उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय के लिए केंद्र सरकार ने भूमि की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। हल्द्वानी वन प्रभाग की 12.317 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर विश्वविद्यालय बनेगा। राज्य सरकार 2026 से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी में है, जिससे प्रदेश के खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलेगा।
उत्तराखंड के खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। प्रदेश के पहले खेल विश्वविद्यालय के लिए केंद्र सरकार ने भूमि की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही लंबे समय से अटकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति मिल गई है। राज्य सरकार अब वर्ष 2026 से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक कक्षाएं शुरू करने की तैयारी में जुट गई है। राज्य सरकार ने खेल विश्वविद्यालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा था, जिस पर केंद्र की ओर से मंजूरी दे दी गई है।
हल्द्वानी की आरक्षित वन भूमि पर बनेगा विश्वविद्यालय
खेल मंत्री रेखा आर्या ने जानकारी दी कि हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत गोलापार क्षेत्र में स्थित 12.317 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि को खेल विश्वविद्यालय के लिए चुना गया है।
यह भूमि अभी भी रिजर्व फॉरेस्ट के रूप में दर्ज रहेगी और इसके कानूनी स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि क्षेत्र में कोई अतिरिक्त मार्ग या सड़क निर्माण नहीं किया जाएगा। वन भूमि के उपयोग को लेकर लंबे समय से प्रक्रियागत अड़चनें बनी हुई थीं, जिन्हें अब सुलझा लिया गया है।
2026 से कक्षाएं शुरू करने का लक्ष्य
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि विश्वविद्यालय निर्माण कार्य को तेज़ी से पूरा कर 2026 के शैक्षणिक सत्र से कक्षाएं शुरू कर दी जाएं।
खेल मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केंद्र से मिली सैद्धांतिक सहमति को अंतिम स्वीकृति में बदलने के लिए सभी आवश्यक शर्तों का सख्ती से पालन किया जाए। निर्माण प्रक्रिया शुरू होते ही खेल अवसंरचना, प्रशिक्षण केंद्र और शैक्षणिक ढांचे पर काम तेज़ किया जाएगा।
प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा फायदा
खेल विश्वविद्यालय बनने से उत्तराखंड के प्रतिभावान खिलाड़ियों को—
•उच्चस्तरीय प्रशिक्षण
•आधुनिक खेल सुविधाएं
•खेल विज्ञान और कोचिंग की पढ़ाई
•राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर एक ही मंच पर मिलेगा।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह परियोजना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विज़न का परिणाम है और इससे प्रदेश के खिलाड़ी देश-विदेश में उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे। खेल विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि यह उत्तराखंड की युवा खेल प्रतिभाओं का भविष्य गढ़ने वाला केंद्र बनेगा। केंद्र की मंजूरी के साथ अब यह सपना कागज़ों से निकलकर मैदान में उतरने को तैयार है।
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