
•परिवार के सदस्यों का विवरण
•आधार से लिंक डेटा
•वार्षिक राशन यूनिट
जैसी सभी जानकारी उपलब्ध होगी। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ऐप बेहद सरल है और कुछ मिनटों में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
आईरिस स्कैन से होगी पहचान फर्जीवाड़ा रोकने पर जोर
ऐप में सबसे अहम तकनीक आईरिस (Iris) स्कैनिंग है।इससे:
•फर्जी पहचान रोकने में मदद मिलेगी
•सही व्यक्ति को राशन का लाभ मिलेगा
•गलत या डुप्लीकेट राशन कार्ड स्वतः चिन्हित होंगे
पहले अंगूठे के निशान की वजह से कई बुजुर्गों और श्रमिकों को दिक्कत होती थी, लेकिन अब आईरिस स्कैन उन्हें आसानी देगा।
अब तक 41 लाख लोगों ने कर ली ई-केवाईसी, बाकी के लिए नई सुविधा मददगार
राज्य खाद्य विभाग के अनुसार:
•कुल 54 लाख लाभार्थियों में से 41 लाख लोगों की ई-केवाईसी हो चुकी है
•लगभग 13 लाख लोगों की केवाईसी लंबित थी
•मोबाइल ऐप इन सभी लंबित मामलों को तेजी से पूरा कराने में मदद करेगा
पिछले दो महीनों में 705 कर्मचारियों ने अभियान चलाकर 994 दुकानों के माध्यम से ई-केवाईसी करवाई, लेकिन भीड़ और समय की कमी बड़ी समस्या थी।
राशन डीलरों की समस्या भी खत्म
अब तक राशन डीलर ही ई-केवाईसी प्रक्रिया कराते थे, जिससे—
•दुकानों पर भारी भीड़
•समय की कमी
•मशीनों की दिक्कत
•कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव
जैसी परेशानियां सामने आती थीं। नई ऐप प्रणाली से डीलरों की यह जिम्मेदारी काफी कम हो जाएगी, और वे केवल जरूरी सत्यापन पर ध्यान दे सकेंगे।
15 दिनों में होगा फुल रोलआउट
अगले 15 दिनों में यह ऐप राज्यभर में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए भी विशेष तकनीकी टीम तैनात की जा रही है, ताकि किसी को भी नेटवर्क या सिस्टम की दिक्कत न हो।
विभाग का कहना है कि अब कोई भी व्यक्ति अपने घर से ही कुछ मिनटों में केवाईसी पूरा कर सकता है—बस ऐप डाउनलोड कर अपने आधार और राशन कार्ड का विवरण अपलोड करना होगा।
सरकार की यह नई तकनीक सिर्फ एक ऐप नहीं—बल्कि लाखों परिवारों के लिए राहत की डोर है। अब न लाइनें होंगी, न समय की बर्बादी। तकनीक ने वह कर दिखाया है जो महीनों से मुश्किल लग रहा था—राशन प्रणाली को आसान, पारदर्शी और सबके लिए सुलभ बनाना।
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