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रुद्रप्रयाग की ग्राम पंचायत क्यूडी दशज्यूला बनी नशा-मुक्त समाज की मिसाल

गांव की खुली एवं सर्वसम्मत ग्रामसभा में एक ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लेते हुए पंचायत को पूर्ण रूप से शराब-मुक्त घोषित किया गया है। इस निर्णय के तहत अब गांव में न केवल दैनिक जीवन में, बल्कि विवाह, त्यौहार, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य किसी भी सामाजिक आयोजन में शराब का सेवन और परोसा जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

यह फैसला एक दिन में नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे वर्षों का दर्द, संघर्ष और जागरूकता छिपी हुई है। गांव की महिलाओं ने लंबे समय तक शराब के दुष्प्रभावों को झेला— घरेलू हिंसा, पारिवारिक कलह, बच्चों की उपेक्षा और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं आम होती चली गई थीं। इन्हीं कड़वे अनुभवों ने महिलाओं को सोचने और संगठित होने के लिए मजबूर किया।

गांव के महिला मंगल दलों ने इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने घर-घर जाकर संवाद किया, बैठकों का आयोजन किया और पुरुषों को शराब के सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक दुष्परिणामों से अवगत कराया। यह प्रयास धीरे-धीरे एक आंदोलन का रूप लेता गया, जिसमें बुजुर्गों, युवाओं और पंचायत प्रतिनिधियों का भी सहयोग मिलने लगा।

ग्रामसभा में जब शराब-मुक्त गांव का प्रस्ताव रखा गया, तो ग्रामीणों ने एकमत होकर इसका समर्थन किया। निर्णय को प्रभावी बनाने के लिए कड़े नियम भी तय किए गए। यदि कोई व्यक्ति इस निर्णय का उल्लंघन करता है, तो उस पर ₹21,000 का अर्थदंड लगाया जाएगा, साथ ही उसे सामाजिक स्तर पर जवाबदेही भी निभानी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह निर्णय केवल औपचारिक न रह जाए, बल्कि व्यवहार में भी पूरी तरह लागू हो।

ग्राम प्रधान चंदा देवी ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल महिलाओं के सम्मान, बच्चों की सुरक्षा और गांव के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक थी। उन्होंने कहा कि नशा-मुक्त वातावरण से परिवारों में शांति लौटेगी और महिलाएं तथा बच्चे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।

शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के निर्णयों के दूरगामी सकारात्मक प्रभाव होते हैं। नशा-मुक्त समाज से घरेलू आय में सुधार होता है, बच्चों की शिक्षा पर सकारात्मक असर पड़ता है, युवाओं का ध्यान रोजगार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता है, और समाज में आपसी विश्वास व सहयोग की भावना मजबूत होती है।

गांव के बुजुर्गों और युवाओं का भी कहना है कि यह कदम आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देगा और क्यूडी दशज्यूला की पहचान एक सशक्त, अनुशासित और जागरूक गांव के रूप में स्थापित करेगा।

आज क्यूडी दशज्यूला केवल एक ग्राम पंचायत नहीं, बल्कि नशा-मुक्ति के संकल्प, नारी शक्ति की जीत, और सामूहिक एकता की जीवंत मिसाल बन चुका है।

यह पहल पूरे उत्तराखंड को यह संदेश देती है कि जब समाज स्वयं बदलाव की कमान संभालता है, तो स्थायी और सकारात्मक सुधार संभव होता है। नशा-मुक्त उत्तराखंड की दिशा में यह एक ठोस, प्रेरणादायी और अनुकरणीय कदम है।

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