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पॉलीहाउस खेती से बदली तकदीर, मौड़ा गांव के नवीन बने पहाड़ में बदलाव की मिसाल

चंपावत जिले के लोहाघाट विकास खंड के मौड़ा गांव के युवा काश्तकार नवीन सिंह बोहरा पहाड़ में खेती के जरिए बदलाव की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरे हैं। आधुनिक तकनीक और मेहनत के बल पर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की है, बल्कि गांव के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार की ओर प्रेरित किया है।

नवीन सिंह बोहरा ने पॉलीहाउस के माध्यम से बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है। वे करीब पांच नाली भूमि में टमाटर, मटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी, बंदगोभी, लौकी, तोरई और करेला जैसी फसलों की सफल खेती कर रहे हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है।

इसके साथ ही उन्होंने अपने बगीचे में संतरा, आम और लीची के लगभग 200 फलदार पौधे भी लगाए हैं, जिनसे भविष्य में अच्छी आमदनी की उन्हें उम्मीद है। वर्तमान में नवीन केवल सब्जी उत्पादन से ही प्रति सीजन 80 हजार से एक लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।

नवीन का कहना है कि सरकारी योजनाओं, कृषि विभाग से मिले तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण ने उन्हें खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाने में मदद की। वे स्थानीय बाजार के साथ-साथ उपज की सीधी बिक्री कर बिचौलियों पर निर्भरता भी कम कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिल रहा है।

उनकी सफलता यह साबित करती है कि कम जमीन, सही तकनीक और निरंतर मेहनत से पहाड़ी क्षेत्रों में भी खेती को लाभ का साधन बनाया जा सकता है। नवीन आज गांव के युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नवीन सिंह बोहरा का यह मॉडल उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। उनकी पहल से गांव में आत्मविश्वास बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर रोजगार की नई संभावनाएं भी सृजित हो रही हैं।

नवीन सिंह बोहरा की सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि यदि सोच आधुनिक हो और जुड़ाव अपनी जमीन से बना रहे, तो पहाड़ भी अपार संभावनाओं से भरपूर हैं।

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Hill Mail

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