बीकेटीसी में आंतरिक कलह, नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल

बीकेटीसी में आंतरिक कलह, नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों में उनकी प्रशासनिक अक्षमता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भारी नाराजगी बताई जा रही है। बीते एक वर्ष में समिति लगातार विवादों में रही है, जिससे नेतृत्व की विफलता उजागर होती दिखाई देती है।

श्री बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में रिक्त पदों को संविदा और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बीकेटीसी कर्मचारी संघ ने इन नियुक्तियों का विरोध करते हुए अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती को पत्र भेजा है।

कर्मचारियों के विरोध के बाद उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती खुलकर कर्मचारियों के पक्ष में आ गए हैं। उन्होंने मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) को पत्र लिखकर जारी विज्ञप्ति को तत्काल निरस्त करने और कर्मचारियों की मांगों पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

कर्मचारी संघ का आरोप है कि संविदा और प्रतिनियुक्ति के नाम पर चहेतों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, योग्य आंतरिक कर्मचारियों की पदोन्नति और एसीपी (आश्वस्त कैरियर प्रगति) को जानबूझकर लंबित रखा गया है।

इस पूरे मामले ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों में उनकी प्रशासनिक अक्षमता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भारी नाराजगी बताई जा रही है। बीते एक वर्ष में समिति लगातार विवादों में रही है, जिससे नेतृत्व की विफलता उजागर होती दिखाई देती है।

केदारनाथ धाम में बिना अनुमति हेलीकॉप्टर संचालन का प्रकरण और उससे जुड़ा हंगामा भी इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। यात्रियों की संख्या में वृद्धि के बावजूद समिति की आमदनी में आई भारी गिरावट ने वित्तीय प्रबंधन पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

दान-चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ निर्णयों में अनियमितताओं के आरोप हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

कुल मिलाकर, हेमंत द्विवेदी के कार्यकाल में बीकेटीसी प्रशासन अव्यवस्था, विवादों और आरोपों के घेरे में नजर आ रहा है।

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