किसानों तक तकनीक पहुंचाने में विस्तार कर्मियों की भूमिका अहम: डॉ. मनमोहन सिंह चौहान

किसानों तक तकनीक पहुंचाने में विस्तार कर्मियों की भूमिका अहम: डॉ. मनमोहन सिंह चौहान

कृषि तकनीक में तीव्र गति से परिवर्तन हो रहा है, ऐसे में विस्तार रणनीतियों में भी समयानुकूल बदलाव आवश्यक है। पारंपरिक एवं ‘रूढ़िवादी सोच’ से ऊपर उठकर किसानों के साथ कार्य करने के तरीकों और दृष्टिकोण, दोनों में परिवर्तन लाना जरूरी है।

समेटी–उत्तराखंड एवं प्रसार शिक्षा संस्थान, नीलोखेड़ी (हरियाणा) के तत्वावधान में ‘प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में प्रेरणा एवं संचार की भूमिका’ विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 27 से 31 जनवरी, 2026 तक गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के प्रसार शिक्षा निदेशालय में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम समेटी, पंतनगर (उत्तराखंड) में प्रसार शिक्षा संस्थान, नीलोखेड़ी (हरियाणा) के तत्वावधान में तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनमोहन सिंह चौहान ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा किसानों के लिए अनेक उपयोगी तकनीकों का विकास किया गया है। इन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना विस्तार कर्मियों का प्रमुख दायित्व है, ताकि किसान अपनी आय बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि विस्तार कर्मियों की सोच, कार्यशैली और तकनीकों को खेतों में लागू करने की क्षमता ही उनकी कार्यकुशलता की पहचान है।

कुलपति ने कहा कि कृषि तकनीक में तीव्र गति से परिवर्तन हो रहा है, ऐसे में विस्तार रणनीतियों में भी समयानुकूल बदलाव आवश्यक है। उन्होंने पारंपरिक एवं ‘रूढ़िवादी सोच’ से ऊपर उठकर किसानों के साथ कार्य करने के तरीकों और दृष्टिकोण—दोनों में परिवर्तन लाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन को लगभग 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी कई क्षेत्रों में पुरानी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में विस्तार कर्मियों को आत्ममंथन करना होगा कि वे किस दिशा में कार्य कर रहे हैं और क्या उनका प्रयास वास्तव में किसानों के कल्याण में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि वैज्ञानिकों और किसान समुदाय के बीच की दूरी को कम किए बिना तकनीक हस्तांतरण प्रभावी नहीं हो सकता।

कुलपति ने इस बात पर बल दिया कि कृषि विस्तार को आजीविका संवर्धन और उद्यमिता विकास से जोड़ते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाना होगा। उन्होंने राज्य के सभी विस्तार कर्मियों से आह्वान किया कि वे कृषि एवं किसान कल्याण के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें तथा सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं नवीन कृषि तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दें। इस अवसर पर उनके नेतृत्व में सभी प्रशिक्षणार्थियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य करने की शपथ भी ली।

कार्यक्रम के दौरान संयुक्त निदेशक, कृषि (कुमाऊं मंडल) डॉ. पी.के. सिंह ने अधिकारियों से अपील की कि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं और विभागीय कार्यक्रमों को किसानों तक पहुंचाने के लिए समर्पित प्रयास करें।

इस अवसर पर निदेशक, प्रसार शिक्षा, डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी तथा विस्तार कर्मियों से केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. बी.डी. सिंह, प्राध्यापक द्वारा समेटी–उत्तराखंड की प्रमुख उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। वहीं प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. एस.आर. वर्मा ने प्रशिक्षण की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रसार शिक्षा संस्थान, नीलोखेड़ी की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य के सभी जनपदों से आए कुल 35 मध्य स्तरीय विस्तार कार्मिक प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम में विभिन्न विषय विशेषज्ञ, संसाधन व्यक्ति एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में ज्योति कनवाल, यंग प्रोफेशनल (द्वितीय), प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

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