दून अस्पताल और सेफड़ू द्वारा किए गए शोध में सामने आया है कि आंखों के ऑपरेशन के दौरान शेरॉन चीरा तकनीक अपनाने से चश्मे का नंबर बढ़ने की संभावना कम हो जाती है। 100 मरीजों पर किए गए अध्ययन में यह तकनीक सबसे प्रभावी साबित हुई।
आंखों के ऑपरेशन के बाद चश्मे का नंबर बढ़ने की आशंका को लेकर मरीजों में अक्सर डर रहता है, लेकिन अब इस चिंता को कम करने वाली एक अहम शोध रिपोर्ट सामने आई है। दून अस्पताल और सेफड़ू के यूरोपियस्मु ने संयुक्त रूप से आंखों के ऑपरेशन के दौरान अपनाई जाने वाली तकनीकों पर शोध किया है, जिसमें सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस शोध में खासतौर पर आंखों के ऑपरेशन के दौरान लगाए जाने वाले शेरॉन (एक प्रकार की चीरा तकनीक) का अध्ययन किया गया। शोध में यह पाया गया कि ऑपरेशन के समय शेरॉन चीरा लगाने से एस्टिग्मैटिज्म यानी चश्मे का नंबर बढ़ने की संभावना काफी कम हो जाती है। यह समस्या अक्सर आंखों की सर्जरी के बाद देखने को मिलती है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक चश्मा पहनना पड़ता है।
शोध को सफल बनाने के लिए करीब छह महीने तक अध्ययन किया गया। इस दौरान कुल 100 मरीजों को शामिल किया गया, जिन्हें तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया। 33 मरीजों पर डन स्टेट चीरा, 33 पर फ्रोजन चीरा और 33 मरीजों पर शेरॉन तकनीक का प्रयोग किया गया। शोध के निष्कर्षों में सामने आया कि शेरॉन चीरा तकनीक से ऑपरेशन कराने वाले मरीजों में एस्टिग्मैटिज्म की समस्या सबसे कम देखी गई।

डॉक्टरों का कहना है कि एस्टिग्मैटिज्म आंखों से जुड़ा एक विकार है, जिसमें आंख की सतह की बनावट असामान्य हो जाती है। इसके कारण देखने में धुंधलापन, आंखों में तनाव और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। ऑपरेशन के बाद यदि यह समस्या बढ़ती है तो मरीजों को अतिरिक्त चश्मे या लेंस की जरूरत पड़ सकती है।
इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मेडिकल जर्नल ऑफ फार्मेसी एंड एप्लाइड साइंसेज में प्रकाशित किया गया है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और बढ़ गई है। शोध में उत्तर प्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी सेफड़ू और दून मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञों ने भाग लिया। शोध दल में प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा, मेडिकल विभागाध्यक्ष डॉ. विजय भंडारी, डॉ. सायमा अलीम, प्रोफेसर मीनू बक्श और डॉ. अहमद हुसैन सहित पीजी छात्र भी शामिल रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शोध भविष्य में आंखों की सर्जरी को और सुरक्षित व प्रभावी बनाने में मददगार साबित होगा।
डॉक्टरों ने मरीजों को सलाह दी है कि आंखों के ऑपरेशन से पहले सही तकनीक और अनुभवी सर्जन का चयन बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ सर्जरी सफल होती है, बल्कि ऑपरेशन के बाद चश्मे का नंबर बढ़ने जैसी समस्याओं से भी राहत मिल सकती है।








Leave a Comment
Your email address will not be published. Required fields are marked with *