अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले उत्तराखंड की बेटी ममता रावत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उन्हें Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) के उत्तराखंड चैप्टर की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। यह जिम्मेदारी उन्हें रक्षा विनिर्माण और स्वदेशी तकनीकों के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए सौंपी गई है।
पहाड़ की बेटी से रक्षा तकनीक उद्यमी तक का सफर
ममता रावत मूल रूप से बैंचौड़ी गांव, जो पौड़ी गढ़वाल जिले की नंदालस्यूं पट्टी में स्थित है, की निवासी हैं। वर्तमान में वे देहरादून में रहकर अपने उद्यम और तकनीकी कार्यों का संचालन कर रही हैं। पहाड़ की पृष्ठभूमि से निकलकर रक्षा तकनीक जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना उनके दृढ़ संकल्प और मेहनत का परिणाम है।
रक्षा तकनीक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका
ममता रावत, ज्योमा सॉल्यूशंस की प्रबंध निदेशक हैं। उनकी कंपनी स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास और उन्नत सैन्य उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण सब-सिस्टम तैयार करने के क्षेत्र में काम कर रही है।
उनके नेतृत्व में कंपनी निम्नलिखित तकनीकों और रक्षा प्रणालियों पर कार्य कर रही है, गाइरो स्टेबलाइजेशन टेक्नोलॉजी, मिलिट्री ग्रेड पीसीबी (Printed Circuit Board), T-90 Tank से जुड़े महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सब-सिस्टम, Bofors Howitzer के इंजन कंट्रोल यूनिट से संबंधित तकनीक। ये तकनीकें भारतीय रक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण में अहम भूमिका निभाती हैं।
उत्तराखंड में रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने का लक्ष्य
SIDM के अधिकारियों के अनुसार ममता रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड में एक उभरती हुई इनोवेटिव रक्षा तकनीक इकोसिस्टम विकसित हो सकता है। उनका लक्ष्य है कि राज्य में रक्षा निर्माण और तकनीकी नवाचार को नई गति मिले।
ममता रावत का मानना है कि उत्तराखंड में यदि उद्योग, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए तो रक्षा क्षेत्र में कई नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं। इससे न केवल राज्य में निवेश बढ़ेगा बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे।
महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल
ममता रावत की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और उत्तराखंड की प्रतिभा का प्रतीक भी है। पहाड़ की बेटी का रक्षा तकनीक जैसे अत्याधुनिक और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में नेतृत्व संभालना राज्य की नई पहचान बना रहा है।
उनकी यह उपलब्धि उत्तराखंड को रक्षा तकनीक, स्टार्टअप और नवाचार के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।








