उत्तराखंड के पंतनगर में स्थित जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में शुक्रवार से 119वां अखिल भारतीय किसान मेला शुरू होने जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस मेले में देशभर से हजारों किसान, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता और कृषि विशेषज्ञ भाग लेंगे।
इस वर्ष मेले की थीम ‘सशक्त महिला–समृद्ध खेती’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य खेती में महिलाओं की भूमिका को मजबूत बनाना और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना है।
मेले का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। इस अवसर पर राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, कृषि विभाग के अधिकारियों और विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों की भी उपस्थिति रहने की संभावना है। आयोजन के दौरान किसानों को नई कृषि तकनीकों, उन्नत किस्म के बीजों और आधुनिक खेती के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
किसान मेले में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई नवीन नवाचारों और तकनीकों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। यहां विभिन्न कंपनियां और संस्थान अपने उत्पादों, कृषि यंत्रों और उन्नत उपकरणों का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा जैविक खेती से जुड़े उत्पादों, उन्नत बीजों और आधुनिक कृषि मशीनरी की प्रदर्शनी भी किसानों के आकर्षण का केंद्र रहेगी।
मेले में मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। विशेषज्ञ किसानों को मिलेट्स की खेती की आधुनिक तकनीकों, उत्पादन बढ़ाने के उपायों और इसके बाजार से जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी देंगे। इससे किसानों को फसलों के विविधीकरण और आय बढ़ाने में मदद मिल सकेगी।
इस आयोजन के दौरान किसानों के लिए कई प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कृषि वैज्ञानिक किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने, रोग एवं कीट नियंत्रण, जल प्रबंधन और आधुनिक उपकरणों के सही उपयोग के बारे में जानकारी देंगे। इसके साथ ही पशुपालन, डेयरी, बागवानी और मधुमक्खी पालन से जुड़ी नई तकनीकों पर भी विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जाएगी।
मेले में विभिन्न सरकारी और निजी संस्थान भी अपने स्टॉल लगाएंगे, जहां किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और सब्सिडी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी। किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
आयोजकों के अनुसार यह किसान मेला किसानों के लिए नई तकनीक, ज्ञान और अनुभव प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इससे किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा, जिससे खेती को अधिक आधुनिक, उत्पादक और लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।








