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नई दिल्ली में असम राइफल्स और यूएसआई का वार्षिक सेमिनार, सुरक्षा मुद्दों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

असम राइफल्स ने यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) के सहयोग से 10 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित मेजर जनरल समीर सिन्हा ऑडिटोरियम, यूएसआई में ‘असम राइफल्स – यूएसआई वार्षिक संगोष्ठी’ का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का विषय ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के समक्ष सुरक्षा चुनौतियां: आकलन और आगे की राह’ रखा गया था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई थे। उन्होंने मुख्य वक्तव्य देते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर भारतीय सेना और असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, नीति विशेषज्ञ तथा मीडिया के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा, महानिदेशक असम राइफल्स तथा वाइस एडमिरल संजय जे सिंह (सेवानिवृत्त), निदेशक यूएसआई ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए और कार्यक्रम के विषय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को रेखांकित किया। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र की बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समग्र और समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।

इस संगोष्ठी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विशिष्ट सुरक्षा परिदृश्य पर सार्थक विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान किया। यह क्षेत्र अपनी जटिल भौगोलिक परिस्थितियों, विविध सामाजिक संरचना और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण विशेष महत्व रखता है। विशेषज्ञों ने बताया कि सुरक्षा बलों, नागरिक प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के निरंतर प्रयासों से क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में पिछले वर्षों में काफी सुधार हुआ है, लेकिन उभरती चुनौतियों के कारण निरंतर समीक्षा और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता बनी हुई है।

संगोष्ठी के दौरान सीमा प्रबंधन, पूर्वी पड़ोसी देशों में क्षेत्रीय अस्थिरता तथा सूचना और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन विचार-विमर्शों का उद्देश्य वर्तमान सुरक्षा वातावरण का आकलन करना और क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक रणनीतियाँ तलाशना था।

‘पूर्वोत्तर के प्रहरी’ और ‘पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के मित्र’ के रूप में जानी जाने वाली असम राइफल्स सीमा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा तथा नागरिक प्रशासन की सहायता जैसे कार्यों के माध्यम से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

संगोष्ठी में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सुरक्षा बलों, नीति निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

इस संगोष्ठी में हुई चर्चाएं रचनात्मक और भविष्य उन्मुख रहीं और उम्मीद की जा रही है कि ये विचार पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकसित हो रही सुरक्षा चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

Written by
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